धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Friday, November 6, 2009
लिखना तो बहुत आसान काम है पर सूझना बहुत मुश्किल है ... आइये जानें कि लिखना सूझता कैसे है
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आप एक पोस्ट लिखना चाहते हैं किन्तु आपको कुछ सूझ नहीं रहा। कल के मेरे पोस्ट की टिप्पणियों में कुछ लोगों ने पूछा है कि लिखने के लिये कुछ सूझे ...
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Thursday, November 5, 2009
मैं जानता हूँ कि मेरा कौन सा पोस्ट हिट होगा और कौन सा पटखनी खायेगा
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एग्रीगेटर्स तो सभी पोस्ट्स को दर्शाते हैं किन्तु कुछ पोस्ट्स को सभी पढ़ते हैं और कुछ सिर्फ पाठको का इंतिजार ही करते रहते हैं। तो आखिर क्यों क...
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Wednesday, November 4, 2009
सत्रहवीं शताब्दी में ब्रिट्रेन अर्धसभ्य किसानों का उजाड़ देश था
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"सत्रहवीं शताब्दी में ब्रिट्रेन अर्धसभ्य किसानों का उजाड़ देश था" ये मैं नहीं कह रहा हूँ बल्कि ये उद्गार हैं प्रसिद्ध इतिहासज्ञ उप...
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Tuesday, November 3, 2009
आना मिश्रा जी का और बनना पोस्ट का याने कि ऐसे भी बनती है पोस्ट
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अक्सर हमें ऐसा लगता है कि यदि हमने किसी दिन एक पोस्ट नहीं ठेला तो शायद बहुत बड़ा अनर्थ हो जायेगा। नदी-नालों का बहना रुक जाने या पर्वतों का टू...
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Monday, November 2, 2009
जब गीत और गान अलग अलग हो सकते हैं तो खेल और क्रीड़ा क्यों नहीं?
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" 'जार्ज पंचम की स्तुति' का महत्व अधिक है या 'भारत माता की वन्दना' का? " मुझे समझ में नहीं आता कि गीत और गान में क...
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