Wednesday, April 30, 2008

तुम एक रचना दोगे, तो लाखों लोग पढ़ेंगे

हम भारतीय लोग बड़े विशिष्ट प्राणी होते हैं। अपने हाल में सन्तुष्ट। भगवान ने जितना दिया है उसी से संतोष कर लेंगे। आवश्यकता ही क्या है अतिरिक्त धनोपार्जन की? घर-परिवार चल रहा है न?

हम लोग विदेशियों, विशेष रूप से अमेरिकनों और यूरोपियनों, से बिल्कुल उलटे हैं। वे लोग ब्लोगिंग करते हैं 'मारकेटिंग' के लिये, हम लोग ब्लोगिंग करते हैं (हिन्दी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से) अपनी रचनाएँ पढ़वाने के लिये। वे लोग अपने ब्लोग में किसी प्रोडक्ट का (जिसकी बिक्री होने पर उन्हें प्रोडक्ट के मूल्य का 25% से 75% तक की राशि affiliate revenue के रूप में प्राप्त होती है) रिव्ह्यु लिखते हैं, हम लोग अपने ब्लोग में अपने लेख, कविता, कहानियाँ आदि लिखते हैं। वे लोग अपने ब्लोग में टिप्पणी करवाते हैं ब्लोग को सर्च इंजिनों में जल्दी लाने के लिये, हम लोग अपने ब्लोग में टिप्पणी करवाते हैं अपनी आत्म-तुष्टि के लिये।

मिली न टिप्पणियाँ तो खुद ही टिप्पणी कर ली.....

उन्होंने मारकेटिंग और एडव्हरटाइजिंग को बढ़ावा देने के अनेकों तरीके निकाल रखे हैं प्रेस रिलीज़ (press release), आर्टिकल डायरेक्टरीज़ (article directories) जैसे।

मैंने इंटरनेट में हिन्दी आर्टिकल डायरेक्टरी खोजा तो मुझे एक भी नहीं मिल पाया। मुझे लगा कि हिन्दी की रचनाओं के लिये भी कृति निर्देशिका (article directory) अवश्य ही होनी चाहये ताकि हिन्दी के लेखकों को अपनी रचनाएँ, ब्लोग/वेबसाइटस आदि का प्रचार करने के लिये एक माध्यम मिल सके। और ऐसे लोगों को, जो अपना हिन्दी ब्लोग तो बनाना चाहते हैं पर लिख नहीं पाते, अन्य लेखकों की रचनाओं पर आधारित ब्लोग बनाने का अवसर मिल सके।

मैंने आर्टिकल डायरेक्टरी बनाने के लिये एक मुफ़्त स्क्रिप्ट जुगाड़ा, अंग्रेजी को हिन्दी में बदला और एक कृति निर्देशिका तैयार कर के रख दिया।

अब बन्धुओं, उस कृति निर्देशिका को अब तक सिर्फ जाकिर अली रजनीश "रजनीश" जी से ही रचनाएँ मिल पाई। आज वो कृति निर्देशिका कई महीनों से रचनाओं के लिये तरस रही है। आज मैं इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी लोगों का सहयोग माँग रहा हूँ कि आप लोग अपनी कम से कम एक रचना उसे प्रदान करने की कृपा करें (अधिक से अधिक रचनाएँ भी दे सकते हैं) और अपने मित्रों तथा परिचितों को वहाँ से रचनाएँ ले कर ब्लोग बनाने के लिये प्रेरित करें। यदि हम सभी ठान लें कि कम से कम पाँच नये ब्लोग्स अवश्य बनवायेंगे तो नेट में हिन्दी ब्लोग्स की संख्या अवश्य ही तेजी के साथ बढ़ेगी।

इस प्रकार से हिन्दी के ब्लोग तो बढ़ेंगे ही, आप लोगों की रचनाओं का जितने भी ब्लोग्स में प्रयोग किया जायेगा उतने स्थान में आपका नाम तथा आपके ब्लोग का लिंक भी जायेगा और आपके ब्लोग का पेज रैंक भी बढ़ेगा।

और कहने की जरूरत नहीं है कि मुझ नाचीज पर आप लोगों का एहसान तो होगा ही।

अपनी रचना यहाँ पोस्ट करें - कृति निर्देशिका

Monday, April 28, 2008

जब हिन्दी के ब्लोगर झूमेंगे, और एडसेंस रकम बरसायेगी

वो सुबह कभी तो आयेगी

इन 'हिन्दी ब्लोग के पोस्टों' से, जब रात का आंचल ढलकेगा
जब 'गूगल' का दिल पिघलेगा, जब 'डॉलर' का सागर छलकेगा
जब हिन्दी के ब्लोगर झूमेंगे, और एडसेंस रकम बरसायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

जिस सुबह की खातिर जुग-जुग से, चिट्ठाकार मरते-जीते हैं
जिस सुबह के अमृत की धुन में, वे जहर के प्याले पीते हैं
इन मेहनतकश चिट्ठाकारों पर, इक दिन तो करम फर्मायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

माना कि अभी इन हिन्दी के, 'पोस्टों' की कीमत कुछ भी नहीं
मिट्टी का भी है कुछ मोल मगर, चिट्ठाकारों की कीमत कुछ भी नहीं
चिट्ठाकारों के मेहनत को इक दिन जब, सिक्कों में ही तोली जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

जब हिन्दीगण 'चैटिंग' छोड़ेंगे, 'एडल्ट साइट्स' से नाता तोड़ेंगे
जब ज्ञान-पिपासा जागेगी, जब ब्लोग्स से नाता जोड़ेंगे
हिन्दी पाठकों की संख्या, बढ़ती और बढ़ती जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

बीतेंगे कभी तो दिन आख़िर, ये फोकट के लाचारी के
टूटेंगे कभी तो बुत आख़िर, अंग्रेजी की इजारादारी के
जब हिन्दी की अनोखी दुनिया की बुनियाद उठाई जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

(महान शायर साहिर लुधियानवी से क्षमायाचना सहित, कृपया इसे भी देख लें या यदि पहले देखा हो तो एक बार फिर से याद ताजा कर लें।)

Saturday, April 26, 2008

मेरे ब्लोग का अपहरण हो गया

मैं तो परेशान हूँ बन्धु, मेरे ब्लोग का अपहरण हो गया। कल शाम को लगभग पाँच बजे (भारतीय मानक समय के अनुसार) तो था पर रात को नौ बजे गायब हो गया। इस बीच पता नहीं कैसे अपहरण हो गया उसका। अब ब्लोग पुलिस तो है नहीं जो रिपोर्ट लिखाता। इसीलिये ब्लोग पंचायत में सूचना दे रहा हूँ।

हमने तो मना किया था अपने ब्लोग को कि मत जाओ भैया 'आज ज्यादा पढ़े गये' की दौड़ में शामिल होने। पर माना ही नहीं। आज कल बड़ों की बात मानने का रिवाज ही कहाँ रह गया है? जब नहीं माना तो हमने कहा अच्छा पहले पता तो कर लो कि दौड़ में शामिल होने के मानदण्ड (criterion) क्या है? पर उसके पास समय ही कहाँ था पता करने के लिये। बिना पता किये ही हो गया दौड़ में शामिल और दौड़ के दौरान अपहृत हो गया।


