धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Saturday, June 5, 2010
कहीं धोखा तो नहीं खा रहे हैं आप?
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इस चित्र को देखकर क्या लग रहा है आपको? देखिये, सच सच बताइयेगा। आप यही सोच रहे हैं ना कि .... ! !! !!! पर आप जो सोच रहे हैं वह कहीं ग...
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Friday, June 4, 2010
आइना वही रहता है चेहरे बदल जाते हैं
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"क्या करना है साहब लड़के को ज्यादा पढ़ा लिखाकर? आखिर करना तो उसे किसानी ही है। चिट्ठी-पत्री बाँचने लायक पढ़ ले यही बहुत है।" यह बात ...
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Thursday, June 3, 2010
खुशखबरी... खुशखबरी... खुशखबरी... ब्लोगिंग से कमाई शुरू
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आप तो जानते ही हैं कि आजकल विज्ञापन का जमाना है और आप विज्ञापन के महत्व को भी अच्छी तरह से समझते हैं। ये विज्ञापन चीज ही ऐसी है कि किसी उत्प...
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Wednesday, June 2, 2010
जरा जोड़ कर बताइये तो... नहीं जोड़ पाये ना?
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जरा जोड़ कर बताइये तो - III VII IX I + L XI V ---------- नहीं जोड़ पाये ना? अच्छा अब जोड़िये - 03 07 09 01 66 अब...
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Tuesday, June 1, 2010
अब रोज-रोज तो कुछ सूझता नहीं इसलिये आज अगड़म-बगड़म लिख रहा हूँ ... जो पढ़ें उसका भी भला, जो ना पढ़ें उसका भी भला
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अजब रोग है ये ब्लोगिंग भी। रोज ही एक पोस्ट लिखने का नशा लगा दिया है इसने हमें। पर आदमी अगर रोज-रोज लिखे भी तो क्या लिखे? कभी-कभी कुछ सूझता ह...
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