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Monday, March 22, 2010

जो जलाता है किसी को खुद भी जलता है जरूर ..

ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होगा जो कभी किसी से जला न हो। वह मुझसे आगे बढ़ गया, बस हो गई जलन शुरू। मैं जिस वस्तु की चाह रखता हूँ वह किसी और को प्राप्त हो गई और मेरा उससे जलना शुरू हो गया। कई बार तो लोग दूसरों से सिर्फ इसीलिये जलते हैं वे अधिक सुखी क्यों हैं। पर जो अधिक सुखी हैं वे भी अपने से अधिक सुखी से जलते हैं।

विचित्र भावना है यह जलन अर्थात् ईर्ष्या भी! आमतौर पर जलन की यह भावना असुरक्षा, भय, नकारात्मक विचारों आदि के कारण उत्पन्न होती है। क्रोध और उदासी ईर्ष्या के मित्र हैं और इसके उत्पन्न होते ही इसके साथ आ जुड़ते हैं। ये क्रोध और उदासी फिर आदमी को भड़काने लगते हैं कि तू अकेला क्यों जले? तू जिससे जल रहा है उसे भी जला। और आदमी शुरु कर देता है दूसरों को जलाना। किसी शायर ने ठीक ही कहा हैः

जो जलाता है किसी को खुद भी जलता है जरूर
शम्मा भी जलती रही परवाना जल जाने के बाद

इस ईर्ष्या के अलावा जलने और जलाने के और भी अर्थ होते हैं। चारों ओर यदि सिर्फ अन्धकार हो तो हमारी आँखें किस काम की हैं? छोटा सा दिया स्वयं जलकर हमें रात्रि के अन्धकार से निजात दिलाता है। दीपक की छोटी सी टिमटिमाहट रात्रि के गहन तम का नाश कर देती है।

किसी फिल्म के गीत की सुन्दर पंक्तियाँ याद आ रही हैं:

जगत भर की रोशनी के लिये
हजारों की जिन्दगी के लिये
सूरज रे जलते रहना ...

सूरज भी स्वयं जलकर हमारा कल्याण करता है।

जलने-जलाने की बात हो और अग्नि की चर्चा न हो तो बात ही अधूरी रह जाती है। अग्नि के बिना हमारा गुजारा ही नहीं हो सकता। अग्नि न हो तो खाना कैसे पके? अग्नि में हविष्य की आहुति देकर ही मानवकल्याण हेतु हवन किये जाते हैं। अग्नि को देवता माना गया है। ज्वलन, पावक, अनल, धनञ्जय, शुक्र, चित्रभानु आदि अग्नि के अन्य नाम हैं। संस्कृत में तो अग्नि के और भी बहुत सारे नाम हैं जिनमें से कुछ हैं:

वैश्वानर,वह्नि, वीतिहोत्र, कृपीटयोनि, जातवेराः, तनूनपाद्, वर्हिःशुष्मा, शोचिष्केश, उपबुर्ध, आश्रयाश, वृहद्भानु, कृशानु, लोहिताश्व, वायुजशख, शिखावान्, आशुशुक्षणि, हिरण्यरेताः, हुतभुग्, दहन, हव्यवाहन, सप्तार्चि, दमुनाः, विभावसु, शुचि और अप्पित्त

तो हम यदि ईर्ष्या की आग में जलेंगे तो स्वयं के साथ-साथ दूसरों का भी अहित ही करेंगे किन्तु हम यदि सूर्य और दीपक की भाँति जलें तो बहुत से लोगों का कल्याण कर सकते हैं।