धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
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फाग
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फाग
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Friday, March 5, 2010
ललित जी ने उचकाया ... हमने फाग गाया
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फाग तो बहुत सारे पढ़े आपने, लीजिये आज रंगपंचमी के दिन सुन भी लीजिये। बहुत बेसुरा गला है हमारा पर क्या करें दो पैग लगाने के बाद ललित जी ने उ...
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Thursday, February 18, 2010
मोहे रहि रहि मदन सतावै, पिया बिना नींद नहि आवै
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नींद नहि आवै पिया बिना नींद नहि आवै। मोहे रहि रहि मदन सतावै पिया बिना नींद नहि आवै॥ सखि लागत मास असाढ़ा, मोरे प्रान परे अति गाढ़ा, अरे वो तो ब...
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Monday, February 8, 2010
कर गईं मस्त मुझे फागुन की हवा ... व्हीडियों देख कर समझ सकते हैं कि कैसे?
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वैसे तो हमारे ब्लोग जगत में तरह-तरह की हवाएँ बहती हैं। जब टिप्पणी हवा बहती है तो सभी टिप्पणीमय हो जाते हैं और कभी कभी विवाद की हवा बहती है त...
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