धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Saturday, July 30, 2011
कई काम हम सिर्फ इसलिए करते हैं क्योंकि उस काम को दूसरों ने भी किया है
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आज छत्तीसगढ़ के प्रायः सभी मकानों के दरवाजों पर नीम की पत्तियों वाली टहनियाँ खुँसी हुई दिखाई पड़ रही हैं। भोर होते ही घरों के दरवाजों में नीम ...
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Friday, July 15, 2011
गुरु तो रहे नहीं, गुरु पूर्णिमा रह गया
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कहाँ रहे अब गुरु? वे गुरु जो अपने शिष्यों को प्राण से भी प्यारे मानते थे, उन्हें जीवन का सद्मार्ग दिखाते थे, आत्म-निर्भर बनाते थे, प्रत्येक ...
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Wednesday, July 13, 2011
चाणक्य रचित सूक्तियाँ
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मनुष्य अकेला ही पैदा होता है; अकेला ही मरता है; अकेला ही अच्छे तथा बुरे परिणामों का अनुभव करता है और अकेला ही परमधाम अथवा नर्क को प्राप्त कर...
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Tuesday, July 12, 2011
समुद्र के अन्य नाम
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संस्कृत ग्रंथ अमरकोष के अनुसार समुद्र के नाम हैं - समुद्र सागर सिन्धु रत्नाकर उदधि जलनिधि सरित्पति उदन्वान सरस्वान अब्धि अर्णव अ...
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Sunday, July 10, 2011
लेना है तो लो नहीं तो चलते फिरते नजर आओ
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रायपुर में यदि आप किसी दुकान में गुटका (पान मसाला) खरीदने जाएँगे तो दुकानदार आपसे प्रिंट रेट से पचास पैसे अधिक लेगा और यदि आप उससे तर्क करने...
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