Thursday, November 4, 2010

सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक दीपावली


Festival Greetings
संसार में भारत ही ऐसा देश है जहाँ पर वर्ष भर में अनगिनत त्यौहार मनाए जाते हैं जिनमें दीपावली सबसे बड़ा त्यौहार होता है। त्यौहार का अर्थ है खुशी मनाना। जब पेट भरा होता है और गाँठ में अतिरिक्त पैसा होता है तो आदमी को मस्ती सूझती है। जाहिर है कि भारत में प्रायः लोग समृद्ध होते थे याने कि लोगों का पेट भरा होता था और गाँठ में भरपूर पैसे होते थे इसीलिए मस्ती करने के लिए अधिकतर त्यौहारों का प्रचलन हुआ। आप ही सोचिए कि बेहाल आदमी भला क्या त्यौहार मनाएगा?

किन्तु त्यौहारों का उद्देश्य मात्र मस्ती करना ही नहीं होता था बल्कि त्यौहारों के अन्य अनेक उद्देश्य हुआ करते थे जैसे कि अपनी संस्कृति, सभ्यता, परम्परा आदि को बनाए रखना, मर्यादा बनाए रखना, स्वच्छता का ध्यान रखना आदि। जहाँ दिवाली में लक्ष्मी-पूजन का उद्देश्य है अपनी संस्कृति, सभ्यता, परम्परा आदि को बनाए रखना वहीं छोटों के द्वारा बड़ों का चरणस्पर्श तथा बड़ों के द्वारा उन्हें आशीर्वाद देना मर्यादा को बनाए रखना है और पूरे घर की साफ-सफाई, लिपाई-पुताई आदि स्वच्छता का ध्यान रखना है। दीपावली में ही घर की दीवालों को पेंट करने के पीछे कारण यह होता है कि चार माह की बरसात घरों की सुन्दरता को नष्ट कर चुकी होती है अतः घर का फिर से काया-पलट करना आवश्यक होता है। जहाँ रंग-रोगन से घरों की सुन्दरता फिर से लौट आती है वहीं पूरे घर की सफाई करने से तथा अंधेरे घर में फैली धूल-गंदगी खत्म हो जाती है बीमारी फैलाने वाले कई प्रकार के कीटाणुओं का नाश हो जाता है।

वास्तव में देखा जाए तो दीपावली मुख्यतः फसल काटने का त्यौहार है। कृषक अपने परिश्रम का फल फसल के रूप में पाकर आनन्द तथा उल्लास से सराबोर हो जाते हैं और त्यौहार मनाते हैं। चूँकि अन्न लक्ष्मी देवी का एक रूप है अतः दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है।

कुछ और जानकारी

दीपावली शब्द "दीप" (दिया) तथा "आवली" (कतार) शब्दों के मेल से बना है अर्थात् दीपावली का अर्थ है "दिये की कतार"।

दीपावली को "लक्ष्मी पूजा" के नाम से भी जाना जाता है। लक्ष्मी पूजा के दिन घरों के द्वारों पर सभी दिशाओ की ओर अनेकों दिये आलोकित किये जाते हैं। ।

दीपावली रोशनी का त्यौहार है। दिया या प्रकाश बुराई पर भलाई के विजय का प्रतीक है।

दीपावली हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक चन्द्रमास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है जो कि अंग्रेजी कैलेन्डर के अनुसार अक्टूबर या नवम्बर महीने में आता है।

लक्ष्मी पूजा के पूर्व का दिन "नर्क चतुर्दशी" कहलाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर पर विजय प्राप्त किया था। नर्क चतुर्दशी के दिन घरों के द्वारों पर दक्षिण दिशा की ओर चौदह दिये आलोकित किये जाते हैं।

लक्ष्मी पूजा के दूसरे दिन "गोवर्धन पूजा" मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने इन्द्र को पराजित किया था।

दीपावली मनाने के कुछ अन्य कारणः

जैन धर्म के अनुसार भगवान महावीर को 15 अक्टूबर १५५२७ (ईसवी पूर्व) के दिन, जो कि दीपावली का दिन था, निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। (अंग्रेजी विकीपेडिया http://en.wikipedia.org/wiki/Diwali#In_Jainism)

सिख समुदाय के लोग अनेकों कारण से दीपावली का त्यौहार मनाते हैं। इस दिन उनके छठवें गुरु, गुरु हरगोविंद जी, को 52 हिन्दू राजाओ के साथ कारागार से मुक्ति मिली थी और वे अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर में मत्था टेकने गये थे जहाँ पर अनेकों दिये प्रकाशित करके उनका स्वागत किया गया था।

कहा जाता है किस चौदह वर्ष का वनवास काट कर भगवान श्री रामचन्द्र जी दीपावली के दिन ही अयोध्या वापस लौटे थे और अनेकों दीप प्रज्जवलित कर के उनका स्वागत किया गया था।

स्कन्द पुराण के अनुसार देवी शक्ति ने भगवान शिव का आधा शरीर प्राप्त करने के लिये 21 दिनों का व्रत किया था जिसका आरम्भ कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी से हुआ था और उन्हें दीपावली के दिन व्रत का फल मिला था।
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