Monday, January 16, 2012

भारत की प्रथम महिला छायाचित्रपत्रकार - होमाई व्यारावाल उर्फ "डालडा 13"

क्या आपको पता है कि भारत की प्रथम महिला छायाचित्रपत्रकार (photo journalist) - होमाई व्यारावाल उर्फ "डालडा 13" हैं? 1913 में जन्मीं व्यारावाला ने सन् 1938 में फोटोग्राफी के क्षेत्र में पदार्पण किया। उन दिनों फोटोग्राफी को पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था और इस क्षेत्र में व्यारावाला, जो कि महिला थीं, की सफलता एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। उल्लेखनीय है कि भारत में फोटोग्राफी की शुरुवात 1840 में हुई और चूँकि यह कला भारत में ब्रिटेन से आई थी, अधिकतर भारतीय फोटोग्राफर फोटोग्राफी के लिए ब्रिटिश फोटोग्राफर्स की शैली को ही अपनाया करते थे। भारत में फोटोग्राफी उन दिनों अभिजात्य वर्ग के लोगों का शौक हुआ करता था, आजीविका के लिए इसका प्रयोग यदा-कदा ही देखने को मिलता था। भारत में फोटोग्राफी को पेशेवर तौर पर अपनाया जाना बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ के बाद से ही शुरू हुआ और उन दिनों यह क्षेत्र पुरुषप्रधान ही था। यद्यपि उन्नीसवी शताब्दी के द्वितीय दशक के आरम्भ से महिलाएँ भी शौकिया फोटोग्राफी के क्षेत्र में कदम रखने लगी थीं किन्तु इस पुरुषप्रधान क्षेत्र में एक पेशेवर के रूप में होमाई व्यारावाला का आना उनका एक साहसपूर्ण कदम था। होमाई व्यारावाला भारत की प्रथम महिला प्रेस फोटोग्राफर बनीं और वे इस क्षेत्र में 1938 से1973 तक सफलतापूर्वक कार्य करती रहीं। उन्होंने अपना फोटोग्राफिक कैरियर का आरम्भ बम्बई (वर्तमान मुम्बई) से किया।


होमाई व्यारावाला अपने मूलनाम की अपेक्षा अपने छद्रमनाम "डालडा 13" से अधिक जानी जाती रहीं। व्यारावाला ने जब पहली बार अपनी कार का रजिस्ट्रेशन करवाया तो उन्हें कार का नम्बर मिला था - "DLD 13"। कार के इस नम्बर से ही उन्हें अपना छद्मनाम "डालडा 13" रखने की प्रेरणा मिली और उन्हें उनके इस छद्मनाम ने बहुत लोकप्रियता दिलाई।

होमाई व्यारावाला को स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह, भारत-पाकिस्तान के विभाजन पर विचार के लिए हुई निर्णायक बैठक तथा अन्य अनेक ऐतिहासिक पलों की फोटोग्राफी के लिए याद किया जाता है।

यद्यपि होमाई व्यारावाला आज हमारे बीच नहीं हैं किन्तु उनके द्वारा खींचे गए चित्रों ने उन्हें अमर बना दिया है।

होमाई व्यारावाल उर्फ "डालडा 13" के द्वारा खींचे गए कुछ लोकप्रिय चित्र

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