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विश्लेषण करने पर मुझे तो यही पता चलता है कि अधिकतर लोग एग्रीगेटर्स से ही आते हैं। इस बात में तो दो मत नहीं हो सकता कि एग्रीगेटर्स फिलहाल हम ब्लोगर्स के बीच में ही लोकप्रिय है, नेट में आने वाले सामान्य लोगों में से अधिकतर लोगों को अभी भी एग्रीगेटर्स के बारे में जानकारी नहीं है। इसका मतलब यही हुआ कि मेरे ब्लोग में अधिकतर अन्य ब्लोगर्स ही आते हैं।वैसे दूसरा पेज बताता है कि आठ-दस लोग गूगल सर्च, गूगल इमेजेस से भी मेरे ब्लोग में आये हुए हैं और यही वो लोग हैं जो कि कुछ खोजते खोजते मेरे ब्लोग में आए। यह बहुत अच्छी बात है कि हम ब्लोगर्स एक दूसरे के पोस्ट को पढ़ें किन्तु बाहरी पाठकों का हिन्दी ब्लोग्स में आना बहुत जरूरी है नहीं तो फिर वही मिसल हो जायेगी कि "जंगल में मोर नाचा किसने देखा"।
तो अब अब जरूरत है सर्च इंजिन्स से पाठक लाने की। मैं समझता हूँ कि सभी ब्लोगर बन्धु इस बात पर ध्यान देंगे और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए भगीरथ प्रयास में जुट जायेंगे।
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"संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण" का नया पोस्ट
