धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Saturday, August 28, 2010

हमारे किसी पोस्ट में यदि कोई टिप्पणी करे - 'केवल आपकी लेखनी ही ऐसा चमत्कार कर सकती है!' तो क्या हम फूल के कुप्पा नहीं होंगे?

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हमारे परिचित एक व्यापारी बन्धु हैं जो प्रायः हमसे अंग्रेजी में अपने व्यापार से सम्बन्धित पत्र लिखवाया करते हैं। पत्र लिखने के एवज में वे हमे...
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Friday, August 27, 2010

मुस्लिम आक्रमणकारियों ने तो सिर्फ भारत को लूटा पर अंग्रेजों ने भारत को न केवल लूट कर दरिद्र बनाया बल्कि उसकी संस्कृति और सभ्यता का भी नाश कर दिया

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मुस्लिम आक्रमणकारियों ने तो भारत की अपार सम्पदा में से उसके सिर्फ एक छोटे से हिस्से को ही लूटा था। उनकी लूट के बावजूद भी सत्रहवीं शताब्दी के...
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Thursday, August 26, 2010

मैं एक हिन्दी ब्लोगर - अपंग, असहाय और निर्धन

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मै एक हिन्दी ब्लोगर हूँ। 03-09-2007 को अपना हिन्दी ब्लोग बनाकर मैंने अपना पहला पोस्ट लिखा था और तब से आज तक मात्र कुछ माह को छोड़कर अपने ब्लो...
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Wednesday, August 25, 2010

रिश्तों में दरार

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प्रभा प्रशान्त से कह रही थी, "भैया, इस बार मैं राखी में सिर्फ आपको बुलाउँगी, प्रकाश भैया को नहीं?" और जब प्रशान्त अपने छोटे भाई ...
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Tuesday, August 24, 2010

रक्षा बन्धन भाई-बहन का त्यौहार या पुरोहित-यजमान का?

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हमें आज भी याद है कि बचपन में प्रतिवर्ष रक्षा बन्धन अर्थात् श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन हमारे पिता जी सुबह से ही पुरोहित जी की प्रतीक्षा कर...
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