धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Saturday, December 24, 2011
मोहम्मद रफी - एक ऐसे पार्श्वगायक जिन्होंने दूसरे पार्श्वगायक किशोर कुमार तक के लिये भी गाने गाये थे
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रफी साहब के जन्मदिन पर विशेष वर्ष 1924 के आज ही तारीख अर्थात् 24 दिसम्बर को एक ऐसे महान गायक का उदय हुआ था जिनकी मधुर आवाज आज भी हमारे कान...
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Friday, December 23, 2011
शीत की सांझ
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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) हल्की सिहरन धुंधली आभा, सांझ शीत की आती है; शिशुओं की नींद उनींदी-सी, अंधियारी छा जाती है। सू...
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Wednesday, December 21, 2011
साहिर लुधियानवी की नजरों में ताजमहल
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ताज़ तेरे लिये इक मज़हर-ए-उल्फ़त ही सही तुम को इस वादी-ए-रंगीं से अक़ीदत ही सही मेरे महबूब कहीं और मिला कर मुझ से ताज तुम्हारे लिए प्यार का ...
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Thursday, December 1, 2011
होल्डर से जेल पेन तक
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सन् 1958 में जब मैं दूसरी कक्षा पास करके तीसरी में पहुँचा तो पहली बार मेरे बस्ते में, जो कि कपड़े का एक साधारण झोला होता था, कापी, कलम और दवा...
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Sunday, November 27, 2011
कुछ ऐसे भी होते हैं
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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) कुछ ऐसे भी होते हैं जो, गुणहीन हुआ करते हैं; पर तिकड़मबाजी के कारण गुणवान दिखा करते हैं। असलिय...
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