धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Saturday, April 9, 2011
अपना अपना भाग्य!
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एक ओर तो एक भला आदमी जीवन भर ईमानदारीपूर्वक काम करता है पर अपने लिए एक छोटा सा मकान भी नहीं बनवा सकता, केवल अपने परिवार के भरण-पोषण के लायक ...
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Friday, April 8, 2011
ये हाल है हिन्दी का!
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आज यदि हम अपने बच्चे यदि कहते हैं यह चौंतीस रुपये का है तो वह झट से पूछता है "चौंतीस याने कि थर्टी फोर" होता है ना? "दाहिना...
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Thursday, April 7, 2011
शाकुन्त लावण्य
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स्वच्छ नीले आकाश में उड़ती हुई चिड़ियाएँ हर किसी के मन को मोह लेती हैं। शाम के समय उद्यानों में पक्षियों का कलरव में शोर का अंश होते हुए भी एक...
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Wednesday, April 6, 2011
अद्भुत् है हिन्दी का शब्द भण्डार!
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वैसे तो प्रत्येक भाषा में एक शब्द के लिए अनेक पर्याय मिलते हैं किन्तु हिन्दी में शब्दों के पर्यायों की संख्या अद्भुत् है। हिन्दी के कई शब्द...
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Tuesday, April 5, 2011
जय दुर्गे मैया
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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) जय अम्बे मैया, जय दुर्गे मैया, जय काली, जय खप्पर वाली। वरदान यही दे दो माता, शक्ति-भक्ति स...
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