अब हम परेशान। रात भर ठीक से सो नहीं पाये। सबेरे उठते ही फिर से पता करने दौड़े। हो सकता है शायद बीच में थोड़ी देर के लिये चाय सिगरेट के लिये कहीं पर रुक गया रहा हो और अब तक फिर से दौड़ में वापस आ गया हो। वह तो वापस नहीं आया था पर इस बीच एक दो ब्लोग और भी अपहृत हो चुके थे। अब पता नहीं कि उन ब्लोग वालों को जानकारी है भी नहीं कि उनके ब्लोग का भी अपहरण हो चुका है।

दौड़ के आयोजन कराने वालों से तो हमारा परिचय नहीं है। हम तो समझते थे कि हिन्दी भक्त लोग ही हिन्दी की सेवा के लिये एग्रीगेटर्स बनाते हैं, दौड़ करवाते हैं और भी न जाने क्या क्या करते हैं। तो हमें शक हुआ कि कहीं हमारा पोस्ट अचानक कहीं हिन्दी से अंग्रेजी में तो नहीं बदल गया। अपने इस शक पर खुद ही हमें हँसी आने लगी कि ऐसा कैसे हो सकता है। पर दिमाग के जिस हिस्से ने शक पैदा किया था हमें डाँटते हुये कहा क्यों नहीं हो सकता? अरे अचानक लिंग परिवर्तन हो सकता है तो भाषा परिवर्तन भी तो हो सकता है। हम सकते में आ गये। जा कर देखा तो पोस्ट तो अभी भी हमें हिन्दी में ही दिखी। अब इस बात का तो पता नहीं दूसरों को अंग्रेजी में दिख रही हो।

बहरहाल दौड़ के आयोजन करवाने वाले बन्धुओं से अनुरोध है कि भैये या तो आयोजन करवाओ ही मत या फिर यदि आयोजन करवाते ही हो तो दौड़ के शुरू से आखिर तक सही व्यवस्था भी रखो। और नहीं तो कम से कम जिन्हें आखिर तक नहीं दौड़ने देना है उन्हें दौड़ में शामिल ही मत होने दो। ब्लोग यदि खुद्दार होगा तो किसी दौड़, किसी एग्रीगेटर की मदद के बिना भी अपने लिये पाठक जुटा लेगा या फिर गर्दिश के गर्त में दफ़्न हो जाना पसंद करेगा।

पुनश्चः प्रशांत जी का बहुत बहुत धन्यवाद! मुझे अपनी भूल का एहसास हो गया है और टिप्पणी में मैंने आप लोगों से क्षमा की प्रार्थना की है। शायद कुछ लोगों का ध्यान टिप्पणी में की गई क्षमा प्रार्थना पर न जाये इसलिये मूल पोस्ट में भी क्षमा याचना कर रहा हूँ।

पुनः पुनश्चः एक विचार यह ही आया था कि इस पोस्ट को मिटा दूँ पर अपनी गलती को छुपाना मैं उचित नहीं समझता इसलिये नहीं मिटा रहा हूँ।

Tuesday, April 22, 2008

प्रकाशित होना पोस्ट का और आना टिप्पणी का

अब देखिये ना, मैंने ब्लोगर में एक नया पोस्ट कर के प्रकाशित किया नहीं कि फटाक से मेरे गूगल टॉक ने संदेश दिया कि एक नई टिप्पणी आई है। मन प्रसन्नता से झूम उठा, अरे भाई हूँ तो मैं भी साधारण ब्लोगिया ही, टिप्पणी के बारे में जान कर भला कैसे खुश नहीं होउंगा? और इस बार तो बात ही विशेष थी। विशेषता यह थी कि पोस्ट प्रकाशित हुआ नहीं कि टिप्पणी आ गई। जैसे कोई इंतिजार करते हुये बैठा था कि कब ये पोस्ट प्रकाशित हो और कब मैं टिप्पणी करूँ। जब स्कूल में पढ़ता था तो हिन्दी के सर ने अतिशयोक्ति अलंकार का उदाहरण बताया था - 'हनूमान के पूँछ में लगी पाई आग। लंका सिगरी जल गई गये निशाचर भाग॥' उदाहरण से अच्छी प्रकार से समझ में आ गया था कि अतिशयोक्ति अलंकार क्या होता है। पर पोस्ट प्रकाशित होते ही टिप्पणी आने पर जरा सा भी नहीं लगा कि यह अतिशयोक्ति हो सकती है। और लगे भी क्यों भाई, भले ही अच्छा न लिख पाउँ पर समझता अवश्य हूँ कि मैं भी एक लिख्खाड़ हूँ। अब पोस्ट प्रकाशित होते ही टिप्पणी आ जाने पर यही तो सोचूँगा न कि अब तो मैं बहुत अच्छा लिख्खाड़ हो गया हूँ, भला यह क्यों सोचने लगा कि यह अतिशयोक्ति टाइप की कुछ चीज हो सकती है?

यह भी विचार नहीं आया कि मेरे पोस्ट में तो प्रायः टिप्पणी आती ही नहीं। और आये भी क्यों? मैं खुद तो टिप्पणी करने के मामले में संसार का सबसे आलसी प्राणी हूँ, कभी किसी के ब्लोग में जा कर टिप्पणी नहीं करता। तो भला क्या किसी को क्या पागल कुत्ते ने काटा है कि मेरे ब्लोग में आ कर टिप्पणी करेगा? यह बात अलग है कि दूसरों के ब्लोग में टिप्पणियों को देख कर कुढ़ता अवश्य हूँ। सोचता हूँ कि इतने साधारण लेख पर इतनी सारी टिप्पणियाँ और मेरे सौ टका विशेष लेख पर एक भी नहीं। खैर, यह सोच कर स्वयं को तसल्ली दे लेता हूँ कि अभी लोगों की बुद्धि इतनी विकसित नहीं हुई है कि मेरी बात को समझ पायें। जब सही तरीके से समझेंगे ही नहीं तो भला टिप्पणी क्या करेंगे।

ऐसा भी नहीं है कि मेरे ब्लोग में कभी टिप्पणी आती ही न हो। आती है भइ कभी-कभार चार छः महीने में। अब संसार सहृदय व्यक्तियों से बिल्कुल खाली तो नहीं हो गया है। किसी सहृदय व्यक्ति को तरस आ जाता है कि बेचारा चार छः महीनों से बिना टिप्पणियों के ही लिखा चला आ रहा है, चलो आज इसके ब्लोग पर भी टिप्पणी कर दें।

