धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Saturday, November 13, 2010

क्या वास्तव में हम भारतीय हैं?

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जरा हम अपने हृदय पर हाथ रख कर सोचें कि क्या हम बारह भारतीय महीनों के नाम भी जानते हैं? शायद ही हम में से कुछ ही लोग जानते होंगे और क्रमवार त...
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Friday, November 12, 2010

सेवा? व्यापार? या लूट?

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"ग्रेट कन्वेंट स्कूल के यूनीफॉर्म वाली स्वेटर है क्या?" "वो तो साहब आपको सिर्फ फलाँ दूकान में ही मिलेगी, उस दूकान के अलावा ...
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Thursday, November 11, 2010

कहाँ खो गई वो खुशी?

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कितने खुश होते थे हम भाई-बहन जब हम सभी को एक साथ बैठा कर माँ खाना परसती थी! हम चार भाई और एक बहन में कोई एक भी अनुपस्थित होता तो हम सभी उसके...
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Wednesday, November 10, 2010

मान सहित मरिबो भलो… अपमान सहकर जीने से सम्मान के साथ मर जाना अच्छा है

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रहिमन मोहि न सुहाय, अमिय पियावत मान बिनु। बरु विष देय बुलाय, मान सहित मरिबो भलो॥ रहीम कवि कहते हैं कि यदि कोई बिना सम्मान के अमृत भी पिला...
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Tuesday, November 9, 2010

कोई पास न रहने पर भी जन-मन मौन नहीं रहता

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कोई पास न रहने पर भी, जन-मन मौन नहीं रहता; आप आपकी सुनता है वह, आप आपसे है कहता। बीच-बीच मे इधर-उधर निज दृष्टि डालकर मोदमयी, मन ही मन बात...
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