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Monday, January 25, 2010

क्या हिन्दी में छंदबद्ध कविताएँ लिखनी खत्म हो जायेंगी?

आज हिन्दी में बहुत सारी कविताएँ लिखी जा रही हैं। एक से बढ़कर एक कवि हैं आज हिन्दी के। हमारे हिन्दी ब्लोगजगत में भी कवि मित्रों की कमी नहीं है। सुन्दर सुन्दर भाव होते हैं उनकी कविताओं में इसीलिये वे पठनीय भी होती हैं। किन्तु अलंकारयुक्त छंदबद्ध रचनाएँ लुप्तप्राय होते जा रही हैं। बहुत ही क्षोभ होता है यह देखकर। गति, यति और लय तो कविता के प्राण हैं किन्तु आज की कविताओं में इन्हीं का अभाव दिखता है।

क्यों आज के कवि छंदबद्ध कविताएँ नहीं लिखते?

क्या हिन्दी में छंदबद्ध कविताएँ लिखनी खत्म हो जायेंगी?