हाँ तो मैं कह रहा था कि पोस्ट प्रकाशित हुआ नहीं कि टिप्पणी आ गई।


Warning! See Please Here

अरे! यह भी कोई टिप्पणी हुई? ये तो कोई चेतावनी है। टिप्पणीकर्ता 'यहाँ देखो' कह कर शायद यह बता रहा है कि मैंने किसी और स्थान से लेख चोरी कर के अपने ब्लोग में पोस्ट कर दिया है। सरासर चोरी का इल्जाम लग रहा है यह तो। प्रसन्नता काफूर हो गई।

मैंने भी सोचा कि चलो देखें तो सही कि ये कहाँ जाने को कह रहा है, आखिर मैंने चोरी किस जगह से की है। क्लिक कर दिया भैया। अब क्लिक कर देने पर जो शामत आई है उसके बारे में मत ही पूछो तो अच्छा है। न जाने कौन कौन से साइट्स खुलने लगे। चेतावनी पर चेतावनी - आपके कम्प्यूटर में ये वायरस आ गया है, वो वायरस आ गया है, हमसे मुफ्त स्कैन करवायें। मुफ्त स्कैन करवाने पर वायरसों की एक लम्बी फेहरिस्त आ गई जिसे दूर करने के लिये उनके एन्टीवायरस को खरीदने की सलाह दी गई थी। मैने तो केवल एक बार क्लिकिया था बन्धु, यकीन मानिये कि एक बार क्लिक करने के बाद हिम्मत ही नहीं हुई दुबारा क्लिक करने की। पर न जाने कैसे बिना क्लिक किये ही वो साइट अपने आप खुल जाती थी कुछ कुछ देर में और मेरे कम्प्यूटर का मुफ्त स्कैन होने लगता था। लगता था कि कोई भूत घुस आया है मेरे कम्प्यूटर में। अब बन्धु मेरे, बड़ी मुश्किल से उस भूत को भगा पाया मैं।

बड़ी कोशिश करके भूत को भगाने के बाद थोड़ा धीरज बंधा और थोड़ी शान्ति मिली। अब मन में विचार आया कि वो टिप्पणी तो अभी भी मेरे ब्लोग में है। यदि मेरे पाठकों ने उस पर क्लिक कर दिया तो? जरूर वह भूत उन्हें भी तंगायेगा। यह टिप्पणी तो बीच रास्ते में केले का छिलका बन कर पड़ा हुआ है, कोई फिसल कर गिर न जाये। इस टिप्पणी को मिटाना ही पड़ेगा।

अब भइ, इससे पहले कभी कोई टिप्पणी मिटाई नहीं थी। अब कभी-कभार आये हुये टिप्पणी को मैं मिटाने क्यों लगा - क्या मैं इतना बेवकूफ़ हूँ कि अपने ब्लोग से टिप्पणी को मिटा दूँ। हाँ तो टिप्पणी मिटाने का मुझे कुछ अनुभव ही नहीं था। मैंने ब्लोगर एक एक हिस्से को छान मारा पर टिप्पणी मिटाने के उपाय के बारे में कहीं कुछ न मिला। हाँ इस दौरान मुझे ब्लोगर से संकेत जरूर मिला कि कोई स्वतः टिप्पणी करने वाला सॉफ्टवेयर आपके ब्लोग में ऐसे वायरस न फेंक दे इसके लिये वर्ड व्हेरिफिकेशन का प्रयोग करें। हाँ तो मुझे ब्लोगर में टिप्पणी मिटाने का उपाय नहीं मिला (शायद कहीं हो भी तो अक्ल का अंधा होने के कारण मैं उसे देख नहीं पाया), निदान मैं ब्लोगर के फोरम में गया और ढ़ूंढ़-ढ़ांढ़ कर टिप्पणी मिटाने का उपाय प्राप्त कर ही लिया। टिप्पणी को मिटाया और ब्लोगर.कॉम महाशय के सुझाव के अनुसार वर्ड व्हेरिफिकेशन भी लगा दिया।

फिर मैंने सोचा कि अरे, यह मैंने क्या कर दिया। कभी-कभार तो मेरे ब्लोग में टिप्पणी आती है और वर्ड व्हेरिफिकेशन लगा कर मैंने उस कभी-कभार आने वाले टिप्पणी का रास्ता भी बंद कर दिया। एकदम पागल हूँ मैं। दस मिनट बाद ही मैंने उस वर्ड व्हेरिफिकेशन को हटा भी दिया पर इस दस मिनट के दौरान हमारे सभी ब्लोगर बन्धुओं को उस वर्ड व्हेरिफिकेशन के विषय में पता चल गया।

तो साहब किया टिप्पणीकर्ता सॉफ्टवेयर ने और भरना मुझे पड़ा।

पर बाद में "टिप्पणी कर और गाली खा!!" पढ़ कर मन फिर से एक बार प्रसन्नता से झूम उठा क्योंकि मेरे वर्ड व्हेरिफिकेशन लगाने के कार्य से समीर लाल जी जैसे ख्यातिप्राप्त व्यंगकार को एक आइडिया मिला और एक महान व्यंग रचना का जन्म हो गया।

Sunday, April 20, 2008

गूगल सर्च विशेषज्ञ बनें!

हममें से शायद ही कोई ऐसा होगा जो कि गूगल सर्च इंजिन का प्रयोग न करता हो। पर अधिकांश लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होगी कि गूगल सर्च इंजिन में क्या क्या विशेषताएँ हैं। वास्तव में गूगल सर्च इंजिन को इस तरह से बनाया गया है कि मनचाहे सर्च परिणाम प्राप्त हो सकें और अनचाही जानकारियों को सर्च परिणामों में शामिल होने से रोका जा सके।

तो आइये जानें गूगल सर्च के विषय में कुछ गूढ़तम बातें -

विशिष्ट परिणाम प्राप्त करना: मान लीजिये आप 'ब्लोग से कमाई' के विषय में सर्च कर रहे हैं। तो सर्च बॉक्स में ब्लोग से कमाई टाइप करने पर गूगल का सर्च इंजिन 'ब्लोग', 'कमाई' और 'ब्लोग से कमाई' तीनों से सम्बन्धित सर्च परिणाम देगा। किन्तु आप सिर्फ 'ब्लोग से कमाई' से सम्बन्धित सर्च परिणाम प्राप्त करना चाहते हैं। तो इसके लिये आप सर्च बॉक्स में टाइप करते समय 'डबल कोट्स' लगा कर सर्च करें। गूगल सर्च इंजिन केवल 'ब्लोग से कमाई' से सम्बन्धित सर्च परिणाम प्रदर्शित करेगा तथा 'ब्लोग' और 'कमाई' शब्दों से सम्बन्धित सर्च परिणामों को शामिल होने से रोक देगा।

अवांछित शब्द वाले परिणाम हटाना: अब यदि आप चाहते हैं कि 'ब्लोग से कमाई' के सर्च परिणामों में 'अंग्रेजी' शब्द न आये तो सर्च बॉक्स में 'ब्लोग से कमाई -अंग्रेजी' टाइप करें। गूगल सर्च इंजिन सर्च परिणामों में से उन सारे परिणामों को आने ही नहीं देगा जिनमे कहीं पर भी 'अंग्रेजी' शब्द आया हो।

