धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Friday, July 15, 2011
गुरु तो रहे नहीं, गुरु पूर्णिमा रह गया
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कहाँ रहे अब गुरु? वे गुरु जो अपने शिष्यों को प्राण से भी प्यारे मानते थे, उन्हें जीवन का सद्मार्ग दिखाते थे, आत्म-निर्भर बनाते थे, प्रत्येक ...
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Wednesday, July 13, 2011
चाणक्य रचित सूक्तियाँ
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मनुष्य अकेला ही पैदा होता है; अकेला ही मरता है; अकेला ही अच्छे तथा बुरे परिणामों का अनुभव करता है और अकेला ही परमधाम अथवा नर्क को प्राप्त कर...
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Tuesday, July 12, 2011
समुद्र के अन्य नाम
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संस्कृत ग्रंथ अमरकोष के अनुसार समुद्र के नाम हैं - समुद्र सागर सिन्धु रत्नाकर उदधि जलनिधि सरित्पति उदन्वान सरस्वान अब्धि अर्णव अ...
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Sunday, July 10, 2011
लेना है तो लो नहीं तो चलते फिरते नजर आओ
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रायपुर में यदि आप किसी दुकान में गुटका (पान मसाला) खरीदने जाएँगे तो दुकानदार आपसे प्रिंट रेट से पचास पैसे अधिक लेगा और यदि आप उससे तर्क करने...
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Wednesday, July 6, 2011
समय बीतते जाता है रिवाजें बदलती जाती हैं
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वक्त बीतने के साथ ही साथ रीति-रिवाजें भी बदलती चली जाती हैं। एक समय था जबकि मेरे समाज में किसी का जन्म दिन सिर्फ हिन्दू तिथि के अनुसार ही मन...
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