Showing posts with label बंद. Show all posts
Showing posts with label बंद. Show all posts

Monday, July 5, 2010

कोई दम तोड़ दे तो तोड़ दे पर भारत बंद रहेगा

बीमार को अस्पताल नहीं पहुँचा सकते क्योंकि भारत बंद है। कोई यदि उसे अस्पताल तक पहुँचाना भी चाहे तो उसे रोक दिया जायेगा और यदि न रुके तो उसका वाहन जला दिया जायेगा। कोई दम तोड़ दे तो तोड़ दे पर भारत बंद रहेगा।

शक्ति-प्रदर्शन करने वालों को बंद करके अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने से ही मतलब होता है, उन्हें भला इससे क्या मतलब है कि रोज कमाने और रोज खाने वाले कितने लोगों के घर में चूल्हे नहीं जले, होटलों में खाना खाना जिनकी मजबूरी है ऐसे कितने ही लोग भूखे रह गये, वाहनों के अभाव में कितने ही लोग कार्यालय नहीं जा पाये और काम न होने से राष्ट्र का कितना नुकसान हुआ, कितने ही बीमारों ने अस्पताल न पहुँच पाने या दवा न मिल पाने के कारण दम तोड़ दिया ....

Sunday, December 27, 2009

विरोध प्रदर्शन के लिये शहर, प्रदेश या देश बंद करवाना कहाँ तक उचित है?

विरोध प्रदर्शन के लिये शहर, प्रदेश या देश बंद करवाना कहाँ तक उचित है?

भारत बन्द!

छत्तीसगढ़ बन्द!

रायपुर बन्द!

विरोध प्रदर्शित करने के लिये ये बन्द करवाना कहाँ तक उचित है? इस प्रकार से बन्द करवाने से क्या कुछ फायदा होता है? जी नहीं कुछ भी फायदा नहीं होता बल्कि नुकसान ही अधिक होते हैं। एक दिन का काम बंद होने से अहित ही होता है शहर, प्रदेश और देश का।

और फिर ऐसा कौन है जो अपनी इच्छा से अपना कारोबार बन्द कर देना चाहे? राजनीतिबाज स्वार्थी तत्वों के द्वारा जोर-जबरदस्ती करके बन्द करवाया जाता है। लोग डर कर बन्द करते हैं अपना कारोबार।

एक हवाला धंधा करने वाले की दिन दहाड़े हत्या हो जाने के विरोध में कल रायपुर बंद करवा दिया गया। पहले तो बंद करवाने के लिये लोग दस बजे के बाद निकला करते थे किन्तु कल सुबह सात बजे ही उन दुकानों को बंद करवा दिया गया जो खुली थीं। उन दुकानों का खुलना ही सिद्ध करता है कि अपनी दुकान बंद करने की उन दुकानदारों की इच्छा नहीं थी, उनके साथ जबरदस्ती की गई। चाय-नाश्ते की दुकान चलाने वाले ये वो लोग हैं जो रोज कमाते और रोज खाते हैं। एक दिन दुकान न खुलने से भले ही मुनाफाखोर तथाकथित बड़े व्यापारियों को कुछ भी फर्क न पड़ता हो किन्तु इन छोटे दुकानदारों को तो बहुत फर्क पड़ता है।

रायपुर में प्रतिदिन एक लाख से भी अधिक लोग बाहर से आते हैं। ऐसे ही अनेक लोग हैं जो चाय नाश्ता और भोजने के लिये जलपानगृह और भोजनालयों पर ही निर्भर रहते हैं। रायपुर बंद हो जाने से इन सभी लोगों को भूखे रह जाना पड़ता है।

पेट्रोल, डीजल आदि न मिल पाने के कारण कई आवश्यक कार्य नहीं हो पाते यहाँ तक कि अस्पताल तक नहीं पहुँच पाने के कारण मरीजों के जान जाने की सम्भावना हो सकती है।

वास्तव में ये बन्द विरोध प्रदर्शन कम बल्कि शक्ति प्रदर्शन अधिक होता है राजनीतिबाजों का।

आप ही सोचिये क्या औचित्य है ऐसे बंद का?