विशिष्ट साइट सर्च: कई बार हम चाहते हैं कि किसी विशेष वेबसाइट में हमारे टाइप किये गये शब्द या वाक्यांश से सम्बन्धित सर्च परिणाम ही मिले। अर्थात् हम वेबसर्च के बदले साइटसर्च करना चाहते हैं। उदाहरण के लिये यदि आप 'उड़न तश्तरी' ब्लोग में 'धार्मिकता' शब्द से सम्बन्धित सर्च परिणाम चाहते हैं तो इसके लिये आप सर्च बॉक्स में 'धार्मिकता site:udantashtari.blogspot.com' टाइप करें। आपको वैसे ही सर्च परिणाम प्राप्त होंगे जैसा कि आप चाहते हैं।

समान तथा समानार्थी शब्द: यदि आप चाहते हैं कि 'मिलनसार एवं व्यवहारकुशल' सर्च करने पर 'धार्मिक' शब्द (या धार्मिक के समानार्थी शब्द) वाले परिणाम प्राप्त हों तो सर्चबॉक्स में 'मिलनसार एवं व्यवहारकुशल ~धार्मिक' टाइप करें।

विशिष्ट डाकुमेंट सर्च: विशिष्ट डाकुमेंट (जैसे कि सिर्फ पॉवर पाइंट प्रस्तुतीकरण) वाले ही परिणाम प्राप्त करने के लिये टाइप करें - 'online business filetype: ppt'

गूगल सर्च को केलकुलेटर जैसे प्रयोग करें: सर्चबॉक्स में आप कोई भी गणित का एक्सप्रेशन टाइप करें और गूगल सर्च आपको केलकुलेटर के जैसे ही उसका परिणाम दे देगा।

उदाहरणः 12116 * 2.34

परिभाषा: किसी भी शब्द (जैसे कि physics) की परिभाषा जानने के लिये गूगल सर्चबॉक्स में टाइप करें -

define: physics

इस जानकारी से यदि आप लोगों को किंचित् मात्र भी लाभ होगा तो मुझे अत्यन्त प्रसन्नता होगी।

Saturday, April 19, 2008

नेट में कमाई ऐसे भी हो सकती है

हम सभी को प्रायः रोज ही किसी न किसी सर्च इंजिन (search engine) का प्रयोग कर के कुछ न कुछ सर्च (search) करने की आवश्यकता पड़ती है। कुछ दिनों पहले मुझे जानकारी मिली कि सर्च (search) करके कमाई भी की जा सकती है। यू.के. की 'माय सर्च फंड्स' (My Search Funds) नामक संगठन (organization) लोगों को इंटरनेट में सर्च (search) करने के एवज में रकम (पाउंड्स में) देती है बशर्ते कि उनके सर्च (search) इंजिन (search engine) का प्रयोग करके सर्च (search) किया जावे। 'माय सर्च (search) फंड्स' (My Search Funds) के सर्च इंजिन (search engine) के द्वारा सर्च (search) करके कमाई करने के लिये पहले उनका सदस्य बनना पड़ता है। और यह सदस्यता बिल्कुल मुफ्त मिलती है अर्थात् सदस्य बनने के लिये एक दमड़ी भी खर्च नहीं करना पड़ता। बिना सदस्य बने भी उनक सर्च इंजिन (search engine) से सर्च (search) किया जा सकता है पर उस सर्च (search) के एवज में आपकी किसी भी प्रकार की कमाई नहीं होगी।

यदि ये सब पढ़ कर आपको लग रहा है कि ये सब बकवास है तो मैं आपसे गुजारिश करूँगा कि आप लेख को और आगे पढ़ कर अपना बहुमूल्य समय बर्बाद न करें क्योंकि यह लेख आपके लिये नहीं है। आप अपने बहुमूल्य समय का सदुपयोग कहीं और कर सकते हैं।

हाँ तो मैं बता रहा था कि 'माय सर्च फंड्स' (My Search Funds) के सर्च इंजिन (search engine) (search engine) के द्वारा सर्च (search) करके कमाई करने के लिये पहले उनका सदस्य बनना पड़ता है। सदस्य बन जाने के बाद उनके साइट में आपका खाता बन जाता है और उस खाते में आपका सारा लेखा-जोखा प्रविष्ट होना शुरू हो जाता है। मैं पिछले माह छः तारीख को अर्थात् 6 मार्च को उनका सदस्य बना हूँ और मेरे खाते में अब तक ₤3.04 जमा हो चुके हैं। (नीचे का स्क्रीनशॉट देखें)

नेट में कमाई ऐसे भी हो सकती है

(खाते में रकम सर्च करने के 24 घंटे बाद अर्थात् दूसरे दिन जमा होती है इसलिये जिस रोज कोई सदस्य बनता है और सर्च करता है तो भी उसके खाते में कुछ भी रकम जमा नहीं दिखाई देती, हाँ सर्च की संख्या अवश्य ही वहाँ पर दर्ज रहती है।)

सर्च (search) कर के कमाई करने के लिये 'माय सर्च फंड्स' (My Search Funds) ने कुछ नियम बनाये हैं जिनमें से सबसे प्रमुख यह है कि प्रतिदि आप जितने चाहें उतने सर्च कर सकते हैं किन्तु सर्च उसी प्रकार से होनी चाहिये जिस प्रकार से सदस्य बनने के पहले आप किसी और सर्च इंजिन का प्रयोग कर के किया करते थे। मतलब यह कि केवल कमाई करने के उद्देश्य से अनाप-शनाप कुछ भी सर्च नहीं की जानी चाहिये। यदि संगठन को ऐसा लगा कि आप उनकी इस सेवा का केवल अपने लाभ के लिये दुरुपयोग कर रहे हैं तो आपकी सदस्यता रद्द कर दी जावेगी।

भुगतान

आपके द्वारा की गई कमाई के भुगतान के लिये नियम यह है कि जिस माह आप के खाते में ₤20.00 या उससे अधिक रकम जमा हो जाती है उस माह के अन्तिम तिथि से 45 दिनों के बाद उस रकम को आपके PayPal खाते में जमा कर दिया जाता है।

संगठन को भुगतान के लिये रकम कहाँ से प्राप्त होता है?

