धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Saturday, December 19, 2009

जब हम हर्बल सिगरेट पीते थे ... कुछ यादें बचपन की ...

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हर्बल सिगरेट! याने कि कद्दू की सूखी हुई बेल का टुकड़ा जिसे सिगरेट की तरह जला कर हम धूम्रपान का मजा लिया करते थे बचपन में। बहुत मजा आता था मुँ...
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Friday, December 18, 2009

कामदेव याने कि सेक्स के देवता ... भस्म हो जाने पर भी वे प्राणियों को क्यों प्रभावित करते हैं?

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कामदेव याने कि सेक्स के देवता ... उनके प्रभाव से भला कोई बचा है? तुलसीदास जी लिखते हैं: सम्पूर्ण जगत् में स्त्री-पुरुष संज्ञा वाले जितने चर-...
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Thursday, December 17, 2009

मुझे टिप्पणी मिले ना मिले, मेरे पोस्ट की चर्चा हो ना हो, पर मुझे तो पाठक चाहिये

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टिप्पणियों और चर्चाओं की उतनी चाह नहीं है मुझे जितनी चाह पाठक मिलने की है। टिप्पणियाँ मिल जाये तो बहुत अच्छी बात है, न भी मिले तो भी कोई बात...
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Wednesday, December 16, 2009

रोज खाते हो खाना ... पर कैसे सीखा मनुष्य ने खाना पकाना?

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स्वादिष्ट खाना भला किसे अच्छा नहीं लगता? किन्तु क्या कभी आपने सोचा है कि स्वादिष्ट खाना पकाने के लिये भूनने, उबालने, तलने आदि विधियों का विक...
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Tuesday, December 15, 2009

ये शराबी की मैयत है इसको जो पिये वही कांधा लगाये

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आपको शराबी की मैयत में ले जाने के पहले बता देना चाहता हूँ किः ये ब्लोगिंग नहीं आसां ... हाँ भाई, ब्लोगिंग कोई आसान काम नहीं है, बहुत कुछ करन...
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