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Thursday, September 3, 2009

सावधान! सावधान!! राजेश की बातों में न आना, ये राजेश "स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़" वाला सलीम है

दोस्तों, पता नहीं क्यों ये ब्रह्मज्ञानी इस्लाम विशेषज्ञ हज़रत एक फालतू बहस को हर हाल में जारी रखना चाहता है। मेरे कल के पोस्ट हिन्दी ब्लोगिंग को अस्वच्छ करने गया "स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़" में सलीम मियाँ ने राजेश नाम से बहुरूप धर कर निम्न टिप्पणी किया हैः
मेरे हिसाब से इसके सभी सवालों का उत्तर इसी के हथियार से हम लोगों को देना होगा. इसका बॉयकाट करना हम लोगों की बुजदिली होगी. अगर यह वेदों में से श्लोक निकाल कर यह सिद्ध कर रहा है कि अगर यह सिद्ध करता है कि मांसाहार ठीक है तो हमें भी इसकी किताब से इसे यह बताना होगा कि मांसाहार अनार्यों का कर्म है. अगर यह कहता है कि स्त्री एक ज्यादा शादी नहीं कर सकती है तो हम सबको भी यह मिलकर इसे यह बताना होगा कि स्त्री भी कई विवाह कर सकती है. अगर यह वेदों में से श्लोक निकाल कर यह सिद्ध कर रहा है कि ईश्वर एक है तो हमें भी वेदों में से ही निकाल कर यह बताना होगा कि ईश्वर एक नहीं है.

हमें इसके तर्कों का जवाब तर्कों से ही देना होगा. और अगर हम ऐसा नहीं कर पा रहें है और पीछे हट रहें है तो यह हमारी बुजदिली होगी. केवल उसे इसी प्रकार से निरुत्तर कर हम उस स्वच्छ को अस्वच्छ सिद्ध कर पाएंगे.
इस राजेश उर्फ सलीम ने अपने फालतू बहस में हम लोगों को उलझाए रखने के लिए दूसरा तरीका निकाला है याने कि अब हमारी बुजदिली का हवाला दे कर जोश दिला रहा है। ये समझता है कि हम इसके बहकावे में आ जायेंगे। इसे शायद पता नहीं है कि हमारे पास इतना फालतू समय नहीं है कि हम उसकी किताब याने कि कुरआन में खोजते फिरें कि उसमें कोई मांसाहार विरोधी आयत भी है या नहीं। ये समझता है कि जिस प्रकार से वो हमारे श्लोकों को तोड़-मरोड़ कर हमें बताता है, उसी प्रकार से हम भी उसके किसी आयत को तोड़ मरोड़ कर उसे बतायेंगे।

अरे राजेश उर्फ सलीम भाई! तुम्हारी तालीम ने तुम्हें सिखाया होगा कि अर्थ का अनर्थ करो, हमारे श्लोकों को तोड़ मरोड़ कर हमारे धर्मग्रंथों का अपमान करो। पर तुम नहीं जानते कि हमारी शिक्षा तो यही कहती है कि सभी का सम्मान करो, सिर्फ रचनात्मक कार्य करो और आपसी भाईचारा को बढ़ावा दो।

अब आप लोगों को जरूर यह जानने की उत्सुकता हो रही होगी कि मुझे कैसे पता चला कि यह राजेश वास्तव में सलीम है। तो मैं आपको यह बता दूँ कि इस राजेश की एक मूर्खता ने ही उसकी पोल खोल दी। वो क्या है कि कल के मेरे पोस्ट में अपने खुद के नाम से टिप्पणी करने की सलीम मिंया की हिम्मत हो नहीं पाई पर टिप्पणी करने की खुजाल इसे बेतरह सता रही थी। इसलिए उसने राजेश नाम से ब्लोगर में एक खाता खोला और राजेश बन कर एक टिप्पणी कर दिया। पर इसकी मूर्खता देखो कि नाम तो इसने बदल लिया पर टिप्पणी सलीम वाली ही कर गया। टिप्पणी प्रकाशित होते ही इसे अपनी गलती समझ में आई और इसने तत्काल अपनी टिप्पणी को मिटा दिया। देखें मिटाई गई टिप्पणी का स्क्रीनशॉटः


अपनी उस टिप्पणी को मिटा देने के डेढ़-दो घंटे बाद उसने फिर से राजेश नाम से ही दूसरी टिप्पणी कि जिसे कि आप ऊपर पढ़ चुके हैं।

ये राजेश उर्फ सलीम मियाँ बड़े खुश थे कि उनकी पहली टिप्पणी को उनके सिवाय और किसी ने देखा-पढ़ा नहीं है क्योंकि वो तो मिट चुकी है। पर इन हजरत को यह नहीं पता है कि हमारे ब्लोगर बाबा उर्फ गूगल ने हमें एक जादू की छड़ी दी है जिससे हम जान जाते हैं कि हमारे ब्लोग में किसने क्या टिप्पणी की है, भले ही उस टिप्पणी को मिटा दिया गया हो। तो हमें पता चल गया कि मिटाई गई टिप्पणी में क्या लिखा था। नीचे स्क्रीनशॉट देख कर आप भी पढ़ लें कि उस टिप्पणी में क्या लिखा थाः


अब सोचने की बात यह है कि आखिर यह ब्रह्मज्ञानी इस्लाम विशेषज्ञ महापुरुष इस फालतू बहस को जारी क्यों रखना चाहता है? दाल में कुछ काला लग रहा है भाई! कहीं किसी प्रकार की साजिश तो नहीं है?