वास्तव में संगठन के सर्च रिजल्ट में तथा उसके साथ साथ कुछ कम्पनियों के विज्ञापन भी आते हैं। इन विज्ञापनों को प्रदर्शित करने के लिये संगठन को विज्ञापनदाता कम्पनियों से अच्छी-खासी रकम प्राप्त होती है और उस प्राप्त रकम का एक छोटा से हिस्से को संगठन भुगतान के रूप में खर्च करती है।

खामियाँ

इस सेवा की सबसे बड़ी खामी मैंने यह महसूस की है कि इनके सर्च रिजल्ट गूगल के सर्च रिजल्ट से उन्नीस होते हैं। मतलब यह कि कभी कभी मनचाहे परिणाम नहीं आ पाते।

जोखिम (Risk)

चूँकि भुगतान के लायक रकम अब तक मेरे खाते में जमा नहीं हुई है और अब तक मुझे कोई भुगतान नहीं मिला है, मैं नहीं कह सकता कि वास्तव में मुझे भुगतान की राशि मिल पायेगी या इंटरनेट के कई अन्य धोखाधड़ी करने वाली कम्पनियों के जैसे ही यह संगठन भी SPAM निकलेगी। किन्तु संगठन का दावा है कि वह eBay तथा इंटरनेट की कई अन्य रेपुटेड संस्थाओं के साथ मिल कर काम करती है और इसीलिये मुझे उम्मीद है कि संगठन भुगतान अवश्य ही करेगी। पर फिलहाल मैं इसे एक जोखिम (risk) मान कर चल रहा हूँ। मेरे लिये यह केवल एक इंटरनेट से कमाई का एक प्रयोग ही है जो किस सफल हो भी सकता है और नहीं भी।

नेट में कमाई ऐसे भी हो सकती हैउपरोक्त सारी बातों को पढ़ कर यदि आपको लगता है कि आपको भी इस संगठन का सदस्य बनना चाहिये तो यहाँ या इस लेख के किसी भी लिंक को क्लिक कर के आप सदस्य बन सकते हैं।

पुनश्चः श्री रामचन्द्र मिश्र जी ने टिप्पणी कर के मेरी एक भूल के विषय में बताया है और मैं भूल सुधार कर रहा हूँ। इस पूरे लेख में जहाँ कहीं भी लिंक हैं वे सभी मेरे रेफरल लिंक्स हैं अर्थात् इस लिंक को क्लिक कर के यदि आप सदस्य बनेंगे तो उससे मेरा भी फायदा होगा। आप लोग यदि चाहें तो मिश्र जी टिप्पणी में दर्शाये लिंक्स को भी क्लिक कर के सदस्य बन सकते हैं। भूल के क्षमाप्रार्थी हूँ।

Friday, April 18, 2008

ब्लोग क्या होता है

प्रसन्नता की बात है कि हिन्दी में ब्लोग्स की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। नये नये ब्लोगर्स आते जा रहे हैं। तो हम सभी ब्लोगर्स के लिये यह जान लेना अधिक अच्छा होगा कि ब्लोग क्या होता है।

ब्लोग (blog) शब्द की उत्पत्ति web और log शब्दों के मेल से हुई है। ब्लोग की परिभाषा अनेक विद्वानों ने अनेक प्रकार से दिया है जिनमें से कुछ उदाहरण के रूप में नीचे दर्शाया जा रहा है।

व्यक्तिगत विचारों तथा वेब लिंक्स का कालक्रम के अनुसार कुछ-कुछ अन्तराल में प्रकाशन को ब्लोग कहा जाता है।

‘A frequent, chronological publication of personal thoughts and Web links.’ (स्रोत)

वेबलॉग (ब्लोग) टैक्स्ट, इमेजेस, मीडिया आब्जेक्ट्स तथा डाटा का कालक्रम के अनुसार व्यवस्थित तारतम्य होता है जिसे कि HTML ब्राउसर में देखा जा सकता है

‘A weblog is a hierarchy of text, images, media objects and data, arranged chronologically, that can be viewed in an HTML browser.’ (स्रोत)

Web और log से बना ब्लोग मूलतः वेब में उपलब्ध एक जर्नल होता है। ब्लोग के नवीनीकरण (updating) करने को ब्लोगिंग कहा जाता है और ब्लोग रखने वाले को ब्लोगर कहा जाता है।

‘From “Web log.” A blog is basically a journal that is available on the web. The activity of updating a blog is “blogging” and someone who keeps a blog is a “blogger.”‘ (स्रोत)

गूगल के ब्लोगर.कॉम के अनुसारः
ब्लॉग एक व्यक्तिगत डायरी है. एक दैनिक प्रवचन मंच. एक सहयोगपूर्ण स्थान. एक राजनैतिक सोपबॉक्स. एक ताज़ा समाचार आउटलेट. लिंकों का एक संग्रह. आपके अपने निजी विचार. दुनिया को दिए जाने वाली ज्ञापन.

आपका ब्लॉग वैसा ही है जैसा आप उसे चाहते हैं. ऐसे लाखों हैं, सभी आकृति और आकारों में, और वास्तव में कोई खास नियम नहीं हैं.

सामान्य शब्दों में, ब्लॉग एक वेब साइट है, जहाँ आप नियमित तौर पर सामग्री लिखते हैं. नई सामग्री सबसे ऊपर दिखती है, ताकि आपके विजिटर पढ़ सकें कि नया क्या है. इसके बाद वे उस पर टिप्पणी कर सकते हैं या उसे लिंक कर सकते हैं या आपको ईमेल कर सकते हैं. या नहीं.(स्रोत)

ब्लोग की ऐसी ही सर्वमान्य और भी अनेक परिभाषाएँ हैं। इन परिभाषाओं को पढ़ कर लोग प्रायः ब्लोग के समझने के स्थान पर भ्रमित अधिक होते हैं।

तो आखिर ब्लोग है क्या???

भ्रमित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। सरल शब्दों में कहा जाये तो ब्लोग कालक्रम के अनुसार व्यवस्थित एक प्रकार का वेबसाइट होता है जिसमें कि प्रायः अंतिम पोस्ट सबसे ऊपर और पुराने पोस्ट्स क्रमानुसार नीचे होते हैं।

ब्लोग में क्या लिखा जाता है???

प्रायः ब्लोग में ब्लोगर अपने विचारों को वेब में प्रचलित अन्य बातों के साथ लिखता है। किन्तु यह कोई नियम नहीं है। आप ब्लोग में कुछ भी लिख सकते हैं - राजनीति के विषय में लिख सकते हैं, साहित्य के विषय में लिख सकते हैं, विज्ञान के विषय में लिख सकते हैं, कहानी लिख सकते हैं, कविता लिख सकते हैं, मन की भड़ास निकाल सकते हैं, यानी कि कुछ भी लिख सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे कि आप अपनी दैनन्दिनी (diary) में लिखते हैं। वास्तव में ब्लोग किसी एक व्यक्‍ति (या एक से अधिक भी) के द्वारा लिखी गई दैनन्दिनी ही हैं।

टिप्पणी (comments)

अधिकतर ब्लोग्स में टिप्पणी करने के लिये स्थान होता है। टिप्पणी का स्थान देना जरूरी नही है किन्तु मेरे विचार से टिप्पणी का स्थान देना ही चाहिये। क्योंकि यदि आप अपने विचारों का दूसरों के समक्ष प्रदर्शन कर रहे है तो आपको सामने वाले के विचारों को भी जानना ही चाहिये। टिप्पणी तो विचारों के आदान-प्रदान का एक बहुत अच्छा माध्यम है।

Thursday, April 17, 2008

अजब गजब

जी हाँ, ऐसा सिर्फ़ भारत में ही होता है - ओनली इन इंडिया!

