धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Friday, August 26, 2011
सांसद सांसद मौसेरे भाई
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अन्ना हजारे की एक हुँकार पर आबालवृद्ध जनों का एकसूत्र में बँध जाना सिद्ध करता है कि देश की समस्त जनता देश से भ्रष्टाचार का सफाया चाहती है । ...
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Monday, August 22, 2011
नवभ्रष्ट लोचन भ्रष्ट मुख कर भ्रष्ट पद भ्रष्टारुणम्
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15 अगस्त 1947 के दिन, जब राष्ट्र ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर स्वतन्त्रता का हार पहना था, शायद ही देश के किसी व्यक्ति ने कल्पना की रही होगी...
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Saturday, August 20, 2011
आज लोग भ्रष्टाचार से उतने ही त्रस्त है जितने कभी अंग्रेजों की गुलामी तथा लूट से थे
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आज भारत की जनता देश में व्याप्त भ्रष्टाचार से उतनी ही त्रस्त है जितनी अंग्रेजों के जमाने में उनकी गुलामी तथा लूट से थी। उन दिनों देश का प्रत...
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Monday, August 15, 2011
भ्रष्टाचार करके दौलत कमाते रहो, भ्रष्टाचार को ही गाली सुनाते रहो
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क्या अगस्त को हमें वास्तव में स्वतन्त्रता मिली थी? क्या आज हम वाकइ स्वतन्त्र हैं? द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अंग्रेजों की हालत इतनी बदत...
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Wednesday, August 10, 2011
काश! भारतीयों की विलक्षण बुद्धि के अनुरूप शिक्षा नीति एवं व्यवस्था भी होती
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अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा कह रहे हैं कि 'अमेरिकियों पढ़ो, नहीं तो भारत से पिछड़ जाओगे' । उनका यह कथन निश्चित रूप से सिद्ध करता ह...
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