धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Thursday, December 27, 2012
अगर ब्लोगवाणी चाहे तो आज भी फिर से हिन्दी ब्लोगिंग में जान फूँक सकती है
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और किसी को लगे, न लगे, पर मुझे लगता है कि हिन्दी ब्लोगिंग की प्राणशक्ति बेहद कमजोर हो चुकी है, इसके पीछे कारण यही लगता है कि हिन्दी ब्लोगिंग...
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Monday, December 24, 2012
जब मुझे बूढ़े से बच्चा बनना पड़ा
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इस पोस्ट का शीर्षक पढ़ कर शायद आप सोच रहे होंगे कि ये जी.के. अवधिया क्या बेपर की हाँक रहा है? भला आदमी बूढ़े से बच्चा कैसे बन सकता है? यह ...
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Wednesday, November 14, 2012
छत्तीसगढ़ का "गोंड़िन गौरा" पर्व
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दीपावली की रात्रि को छत्तीसगढ़ के गोंड़ "गोंड़िन गौरा" पर्व मनाते हैं। दीपावली की रात्रि आरम्भ होते ही गीली मिट्टी से शिव-पार्वती की ...
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Sunday, May 13, 2012
बेटी बचाओ, सृष्टि बचाओ
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लेखः के.आर. मीना भरतपुर कांई थारो करयो रे कसूर सही है सरकारें आर्थिक मदद के अलावा कर क्या सकती हैं। वे जो परम्पराएँ हैं, जो बेटी वालो...
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Saturday, May 5, 2012
चैटिंग - एक सजा या मजा
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लेखः मुकेश कैन चैटिंग का नशा एक भयंकर रोग के जैसा होता है। ये जिसे एक बार लग गया, तो समझो वो सारे काम-धंधे से गया। भारत में दिनों-दिन इंटरने...
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