वास्तविक आकार का चित्र देखने के लिए चित्र पर क्लिक करें.

Wednesday, April 16, 2008

वेब-बेस्ड प्रॉक्सी (Web-based Proxy) क्या होता है

जब भी आप इन्टरनेट में किसी वेबसाइट को खोलते हैं तो उस वेबसाइट के द्वारा आपका IP Address नोट कर लिया जाता है। IP Address बताता है कि आप किस स्थान से उस वेबसाइट में पहुँचे हैं। यद्यपि IP Address आपकी व्यक्तिगत जानकारियाँ तो नहीं मिलतीं किन्तु यह अवश्य पता चल जाता है कि आप इन्टरनेट में सर्फिंग कहाँ से कर रहे हैं, अपने घर से, अपने आफिस से या किसी साइबर कैफे से। मतलब यह है कि इन्टरनेट में सर्फिंग करते वक्त आपकी गोपनीयता बरकरार नहीं रहती।

यदि आप अपनी गोपनीयता बरकरार रखना चाहते हैं तो आपको किसी ऐसे वेब-बेस्ड प्रॉक्सी के माध्यम से इन्टरनेट में सर्फिंग करना होगा जो कि आपके IP Address को प्रकट होने दे। ऐसे ही सर्व्हर्स को वेब-बेस्ड प्रॉक्सी (Web-based proxy) कहा जाता है। जब भी आप किसी वेब-बेस्ड प्रॉक्सी के माध्यम से इन्टरनेट में सर्फिंग करते हैं तो उस प्राक्सी सर्व्हर का ही IP Address नोट होता है कि आपका।

वास्तव में वेब-बेस्ड प्रॉक्सी आपके वेब ब्राउसर के भीतर बैठ जाता है और चाही गई वेबसाइट को स्वयं के भीतर लाकर आपके ब्राउसर के माध्यम से आपको दिखाता है। मान लीजिये कि आप Proxy Surf Anywhere! वेब-बेस्ड प्रॉक्सी के माध्यम से किसी वेबसाइट को खोलना चाहते हैं तो उसमें आपको नीचे दर्शाये अनुसार एक बॉक्स दिखाई पड़ेगा।


इसी बॉक्स में चाहे गये वेबसाइट का URL टाइप कर दिया जाता है और वह वेबसाइट वेब-बेस्ड प्रॉक्सी के माध्यम से आपके ब्राउसर में खुल जाता है और आप बिल्कुल बेनाम (anonymous) रह कर मजे के साथ सर्फिंग कर सकते हैं।

वेब-बेस्ड प्रॉक्सी के माध्यम से सर्फिंग के निम्न फायदे भी हैं।

  • बैंडविड्थ की बचत होती है और साइट्स शीघ्रतापूर्वक खुलते हैं।

  • ब्लॉक कर दिये गये वेबसाइट्स, जो कि ब्राउसर में नहीं खुल पाते, भी आसानी के साथ वेब-बेस्ड प्रॉक्सी के माध्यमसे खुल जाते हैं।

अधिकांशतः वेब-बेस्ड प्रॉक्सी ब्लॉक कर दिये जाते हैं क्योंकि उनका प्रयोग प्रायः स्कूलों तथा कार्यालयों में ब्लॉक कर दिये गये वेबसाइट्स को खोलने के लिये प्रयोग किया जाता है।

Monday, April 14, 2008

क्या श्री राम ने पिता के प्रति मर्यादा का पालन किया?

रामनवमी पर विशेष लेख

श्री राम की मर्यादा सुविख्यात है, उन्हें मर्यादा-पुरुषोत्तम के नाम से जाना जाता है। मर्यादा-पुरुषोत्तम अर्थात् 'मर्यादा का पालन करने वाले पुरुषों में उत्तम'। किन्तु कई प्रसंग ऐसे हैं जिनसे भ्रम सा होने लगता है कि शायद कहीं कहीं पर श्री रामचन्द्र जी ने शायद मर्यादा का पालन नहीं किया है। महाराज दशरथ तथा जटायु के मृत्यु के प्रसंग इसके अन्तर्गत आते हैं।

तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड में महाराज दशरथ की मृत्यु का वर्णन करते हुये लिखा है:-

राम राम कहि राम कहि राम राम कहि राम।
राम राम कहि राम कहि राउ गये सुरधाम॥

अर्थात् राम का नाम रटते-रटते महाराज दशरथ सुरधाम (देवलोक) सिधार गये।

यहाँ पर यह ध्यान देने योग्य बात है कि महाराज दशरथ देवलोक गये जिसे कि हिन्दू मान्यता के अनुसार 6वाँ लोक माना जाता है और फिर से जन्म ले कर वहाँ से पुनः पृथ्वी लोक में आने के पर्याप्त अवसर बने रहते हैं। मतलब यह कि महाराज दशरथ का मोक्ष नहीं हुआ (मान्यता है कि विष्णुलोक जिसे कि हरिधाम भी कहा जाता है और जो कि 7वाँ लोक है पहुँचने पर ही मोक्ष होता है)। सभी को विदित है कि यदि मृत्यु के समय एक बार भी राम का नाम मुख से निकले तो मोक्ष प्राप्त हो जाता है। यहाँ पर तो दशरथ की मृत्यु राम राम रटते हुये ही हुई थी। फिर भी श्री राम ने, जो कि भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं, उन्हें मोक्ष प्रदान नहीं किया। यहाँ तक कि राम ने अपने पिता का अन्तिम संस्कार भी नहीं किया जबकि ज्येष्ठ पुत्र होने के नाते यह उनका कर्तव्य था।

दूसरी ओर तुलसीदास जी जटायु की मृत्यु का वर्णन करते हुये लिखते हैं:-

अविरल भगति मांगि वर गीध गये हरिधाम।
तेहिके क्रिया जथोचित निज कर कीन्हीं राम॥

अर्थात् जटायु विष्णुलोक गये, उनका मोक्ष हो गया और जटायु का क्रियाकर्म स्वयं अपने हाथों से किया।

इन प्रसंगों को पढ़ कर पहली दृष्टि में लगता तो यही है कि श्री राम ने शायद कहीं कहीं पर मर्यादा का पालन नहीं किया। किन्तु ऐसा नहीं है। उपरोक्त दोनों दोहों की सही व्याख्या करने से भ्रम दूर हो जाता है। वास्तव में अपनी मृत्यु के समय महाराज दशरथ मोहवश अपना पुत्र समझ कर राम का नाम जप रहे थे न कि मोक्षदाता भगवान विष्णु समझ कर। और हिन्दू दर्शन के अनुसार मृत्यु के समय जरा भी मोह रह जाने से मोक्ष कभी प्राप्त हो ही नहीं सकता। अपने पिता के वचन पालन करके सांसारिक मर्यादा निभाने के लिये ही श्री राम अपने पिता के अन्तिम संस्कार करने के लिये अयोध्या वापस नहीं आये। यदि वे वापस आ गये होते तो पिता का वचन पालन न करने का आरोप अवश्य ही उन पर लग गया होता। वे यह भी जानते थे कि हिन्दू कर्मकाण्ड के अनुसार ज्येष्ठ पुत्र की अनुपस्थिति में कनिष्ठ पुत्र को अन्तिम संस्कार करने का पूर्ण अधिकार है।

