धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Thursday, October 28, 2010

इक पल जैसे इक युग बीता....

›
पल तो पल होता है! कब आता है और कब निकल जाता है पता ही नहीं चल पाता! फिर भी अनेक बार ऐसा होता है कि वही पल युग बन जाता है, बिताए नहीं बीतता। ...
9 comments:
Monday, October 25, 2010

शिक्षा का उद्देश्य ज्ञानार्जन या धनार्जन?

›
आज अपने बच्चों को यदि आप अच्छी शिक्षा दिलवाना चाहते हैं तो आपको फीस, पुस्तकें आदि के लिए लाखों रुपये सालाना खर्च करना पड़ता है। विद्यालय और म...
7 comments:
Saturday, October 23, 2010

स्वप्न वासवदत्ता - अंक 6 (संस्कृत नाटक का संपादित सरल हिन्दी रूपान्तर)

›
पिछला अंक - स्वप्न वासवदत्ता - अंक 5 (संस्कृत नाटक का संपादित सरल हिन्दी रूपान्तर) (कंचुकी का प्रवेश) कंचुकीः प्रतिहारी! प्रतिहारी! प...
3 comments:
Friday, October 22, 2010

स्वप्न वासवदत्ता - अंक 5 (संस्कृत नाटक का संपादित सरल हिन्दी रूपान्तर)

›
पिछला अंक - स्वप्न वासवदत्ता - अंक 4 (संस्कृत नाटक का संपादित सरल हिन्दी रूपान्तर) (पद्मिनिका का प्रवेश) पद्मिनिकाः मधुरिके! मधुरिके! ...
6 comments:
Thursday, October 21, 2010

स्वप्न वासवदत्ता - अंक 4 (संस्कृत नाटक का संपादित सरल हिन्दी रूपान्तर)

›
(पिछला अंक - स्वप्न वासवदत्ता - अंक 2-3 (संस्कृत नाटक का संपादित सरल हिन्दी रूपान्तर ) (विदूषक का प्रवेश) विदूषकः (प्रसन्नता के साथ) अन...
1 comment:
‹
›
Home
View web version

मेरे बारे में -

  • Admin
  • Unknown
Powered by Blogger.