धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Friday, February 25, 2011

प्राचीन भारत में परमाणु विस्फोट

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आदिकाल से प्रकृति सदैव सृजन का कार्य करती रही है और मानव विनाश का। मानव के द्वारा किए गए गए विनाश की भयावहता की कोई सीमा नहीं है। मनुष्य म...
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Thursday, February 24, 2011

पर पत्नी को नाराज भी तो नहीं कर सकते....

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यदि आपने कल का हमारा पोस्ट पढ़ा है तो आज के पोस्ट का शीर्षक पढ़ कर अवश्य ही आप सोच रहे होंगे कि हमारी श्रीमती जी ने जरूर हमारी खिंचाई की है औ...
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Wednesday, February 23, 2011

जरूरी तो नहीं कि प्रत्येक पति जोरू का गुलाम हो

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अब पत्नी चाहे अवधिया जी की हो, चाहे पात्रो जी की हो, चाहे गुप्ता जी की हो या चाहे किसी अन्य व्यक्ति की हो, सभी में एक समानता तो जरूर पाई जात...
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Tuesday, February 22, 2011

संविधान की बन्दिनी

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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) अशोक वाटिका में बन्दिनी सीता- सहमी थी राक्षसियों से घिरी हुई, आज हिन्दी बन्दिनी है संविधान में,...
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Monday, February 21, 2011

राष्ट्रभाषा के उद्‍गार

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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) मैं राष्ट्रभाषा हूँ - इसी देश की राष्ट्रभाषा, भारत की राष्ट्रभाषा संविधान-जनित, सीमित संविधान म...
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