जटायु की मृत्यु के प्रसंग में तुलसीदास जी लिखते हैं कि 'अविरल भगति मांगि वर' अर्थात् जटायु की भक्ति अविरल थी और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर श्री राम न उनसे वरदान मांगने के लिये कहा था। इस पर जटायु ने दो वर मांगे थे - पहला मोक्ष प्राप्ति का और दूसरा अपना क्रिया कर्म स्वयं भगवान के हाथों से कराने का जो कि 'भूतो न भविष्यति' कार्य है। श्री रामचन्द्र जी अपने द्वारा दिये गये वरदानों के कारण विवश थे और इसीलिये उन्हें जटायु को मोक्ष प्रदान करना पड़ा तथा उनका क्रिया कर्म भी करना पड़ा।

Sunday, April 13, 2008

कैसे बढ़ेगा अन्तर्जाल में हिन्दी का वर्चस्व

कैसे बढ़ेगा अन्तर्जाल में हिन्दी का वर्चस्व

आज हिन्दी ब्लोग्स की संख्या हजारों में पहुँच चुकी है यह सुन कर हमें बहुत खुशी होती है। 2003 के पूर्व एक भी हिन्दी ब्लोग नहीं था तो आज हिन्दी ब्लोग्स की संख्या हजारों में पहुँच जाना वास्तव में एक बड़ी उपलब्धि है। किन्तु यदि हम 56 करोड़ हिन्दीभाषियों की संख्या को ध्यान में रख कर इस हजारों ब्लोग्स पर विचार करें तो हमें लगेगा कि हिन्दी ब्लोग्स की संख्या नगण्य है और इसके सहारे अंतर्जाल में हिन्दी का वर्चस्व कदापि नहीं बढ़ सकता।

ब्लोग का आरम्भ सन् 1997 में हुआ। उन दिनों अंग्रेजी तथा कुछ अन्य भाषाओं में ब्लोग्स लिखे जाते थे। 1997 से 2003 अर्थात् हिन्दी ब्लोग के आरम्भ के वर्ष तक (6 वर्षों में) अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं की संख्या करोड़ों में पहुँच गई थी जबकि 2003 से अब तक (5 वर्षों में) हिन्दी ब्लोग्स की संख्या केवल कुछ हजार तक पहुँची है। तुलनात्मक रूप से हिन्दी ब्लोग अन्य भाषाओं के ब्लोग से बहुत पीछे है।

हम सभी ब्लोगरों की महत्वकांक्षा है कि अन्तर्जाल में हिन्दी का वर्चस्व शीघ्रातिशीघ्र स्थापित हो जायें किन्तु हिन्दी ब्लोग्स/वेबसाइट्स की वर्तमान संख्या से तो हिन्दी का वर्चस्व स्थापित होना असम्भव सा लगता है।

तो कैसे बढ़ेगा अन्तर्जाल में हिन्दी का वर्चस्व?

हमें हिन्दी ब्लोग्स की संख्या त्वरित गति से बढ़ाने होंगे। वर्तमान में जितने हिन्दी ब्लोगर्स है वे अथक एवं अनवरत् प्रयास करें तो भी हजारों की संख्या करोड़ों में तो नहीं पहुँच सकती। स्पष्ट है कि नये-नये लोगों को ब्लोगिंग करने के लिये प्रोत्साहित करना होगा।

सिर्फ ब्लोग से ही काम नही चलने वाला। हिन्दी के ब्लोग्स के अलावा व्यक्तिगत वेब पेजेस, वेबसाइट्स, वेब डायरेक्ट्री, हिन्दी विकीज़, गोष्ठियाँ (फोरम्स), कृति निर्देशिकायें (article directories), सामुदायिक वेबसाइट्स (shocial bookmarking websites) आदि का निर्माण भी करना होगा।

लोगों को उकसाना होगा कि अन्तर्जाल में जहाँ कहीं भी मुफ्त वेब पेज बनाने की सुविधा उपलब्ध है (जैसे कि iGoogle, geocity, yahoo 360 आदि) वहाँ जाकर अपना हिन्दी वेब पेज बनायें।

ऐसे भी लोग है जो कि अपना हिन्दी ब्लोग बनाना चाहते है किन्तु लेख लिखने में सक्षम नहीं होने के कारण नहीं बना पाते। यदि पर्याप्त मात्रा में कृति निर्देशिकायें (article directories) का निर्माण हो जायें और उसमें हिन्दी के लेखक अपनी रचनायें डाल दे तो वे लोग भी जो लेख लिखने में सक्षम नहीं है निर्देशिकाओं से लेख प्राप्त करके अपना ब्लोग बनाने में समर्थ हो सकेंगे।

फिलहाल तो परिचर्चा, सर्वज्ञ, कृति निर्देशिका, गँठजोड़ आदि को अपना सहयोग अवश्य दें और इसी प्रकार की अन्य वेबसाइट्स के निर्माण करने का प्रयास भी करें।

मुझे विश्वास है कि हम सभी के प्रयास से हिन्दी अपनी मंजिल पर अवश्य ही पहुँचेगी।

कम से कम सौजन्यता तो व्यक्त करें

किसी की रचना को यदि आपने बिना किसी पूर्वानुमति के अपने ब्लोग में प्रकाशित कर दिया तो मूल रचनाकार की क्या प्रतिक्रिया होगी यह तो इस पर निर्भर करता है कि मूल रचनाकार किस स्वभाव का व्यक्ति है। संयोग से इस बार मूल रचनाकार मैं ही हूँ और अपने स्वभाव के अनुसार मैं इसका बुरा नहीं मानूंगा किन्तु जरा सी सौजन्यता की अपेक्षा तो अवश्य ही रखूंगा अब यह बात और है कि सौजन्यता मिले या मिले। नीचे के स्क्रीनशाट्स देख कर समझ में जायेगा कि मैं यह क्यों लिख रहा हूं।




Friday, April 11, 2008

हिन्दी ब्लोग्स से कमाई के अवसर

आजकल हिन्दी ब्लोग्स में कमाई की चर्चा कुछ जोर-शोर से होने लगी है। और फिर क्यों न हो? आखिर हिन्दी ब्लोगर्स कब तक बिना किसी पारश्रमिक के मुफ्त में ही लेखन कार्य करते रहेंगे। उन्हें उनके समय तथा परिश्रम की कीमत अवश्य मिलनी चाहिये। हिन्दी ब्लोग्स में व्यावसायिकता लाना बहुत आवश्यक है। आखिर धन की आवश्यकता किसे नहीं होती? और यदि अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं के ब्लोगर्स अपने ब्लोग्स से धनोपार्जन कर रहे हैं तो हिन्दी ब्लोगर्स क्यों धन प्राप्ति से वंचित रहें?

