Tuesday, April 26, 2011

जब हिन्दी के ब्लोगर झूमेंगे

सपने देखने का अधिकार तो सभी को है और इस अधिकार का प्रयोग करते हुए मैं भी सपने देखता हूँ, सपने में देखता हूँ अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं के ब्लोगर के जैसे हिन्दी के ब्लोगर भी खुशहाल हैं, मस्ती में झूम रहे हैं। अन्य ब्लोगरों को अपने ब्लोग से कमाई का लालच हो, न हो, मुझे तो है। इसलिए अपने सपने में ब्लोगरों की अपने ब्लोग से कमाई होते हुए भी देखता हूँ। कामना करने लगता हूँ कि एडसेंस तथा अन्य विज्ञापनों से हिन्दी ब्लोग्स के द्वारा भी कमाई हो।

किन्तु यह भी जानता हूँ कि सपने देखना आसान है और उन सपनों को साकार कर लेना बहुत ही मुश्किल! किसी ने सच ही कहा है -

Dreams are not the ones which come when you sleep, but they are the ones which will not let you sleep.

अर्थात् सपने वो नहीं होते जिन्हें आप सोते हुए देखते हैं, बल्कि सपने वो होते हैं जो आपकी नींद गायब कर देते हैं।

ब्लोगरों को झूमते हुए देखने का यह सपना मुझसे बरबस कहलवाता है -

इन 'हिन्दी ब्लोग के पोस्टों' से, जब रात का आँचल ढलकेगा
जब 'गूगल' का दिल पिघलेगा, जब 'डॉलर' का सागर छलकेगा
जब हिन्दी के ब्लोगर झूमेंगे, और एडसेंस रकम बरसायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

जिस सुबह की खातिर जुग-जुग से, ब्लोगर मरते-जीते हैं
जिस सुबह के अमृत की धुन में, वे जहर के प्याले पीते हैं
इन मेहनतकश चिट्ठाकारों पर, इक दिन तो करम फर्मायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

माना कि अभी इन हिन्दी के, 'पोस्टों' की कीमत कुछ भी नहीं
मिट्टी का भी है कुछ मोल मगर, चिट्ठाकारों की कीमत कुछ भी नहीं
चिट्ठाकारों के मेहनत को इक दिन जब, सिक्कों में ही तोली जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

जब हिन्दीगण 'चैटिंग' छोड़ेंगे, 'एडल्ट साइट्स' से नाता तोड़ेंगे
जब ज्ञान-पिपासा जागेगी, जब ब्लोग्स से नाता जोड़ेंगे
हिन्दी पाठकों की संख्या, बढ़ती और बढ़ती जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

बीतेंगे कभी तो दिन आख़िर, ये फोकट के लाचारी के
टूटेंगे कभी तो बुत आख़िर, अंग्रेजी की इजारादारी के
जब हिन्दी की अनोखी दुनिया की बुनियाद उठाई जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

(महान शायर साहिर लुधियानवी से क्षमायाचना सहित।)

साहिर लुधियानवी

उपरोक्त पैरोडी का मूल है साहिर लुधियानवी की ये रचनाएँ -

वो सुबह हमीं से आयेगी

जब धरती करवट बदलेगी, जब क़ैद से क़ैदी छूटेंगे
जब पाप घरौंदे फूटेंगे, जब ज़ुल्म के बन्धन टूटेंगे
उस सुबह को हम ही लायेंगे, वो सुबह हमीं से आयेगी
वो सुबह हमीं से आयेगी

मनहूस समाजों ढांचों में, जब जुर्म न पाले जायेंगे
जब हाथ न काटे जायेंगे, जब सर न उछाले जायेंगे
जेलों के बिना जब दुनिया की, सरकार चलाई जायेगी
वो सुबह हमीं से आयेगी

संसार के सारे मेहनतकश, खेतो से, मिलों से निकलेंगे
बेघर, बेदर, बेबस इन्सां, तारीक बिलों से निकलेंगे
दुनिया अम्न और खुशहाली के, फूलों से सजाई जायेगी
वो सुबह हमीं से आयेगी

