धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Thursday, August 4, 2011

सावन का पावन प्रणय-मास!

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मूसलाधार वर्षा की टिपर-टिपिर... तेज गति से चलती हुई पुरवाई की साँय-साँय... बादलों की गड़गड़ाहट... दादुरों की टर्राहट... इन समस्त ध्वनि...
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Saturday, July 30, 2011

कई काम हम सिर्फ इसलिए करते हैं क्योंकि उस काम को दूसरों ने भी किया है

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आज छत्तीसगढ़ के प्रायः सभी मकानों के दरवाजों पर नीम की पत्तियों वाली टहनियाँ खुँसी हुई दिखाई पड़ रही हैं। भोर होते ही घरों के दरवाजों में नीम ...
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Friday, July 15, 2011

गुरु तो रहे नहीं, गुरु पूर्णिमा रह गया

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कहाँ रहे अब गुरु? वे गुरु जो अपने शिष्यों को प्राण से भी प्यारे मानते थे, उन्हें जीवन का सद्मार्ग दिखाते थे, आत्म-निर्भर बनाते थे, प्रत्येक ...
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Wednesday, July 13, 2011

चाणक्य रचित सूक्तियाँ

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मनुष्य अकेला ही पैदा होता है; अकेला ही मरता है; अकेला ही अच्छे तथा बुरे परिणामों का अनुभव करता है और अकेला ही परमधाम अथवा नर्क को प्राप्त कर...
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Tuesday, July 12, 2011

समुद्र के अन्य नाम

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संस्कृत ग्रंथ अमरकोष के अनुसार समुद्र के नाम हैं - समुद्र सागर सिन्धु रत्नाकर उदधि जलनिधि सरित्पति उदन्वान सरस्वान अब्धि अर्णव अ...
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