यदि मुझसे कोई पूछे कि हिन्दी ब्लोग्स से कमाई के कितने अवसर हैं तो निश्चय ही मेरा उत्तर होगा कि 'पूरे पूरे अवसर हैं'। किन्तु जिस प्रकार से आज हिन्दी ब्लोग्स लिखे जा रहे हैं उससे तो कमाई होना बहुत मुश्किल है। हिन्दी ब्लोग्स से कमाई करने के लिये हिन्दी ब्लोगर्स को हिन्दी ब्लोगिंग में बहुत सारे परिवर्तन लाने होंगे और कुछ अपने विचारों तथा आदर्शों के साथ कहीं कहीं समझौता भी करना होगा।

सबसे पहले तो यह जान लीजिये कि वास्तव में ब्लोगिंग से कमाई का मुख्य स्रोत गूगल का एडसेंस है। गूगल के इंजिन किसी भी ब्लोग या वेबसाइट की सामग्री को पढ़ते हैं और उनमें निहित शब्दों के अनुरूप विज्ञापन भेजते हैं। अब गूगल का एडसेंस हिन्दी को ध्यान में रख कर बनाया नहीं गया है, उसका तो आधार अंग्रेजी है। तो, जब तक कि गूगल अपनी तकनीक में हिन्दी को ध्यान में रख कर यथोचित परिवर्तन करे तब तक, ऐसे शब्दों के लिये जो कि विज्ञापनों को आकर्षित करते हैं कोष्ठक के भीतर उनका अंग्रेजी अर्थ भी देना होगा क्योंकि वे कोष्ठक के भीतर वाले अंग्रेजी शब्द ही विज्ञापनों को खीचकर लायेंगे। उदाहरण के लिये यहाँ पर अभी तक जो कुछ भी लिखा गया है उसे इस प्रकार लिखना होगा:-
हिन्दी ब्लोग्स से कमाई के अवसर (Chanses of making money with Hindi blogs)

आजकल हिन्दी ब्लोग्स (blogs) में कमाई (earning, making money) की चर्चा कुछ जोर-शोर से होने लगी है। और फिर क्यों न हो? आखिर हिन्दी ब्लोगर्स (blogers) कब तक बिना किसी पारश्रमिक के मुफ्त (free) में ही लेखन कार्य (writing) करते रहेंगे। उन्हें उनके समय तथा परिश्रम की कीमत अवश्य मिलनी चाहिये। हिन्दी ब्लोग्स (blogs) में व्यावसायिकता (economy) लाना बहुत आवश्यक है। आखिर धन (money) की आवश्यकता किसे नहीं होती? और यदि अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं के ब्लोगर्स अपने ब्लोग्स से धनोपार्जन (make money) कर रहे हैं तो हिन्दी ब्लोगर्स क्यों धन (money) प्राप्ति से वंचित रहें?

यदि मुझसे कोई पूछे कि हिन्दी ब्लोग्स (Hindi blogs) से कमाई (earning, making money) के कितने अवसर हैं तो निश्चय ही मेरा उत्तर होगा कि 'पूरे पूरे अवसर हैं'। किन्तु जिस प्रकार से आज हिन्दी ब्लोग्स (Hindi blogs) लिखे जा रहे हैं उससे तो कमाई (earning, making money) होना बहुत मुश्किल है। हिन्दी ब्लोग्स (Hindi blogs) से कमाई (earning, making money) करने के लिये हिन्दी ब्लोगर्स (Hindi blogers) को हिन्दी ब्लोगिंग (Hindi bloging) में बहुत सारे परिवर्तन लाने होंगे और कुछ अपने विचारों तथा आदर्शों के साथ कहीं कहीं समझौता भी करना होगा।

सबसे पहले तो यह जान लीजिये कि वास्तव में ब्लोगिंग (bloging) से कमाई का मुख्य स्रोत गूगल (google) का एडसेंस (AdSense) है। गूगल (google) के इंजिन (engine) किसी भी ब्लोग (blog) या वेबसाइट (website) की सामग्री को पढ़ते हैं और उनमें निहित शब्दों के अनुरूप विज्ञापन (advertisement, Ads) भेजते हैं। अब गूगल (google) का एडसेंस (AdSense) हिन्दी को ध्यान में रख कर बनाया नहीं गया है, उसका तो आधार अंग्रेजी है। तो, जब तक कि गूगल (google) अपनी तकनीक (technic) में हिन्दी को ध्यान में रख कर यथोचित परिवर्तन करे तब तक, ऐसे शब्दों के लिये जो कि विज्ञापनों (advertisements, Ads) को आकर्षित करते हैं कोष्ठक के भीतर उनका अंग्रेजी अर्थ (english meaning) भी देना होगा क्योंकि वे कोष्ठक के भीतर वाले अंग्रेजी शब्द ही विज्ञापनों (advertisement, Ads) को खीचकर लायेंगे।
अभी तक हिन्दी ब्लोग्स को पर्याप्त संख्या वाली दर्शकदीर्घा (Audience) नहीं मिल पाया है, (कटु सत्य के लिये क्षमा याचना के साथ कहना पड़ रहा है कि) हिन्दी के ब्लोगर्स ही एक दूसरे की रचनाओं को पढ़ते तथा टिप्पणियाँ करते चले आ रहे है। पर्याप्त संख्या वाली दर्शकदीर्घा (Audience) नहीं मिलने का मुख्य कारण है कि हम वह लिखते है जो हमें पसंद है। जबकि हमें वह लिखना चाहिये जिसे कि पाठकगण पसंद करें। इसके लिये हमें पाठकों की नब्ज पहचाननी होगी क्योंकि हिन्दी ब्लोग से कमाई करने के लिये पाठको की संख्या में वृद्धि करना नितांत आवश्यक है। बेहतर होगा कि प्रत्येक हिन्दी ब्लोगर अपने दो ब्लोग्स बनाये और एक में वह लिखे जो उसे पसंद है तथा दूसरे में वह लिखे जो पाठकों को पसंद है। आपको जानकारी होनी चाहिये कि अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं के कमाई करने वाले ब्लोगर्स बहुत अधिक खोजबीन करके पाठकों की पसंद वाली सामग्री ही पेश करते है। वहाँ पर भी अपनी पसंद का लेखन करने वाले ब्लोगर्स कुछ भी धन नहीं कमा पाते।

प्रत्येक ब्लोग के प्रकाशन के तुरंत बाद पिन्गोमेटिक या पिन्गोट जैसे वेबसाइट्स में जाकर पिन्ग करना भी आवश्यक है ताकि समस्त सर्च इंजिनों को विदित हो जाये कि फलाँ ब्लोग अपडेट हो गया है।

यदि हमारे हिन्दी के ब्लोगर बंधु अपना-अपना एक-एक अतिरिक्त ब्लोग बनाकर प्रयोग के तौर पर उपयुक्त अनुसार लेखन करें तो मैं समझता हूँ कि अवश्य ही सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।

 
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