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Monday, November 2, 2009

जब गीत और गान अलग अलग हो सकते हैं तो खेल और क्रीड़ा क्यों नहीं?

"'जार्ज पंचम की स्तुति' का महत्व अधिक है या 'भारत माता की वन्दना' का?"
मुझे समझ में नहीं आता कि गीत और गान में क्या अन्तर है? मेरी मन्दबुद्धि के अनुसार तो दोनों का अर्थ एक ही होता है। फिर हमारे देश में एक 'राष्ट्रगीत' और एक 'राष्ट्रगान' क्यों है? यदि किसी विद्वान मित्र को गीत और गान का अन्तर ज्ञात है तो मुझे भी बताने की कृपा करे। और यदि दोनों में अन्तर है तो कौन बड़ा है और कौन छोटा? क्या 'जनगणमन' बीस है और 'वन्देमातरम्' उन्नीस है? 'जार्ज पंचम की स्तुति' का महत्व अधिक है या 'भारत माता की वन्दना' का?

जब राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दो हो सकते हैं तो 'राष्ट्रीय खेल' और 'राष्ट्रीय क्रीड़ा' क्यों नहीं हो सकते। राष्ट्रीय खेल हॉकी को तो अब अपने देश में कोई पूछता नहीं तो क्यों न क्रिकेट को राष्ट्रीय क्रीड़ा बना दिया जाये? इस प्रकार से अंग्रेजों के इस खेल को सम्मानित करके हम और भी बड़े अंग्रेज भक्त हो जायेंगे और हो सकता है कि सारे क्रिकेट प्रेमियों का वोट भी इस पुनीत कार्य करने वाले को मिले।

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भरत का अयोध्या लौटना - अयोध्याकाण्ड (24)

अयोध्या के अत्यन्त चतुर मन्त्री जाबालि ने कहा, "हे रामचन्द्र! सारे नाते मिथ्या हैं। संसार में कौन किसका बन्धु है? जीव अकेला ही जन्म लेता है और अकेला ही नष्ट होता है। सत्य तो यह है कि इस संसार में कोई किसी का सम्बन्धी नहीं होता। सम्बन्धों के मायाजाल में फँसकर स्वयं को विनष्ट करना बुद्धिमानी नहीं है। आप पितृऋण के मिथ्या विचार को त्याग दें और राज्य को स्वीकार करें। स्वर्ग-नर्क, परलोक, कर्मों का फल आदि सब काल्पनिक बातें हैं। जो प्रत्यक्ष है, वही सत्य है। परलोक की मिथ्या कल्पना से स्वयं को कष्ट देना आपके लिये उचित नहीं है।"