और

वो सुबह कभी तो आयेगी

इन काली सदियों के सर से, जब रात का आंचल ढलकेगा
जब दुख के बादल पिघलेंगे, जब सुख का सागर छलकेगा
जब अम्बर झूम के नाचेगा, जब धरती नज़्में गायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

जिस सुबह की खातिर जुग-जुग से, हम सब मर-मर कर जीते हैं
जिस सुबह के अमृत की धुन में, हम जहर के प्याले पीते हैं
इन भूखी प्यासी रूहों पर, इक दिन तो करम फर्मायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

माना कि अभी तेरे मेरे, अरमानों की कीमत कुछ भी नहीं
मिट्टी का भी है कुछ मोल मगर, इन्सानों की कीमत कुछ भी नहीं
इन्सानों की इज्जत जब झूठे, सिक्कों में न तोली जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

दौलत के लिये जब औरत की, इस्मत को न बेचा जायेगा
चाहत को न कुचला जायेगा, ग़ैरत को न बेचा जायेगा
अपनी काली करतूतों पर, जब ये दुनिया शर्मायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

बीतेंगे कभी तो दिन आख़िर, ये भूख के और बेकारी के
टूटेंगे कभी तो बुत आख़िर, दौलत की इजारादारी के
जब एक अनोखी दुनिया की बुनियाद उठाई जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

मजबूर बुढ़ापा जब सूनी, राहों की धूल न फांकेगा
मासूम लड़कपन जब गंदी, गलियों में भीख न मांगेगा
ह़क मांगने वालों को जिस दिन, सूली न दिखाई जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

फ़ाको की चिताओं पर जिस दिन, इन्सां न जलाये जायेंगे
सीनों के दहकते दोज़ख में, अर्मां न जलाये जायेंगे
ये नरक से भी गन्दी दुनिया, जब स्वर्ग बनाई जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

7 comments:

योगेन्द्र पाल said...

बहुत अच्छी पैरोडी बनाई है आपने,

अवधिया जी,

आपकी चिंता जायज है, पर हिन्दी के ब्लोगर भी कमा सकते हैं, हिन्दी ब्लोगिंग में सुधार अपेक्षित है|

टैग का सही उपयोग भी उसी में से एक है, मैंने इस दिशा में प्रयास करते हुए ये दो लेख लिखे हैं, इनको पढ़ें

क्या आप एक से ज्यादा ब्लॉग पर एक ही लेख लिखते हैं ?

मैंने देखा है कि आप टैग का प्रयोग नहीं कर रहे हैं- इस लेख में यह विस्तार से बताया गया है कि किस टैग का प्रयोग किया जाना चाहिए
अब कोई ब्लोगर नहीं लगायेगा गलत टैग !!!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत अच्छी ख्वाहिश है... जल्द पूरी होगी..

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

“Happy are those who dream dreams"
:)

Rahul Singh said...

हमें कल के सबेरे का इंतजार है, आपके लिए.

राज भाटिय़ा said...

आमीन

Dinesh pareek said...

वहा वहा क्या कहे आपके हर शब्द के बारे में जितनी आपकी तारीफ की जाये उतनी कम होगी
आप मेरे ब्लॉग पे पधारे इस के लिए बहुत बहुत धन्यवाद अपने अपना कीमती वक़्त मेरे लिए निकला इस के लिए आपको बहुत बहुत धन्वाद देना चाहुगा में आपको
बस शिकायत है तो १ की आप अभी तक मेरे ब्लॉग में सम्लित नहीं हुए और नहीं आपका मुझे सहयोग प्राप्त हुआ है जिसका मैं हक दर था
अब मैं आशा करता हु की आगे मुझे आप शिकायत का मोका नहीं देगे
आपका मित्र दिनेश पारीक

प्रवीण पाण्डेय said...

बड़ा अच्छा लगता है यह गीत।