धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Friday, March 15, 2013
सोला बरस की उमरिया – सेक्स (Sex) की छूट मिल गई रे सँवरिया
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शायद सरकार को लगता है कि कानूनी रूप से सेक्स की छूट न मिलने के कारण ही लड़कियाँ सेक्स (Sex) याने कि यौन संबंध के लिए अपनी सहमति नहीं देतीं, ज...
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Saturday, February 23, 2013
हमारे पास पहले से सूचना थी और इंतजार कर रहे थे
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हमारे पास पहले से सूचना थी.... हम इंतजार कर रहे थे कि कब बम ब्लास्ट हों.... और कब हम निंदा करें.... सरकार में हैं तो आखिर कुछ न कुछ करना तो ...
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Monday, December 31, 2012
नया साल मनाने का एक तरीका यह भी
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हमारे मित्र मिश्रा जी, जो कि धार्मिक प्रवृति के व्यक्ति हैं, ने हमसे पूछा, "बताइये तो सही कि आप नया साल कैसे मनायेंगे?" हमने कहा, ...
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Thursday, December 27, 2012
अगर ब्लोगवाणी चाहे तो आज भी फिर से हिन्दी ब्लोगिंग में जान फूँक सकती है
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और किसी को लगे, न लगे, पर मुझे लगता है कि हिन्दी ब्लोगिंग की प्राणशक्ति बेहद कमजोर हो चुकी है, इसके पीछे कारण यही लगता है कि हिन्दी ब्लोगिंग...
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Monday, December 24, 2012
जब मुझे बूढ़े से बच्चा बनना पड़ा
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इस पोस्ट का शीर्षक पढ़ कर शायद आप सोच रहे होंगे कि ये जी.के. अवधिया क्या बेपर की हाँक रहा है? भला आदमी बूढ़े से बच्चा कैसे बन सकता है? यह ...
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