धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Saturday, April 23, 2011
अपने लिखे को लोगों को है पढ़वाना! वरना कैसे पचेगा खाना?
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ब्लोगर का काम है पोस्ट लिखना! वह तो हर हाल में पोस्ट लिखेगा ही। नहीं लिखेगा तो ब्लोगर कैसे कहलाएगा? और फिर लिखना कौन सी बड़ी बात है? लिखने मे...
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Friday, April 22, 2011
हे पृथ्वी! हे जननी! तुम सदैव मेरे लिये प्रेरणामयी रही हो!
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पृथ्वी दिवस पर विशेष दिवस मनाने की आजकल परम्परा चल पड़ी है। शायद इस परम्परा का कारण यह है कि जिन्हें हम हृदय में बसाये रखा करते थे उन्हें अ...
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Thursday, April 21, 2011
गायें आखिर पृथ्वी के चुम्बकीय उत्तर-दक्षिण दिशा में खड़े होने का ही प्रयास क्यों करती हैं?
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गूगल अर्थ सेटेलाइट इमेजेस की सहायता से किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि मवेशियों के झुंड प्रायः पृथ्वी के चुम्बकीय उत्तर-दक्षिण दिशा में ख...
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Wednesday, April 20, 2011
क्या जानवर किसी की मौत के विषय में भविष्यवाणी कर सकते हैं?
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न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के जुलाई 2007 अंक में एक नर बिल्ली के विषय में बहुत ही रोचक स्टोरी प्रकाशित हुई थी जिसके अनुसार नर्सिंग होम क...
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Tuesday, April 19, 2011
ये जीवन है इस जीवन का यही है, यही है, यही है रंग रूप!
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जीवन एक चुनौती है, स्वीकार करो! जीवन एक संघर्ष है, संघर्ष करो! जीवन एक कर्तव्य है, पूरा करो! जीवन एक प्रतिज्ञा है, पूरी करो! जीवन एक एक...
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