धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Monday, December 31, 2012

नया साल मनाने का एक तरीका यह भी

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हमारे मित्र मिश्रा जी, जो कि धार्मिक प्रवृति के व्यक्ति हैं, ने हमसे पूछा, "बताइये तो सही कि आप नया साल कैसे मनायेंगे?" हमने कहा, ...
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Thursday, December 27, 2012

अगर ब्लोगवाणी चाहे तो आज भी फिर से हिन्दी ब्लोगिंग में जान फूँक सकती है

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और किसी को लगे, न लगे, पर मुझे लगता है कि हिन्दी ब्लोगिंग की प्राणशक्ति बेहद कमजोर हो चुकी है, इसके पीछे कारण यही लगता है कि हिन्दी ब्लोगिंग...
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Monday, December 24, 2012

जब मुझे बूढ़े से बच्चा बनना पड़ा

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इस पोस्ट का शीर्षक पढ़ कर शायद आप सोच रहे होंगे कि ये जी.के. अवधिया क्या बेपर की हाँक रहा है? भला आदमी बूढ़े से बच्चा कैसे बन सकता है?  यह ...
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Wednesday, November 14, 2012

छत्तीसगढ़ का "गोंड़िन गौरा" पर्व

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दीपावली की रात्रि को छत्तीसगढ़ के गोंड़ "गोंड़िन गौरा" पर्व मनाते हैं। दीपावली की रात्रि आरम्भ होते ही गीली मिट्टी से शिव-पार्वती की ...
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Sunday, May 13, 2012

बेटी बचाओ, सृष्टि बचाओ

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लेखः के.आर. मीना भरतपुर कांई थारो करयो रे कसूर  सही है सरकारें आर्थिक मदद के अलावा कर क्या सकती हैं। वे जो परम्पराएँ हैं, जो बेटी वालो...
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