Wednesday, February 11, 2015

चाणक्य नीति - अध्याय 4 (Chanakya Neeti in Hindi)


  • व्यक्ति की कुल उम्र, व्यक्ति के कार्य का प्रकार, व्यक्ति की संपत्ति और व्यक्ति की मृत्यु दिनांक - ये चार बातें माता के गर्भ में ही निश्चित हो जाती हैं।

  • सन्तान, मित्र तथा सगे-सम्बन्धी भगवान के भक्त से दूर भागते हैं, किन्तु जो लोग भगवान के भक्त का अनुसरण करते हैं वे अपने समर्पण के कारण अपने परिवार को धन्य कर देते हैं।

  • जिस प्रकार से मछली, कछुआ और पक्षी अपने बच्चों को देखभाल करके, सावधानी बरत कर और स्पर्श करके बड़ा करते हैं, उसी प्रकार से संतजन भी अपने सहभागियों का पालन करते हैं।

  • जब शरीर स्वस्थ हो, स्वयं के नियन्त्रण में हो और मृत्यु दूर हो तभी आत्मसुरक्षा का प्रयास कर लेना चाहिए, मृत्यु के सर पर आ जाने पर भला क्या किया जा सकता है?

  • विद्या प्राप्ति कामधेन के समान है जो कि हर ऋतु में फल प्रदान करती है। विद्या माँ के समान रक्षक तथा हितकारी है। विद्या एक छुपे हुए खजाने के जैसा है।

  • अच्छे गुणों से सम्पन्न एक पुत्र, गुणों से वंचित सौ पुत्रों से भी अच्छा होता है। आसमान के असंख्य तारे रात्रि के अन्धकार को दूर नहीं कर सकते, उसे तो सिर्फ एक चन्द्रमा ही दूर करता है।

  • पैदा होते ही मर जाने वाला पुत्र, एक लम्बी उम्र वाले मूर्ख पुत्र से अच्छा होता है क्योंकि पैदा होते ही मर जाने वाला पुत्र क्षणिक दुख देता है जबकि मूर्ख बालक तमाम उम्र दुख देता है।

  • शरीर को बिना आग के जलाती हैं -
    उस छोटे से गाँव में बसना जहाँ रहने की सुविधाएँ उपलब्ध न हो
    नीच कुल में जन्मे व्यक्ति की नौकरी करना
    अस्वास्थ्यकर भोजन करना
    पत्नी का सदैव क्रोधित रहना
    मूर्ख पुत्र का होना
    पुत्री का विधवा हो जाना

  • दूध न देने वाली तथा गर्भधारण के अयोग्य गाय किस काम की? उसी प्रकार ऐसे पुत्र का जन्म किस काम का जो न तो शिक्षित हो सके और न ही भगवान की भक्ति कर सके।

  • जीवन के दुखों की आग में झुलसने वाले व्यक्ति को केवल सन्तान, पत्नी और भगवान के भक्तों की संगति ही सहारा देते हैं।

  • ये बातें सिर्फ एक बार होती हैं -
    राजा का आज्ञा देना
    पण्डित का उपदेश देना
    लड़की का विवाह

  • तप अकेले करना चाहिए, अभ्यास दो लोगों को एक साथ करना चाहिए, गायन तीन लोगों को एक साथ करना चाहिए, कृषि चार लोगों को एक साथ करना चाहिए और युद्ध अनेक लोगों को एक साथ लड़ना चाहिए।

  • यथार्थ में पत्नी वही होती है जो शुचिपूर्ण हो, पारंगत हो, पतिव्रता हो, पति को प्रसन्न करने वाली हो और सत्यवादी हो।

  • पुत्रहीन व्यक्ति का घर, सम्बन्धी रहित व्यक्ति की समस्त दिशाएँ, मूर्ख व्यक्ति का हृदय और निर्धन व्यक्ति का सब कुछ उजाड़ होता है।

  • आचरण में न लाया जाने वाला आध्यात्मिक सीख जहर है; अजीर्ण रोग से ग्रसित व्यक्ति के लिए भोजन जहर है; निर्धन व्यक्ति के लिए सामाजिक कार्यक्रम में जाना जहर है; और वृद्ध या प्रौढ़ व्यक्ति के लिए युवा पत्नी जहर है।

  • दया और धर्म से हीन व्यक्ति, आध्यात्मिक ज्ञान न रखने वाले गुरु, निरन्तर घृणा प्रदर्शन करने वाली पत्नी और स्नेह न रखने वाले सम्बन्धी का त्याग कर देना चाहिए।

  • व्यक्ति का सतत् भ्रमण बुढ़ापे को समीप ला देता है; घोड़े को हमेशा बाँधे रखने से वह बूढ़ा हो जाता है; पति के साथ यौनाचार न करने वाली स्त्री बूढ़ी हो जाती है; और लगातार धूप में रखने से वस्त्र पुराने हो जाते हैं।

  • इन बातों पर बार-बार विचार करना चाहिए - उचित समय, उचित मित्र, उचित स्थान, आय के उचित साधन, व्यय के उचित तरीके और उर्जा स्रोत जहाँ से आप शक्ति प्राप्त करते हैं।
  • द्विज अग्नि अग्नि में भगवान् देखते है, भक्त अपने हृदय में भगवान् देखते है, अल्पबुद्धि लोग मूर्ति में भगवान् देखते है किन्तु व्यापक दृष्टि रखने वाले लोग सर्वत्र में में भगवान् देखते है।
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