धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Saturday, December 18, 2010

हम.... याने कि करमहीन खेती करे, बैल मरे या सूखा पड़े

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शिरीष के सूखे फल की भाँति, जो कि वृक्ष के फूल-पत्ते झड़ जाने तथा पेड़ के ठूँठ जैसा हो जाने के बावजूद भी, पेड़ से लटकते और खड़खड़ाते ही रहता है, ह...
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Friday, December 17, 2010

हर कोई यह सोचता है कि मैं संसार को बदल दूँगा

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हर कोई यह सोचता है कि मैं संसार को बदल दूँगा पर यह कोई नहीं सोचता कि मैं स्वयं को बदल लूँ। लियो टॉल्स्टाय अपनी तुलना इस संसार के किसी अन्...
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Thursday, December 16, 2010

देवनागरी लिपि - पूर्णतः वैज्ञानिक लिपि

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शायद आपको पता होगा कि हमारी हिन्दी की वर्णमाला, वास्तव में देवनागरी वर्णमाला, पूर्णतः वैज्ञानिक है। वर्ण या अक्षर ध्वनि को प्रदर्शित करने वा...
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Wednesday, December 15, 2010

महमूद गजनवी का सत्रह बार आक्रमण - इतिहास का सच या कपोल कल्पना?

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हमारा इतिहास हमें बताता है कि महमूद गज़नवी ने सन् 1000-1027 के बीच भारत के राजाओं के साथ 17 बार आक्रमण किया था तथा भारत के पंजाब, मथुरा, गुर...
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Tuesday, December 14, 2010

भारत में नापतौल पद्धति

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मनुष्य जीवन के लिए नापतौल की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। यह कहना अत्यन्त कठिन है कि नापतौल पद्धति का आविष्कार कब और कैसे हुआ होगा किन्तु अ...
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