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Wednesday, October 14, 2009

कल शाम से ब्लॉगवाणी गायब क्यों है ...

कल शाम के बाद से ही ब्लॉगवाणी खुल नहीं रहा है। यह मेरे साथ ही है या आप लोग भी ब्लॉगवाणी नहीं खोल पा रहे हैं? इतने लंबे समय के लिए तो प्रायः सर्वर डाउन नहीं रहता? क्या कोई बहुत बड़ी तकनीकी समस्या आ गई है या फिर नया ब्लॉगवाणी अपलोड हो रहा है?


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Tuesday, September 29, 2009

आखिर ये ब्लॉगवाणी पसंद है क्या बला जिसके कारण इतना बवाल मचा

आप सभी ने देखा होगा कि ब्लॉगवाणी में दिखने वाले सभी लेख के आगे एक बटन होता है जिसमें "पसंद" लिखा होता है और एक संख्या दिखती रहती है। यह बहुत ही काम का बटन है क्योंकि किसी भी लेख के आगे के बटन को क्लिक करके आप दर्शा सकते हैं कि वह लेख आपको पसंद आया है। ज्योंही आप बटन पर क्लिक करते हैं, बटन में दिखाई देने वाली संख्या एक अंक से बढ़ जाती है। इस बटन की सहायता से आप केवल अपनी पसंद दर्शाते हैं बल्कि उस लेख के लेखक को प्रोत्साहन भी देते हैं। भला ऐसा कौन लेखक होगा जो कि अपने लेख को अधिक से अधिक लोगों के द्वारा पसंद किए जाते देख कर खुश न होगा? उस लेखक को न केवल खुशी मिलती है बल्कि और भी अच्छे लेख लिखने की प्रेरणा भी मिलती है।

यह पसंद बटन एक और भी महत्वपूर्ण कार्य करता है वह है अधिक पसंद किए जाने वाले लेखों को ब्लॉगवाणी के दाँईं ओर के हाशिये में बने "आज अधिक पसंद प्राप्त" कॉलम में ले जाने का और वहाँ पर उसे पसंद की संख्या के अनुसार क्रम देने का। याने कि अधिकतम पसंद किए गए लेख को सबसे ऊपर और कम पसंद किए गए लेखों को क्रमवार उसके नीचे लाने का। जाहिर है कि जिस लेख को बहुत से लोगों ने पसंद किया हो उसे आप भी पढ़ना चाहेंगे। हो सकता है कि वह लेख ब्लॉगवाणी के पहले पेज से निकलकर दूसरे, तीसरे और भी आगे के पेज में पहुँच गया हो पर उसे पढ़ने के लिए आपको ब्लॉगवाणी के पेजेस को खंगालना नहीं पड़ता क्योंकि "आज अधिक पसंद प्राप्त" में ही उस लेख को क्लिक करने से वह लेख आपके समक्ष होता है। मैं तो ब्लॉगवाणी खोलते ही सबसे पहले "आज अधिक पसंद प्राप्त" को ही देखता हूँ और बहुत से लेखों को पढ़ जाता हूँ। मेरे जैसे ही और भी बहुत से लोग होंगे। खैर, मैं आपको यही बताना चाहता हूँ कि यह ब्लॉवाणी पसंद बटन बड़े काम की चीज है। मेरा तो विश्वास है कि भविष्य में यह हिन्दी के लेखों की लोकप्रियता का एक मानदंड बन जाएगा!

यह बटन ब्लॉगवाणी सॉफ्टवेयर का एक हिस्सा है और स्वतः ही (ऑटोमेटेड) कार्य करता है। तो इसी बटन की निष्पक्षता पर सन्देह उठने के कारण ही सारा बवाल मचा।

प्रसन्नता की बात यह है कि बवाल अब शान्त हो चुका है। ब्लॉगवाणी बन्द हुई और पुनः शुरू हो गई। हम कामना करें कि भविष्य में इस प्रकार का कोई बवाल फिर कभी न उठ पाए।

बहुत से लोग लेखों को पसंद तो करते हैं किन्तु इस बटन का प्रयोग नहीं करते। यदि आप किसी लेख को पसन्द करते हैं तो उसके लेखक को प्रोत्साहित करना भी आपका नैतिक कर्तव्य होता है। इसलिए मेरा आप सभी से अनुरोध है कि आप बटन का बेझिझक प्रयोग करें और अपने प्रिय लेखकों को प्रोत्साहित करें।

अन्त में सिर्फ इतना ही कहना चाहूँगा कि ब्लॉवाणी टीम ने अपने ब्लॉग में बताया है कि निकट भविष्य में ही वे हमें एक नई ब्लॉवाणी देने जा रहे जिसमें और भी बहुत सी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी और हिन्दी के पाठको की संख्या बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जायेगा।

शाबास ब्लॉगवाणी पसंद ... तेरे पास होगा अब निराला ढंग

गम छोड़ के मनाओ रंगरेली ...

देर आयद दुरुस्त आयद।

खुशखबरी मिल चुकी है ... ब्लॉवाणी फिर शुरू हो चुका है ...

धन्यवाद ब्लॉगवाणी!!!

ब्लॉगवाणी ने अपने प्रशंसकों और समर्थकों के अनुरोध को स्वीकार कर उनकी मनोभावनाओं का सम्मान किया इसके लिए ब्लॉगवाणी को कोटिशः धन्यवाद!

अस्थाई ब्लॉगवाणी जारी रखते हुए एक नये और बेहतर ब्लॉवाणी की शुरुवात की घोषणा बहुत ही बुद्धिमत्तापूर्ण तथा स्वागतेय कार्य है।

निकट भविष्य में होगी एक नई ब्लॉगवाणी पसंद ... जिसका होगा काम करने का निराला ढंग!

मैं ब्लॉवाणी टीम की सहनशीलता, विवेकशीलता और भलमनसाहत को नमन् करता हूँ।

Monday, September 28, 2009

वाह रे ब्लॉगवाणी पसंद ... तूने ही कर दिया ब्लॉगवाणी बंद

ऐसा लगता है कि शायद ब्लॉगवाणी टीम को दिनभर किसी के ब्लोग की पसंद की संख्या बढ़ाने और किसी के ब्लोग की पसंद की संख्या बढ़ने से रोकने के सिवाय और कुछ काम ही नहीं रहता था। ब्लॉगवाणी शायद ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर न होकर मेनुअल वर्क रहा होगा कि जिसे चाहे आगे बढ़ाना है बढ़ा लें और जिसे चाहे पीछे धकेलना है धकेल दें। या फिर यदि ब्लॉगवाणी शायद ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर रहा होगा तो हन्ड्रेड परसेंट परफैक्ट रहा होगा जिससे कि कभी किसी प्रकार की गलती होती ही नहीं रही होगी।

मैं प्रोग्रामर तो नहीं हूँ पर इतना अवश्य जानता हूँ कि किसी भी सॉफ्टवेयर में कभी भी खामी आ सकती है। कोडिंग में जरा सी त्रुटि हुई कि गड़बड़ी शुरू। कोडिंग की त्रुटि कई बार अपने आप भी आ जाती है, कोई जानबूझ कर गलती नहीं करता। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूँ क्योंकि मैंने भी कुछ स्क्रिप्ट्स का प्रयोग किया है और कॉन्फिगरेशन्स सही करने तथा गलतियाँ रोकने में मुझे दाँतों पसीना आ चुका है।

जब ब्लॉगवाणी किसी के ब्लॉग को दिखाने के लिए कोई शुल्क भी नहीं लेता था तो क्या अधिकार था किसी को उसकी आलोचना करने की? यदि ब्लॉगवाणी में इतनी ही खामियाँ नजर आती थीं तो हटा लेते वहाँ से अपने ब्लॉग को और कभी भी मत खोलते ब्लॉगवाणी को अपने कम्प्यूटर में।

किसी के ब्लॉग की पसंद की संख्या बढ़ने से रुक जाए तो ब्लॉवाणी क्यों जवाबदेह हो? और यदि जवाब न मिले तो ब्लॉगवाणी को जनतांत्रिक तरीके से काम करने के विरुद्ध समझा जाना कहाँ तक उचित है? एक अच्छे कार्य में गलतियों पर गलतियाँ निकाल कर उन्हें इस प्रकार से बताना कि अच्छे काम को करने वाले के मर्म को ही छेदने लगे कहाँ तक जायज है?

ब्लॉगवाणी टीम की सबसे बड़ी गलती यही थी कि वे एक अच्छा कार्य कर रहे थे। और बन्धुओं, अच्छा कार्य करने में नेकनामी नहीं हमेशा बदनामी ही मिला करती है।