Monday, December 15, 2008

इंटरनेट यूजर्स - भारत चौथे स्थान पर (हिन्दी ब्लोग्स की साख में भी वृद्धि)

विश्व भर के इंटरनेट यूजर्स के मामले में अब भारत का स्थान चौथा हो गया है। भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 88100000 (88.1 मिलियन) है। देखें: With 81 mn Net users, India gets 4th slot

टाप 10 दस देशों की लिस्ट इस प्रकार है:

यूनाइटेड स्टेट्स आफ अमेरिका 220 मिलियन यूजर्स
चीन 210 मिलियन यूजर्स
जापान 88.1 मिलियन यूजर्स
भारत 81 मिलियन यूजर्स
ब्राजील 53 मिलियन यूजर्स
यूनाइटेड किंगडम 40.2 मिलियन यूजर्स
जर्मनी 39.1 मिलियन यूजर्स
कोरिया 35.5 मिलियन यूजर्स
इटली 32 मिलियन यूजर्स
फ्रांस 31.5 मिलियन यूजर्स

यद्यपि लगता है कि 88.1 मिलियन एक बहुत बड़ी संख्या है पर देखा जाये तो भारत के 300 मिलियन कर्मचारियों की तुलना में भारत में इंटरनेट यूजर्स की तादात अभी बहुत कम है। लगता है कि भारत में अभी भी इंटरनेट सुविधा की कीमत अपेक्षाकृत ज्यादा है और इसी कारण से अधिकतर लोग अपने आफिस से या फिर साइबर कैफे से ही इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। पर यह तय है कि निकट भविष्य में इस संख्या में इजाफा ही होना है। यदि जल्दी ही भारत का स्थान चौथे से पहले या कम से कम दूसरे में आ जाये तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।

अब यदि हम ब्लोग्स की भी चर्चा करें तो आपको जान कर खुशी होगी कि हिंदी ब्लोग्स का मान अब विश्व की निगाह में बढ़ता जा रहा है। सबूत के तौर पर देखें Blog it in Hindi, dude से एक उद्धरणः

When Amitabh Bachchan decided to write his blog in Hindi, it evoked mixed reactions everywhere; but not many know that Hindi blogging in recent times has reached such a height that it really doesn't need big names to endorse it.

(जब अमिताभ बच्चने अपने ब्लोग को हिंदी में लिखने का निश्चय किया तो सभी स्थानों में इसकी मिश्रित प्रतिक्रिया हुई, किन्तु अधिकतर लोग नहीं जानते कि वर्तमान समय में हिन्दी ब्लोगिंग इतनी ऊँचाई पर पहुँच चुकी है कि उसे अपने परिचय के लिये बड़े नामों की आवश्कता नहीं है।)
फिलहाल विश्व भर में ब्लोग्स की कुल संख्या 70000000 से अधिक है जिसमें से 15000000 सक्रिय ब्लोग्स हैं। देखें Blog Count for July: 70 million blogs। एक आकलन के अनुसार प्रतिदिन 120000 नये ब्लोग्स का निर्माण होता है।

अभी भी अन्य भाषाओं के ब्लोग्स तथा वेबसाइट्स की तुलना में हिन्दी ब्लोग्स की संख्या नगण्य ही है।

हिन्दी ब्लोग्स की संख्या कम होने के कुछ कारण ये भी हैं।

  • अभी भी अधिकतर लोगों को हिन्दी लेखन सॉफ्टवेयर्स की जानकारी नहीं है और वे चाह कर भी अपने हिन्दी के ब्लोग्स नहीं बना पाते।

  • अन्य भाषा के ब्लोगर्स का मुख्य उद्देश्य होता है अपने ब्लोग से कमाई करना जबकि हिन्दी ब्लोगर्स अपनी आत्म तुष्टि के लिये ब्लोगिंग करते हैं। यदि आत्म तुष्टि के साथ साथ ब्लोग्स से कुछ अतिरिक्त कमाई होने लगे तो निश्चित तौर पर हिन्दी ब्लोग्स की संख्या बढ़ेगी।

    (वैसे श्री दिनेशराय द्विवेदी के अंग्रेजी ब्लोग Law & Life को देख कर लगा कि अतिरिक्त कमाई के लिये द्विवेदी जी ने एक सार्थक पहल किया है। आखिर कब तक हिन्दी ब्लोगर्स बिना कमाई का लेखन करते रहेंगे, हिन्दी ब्लोग्स से कमाई नहीं तो अंग्रेजी ब्लोग्स से ही सही। वैसे मैंने भी इसी उद्देश्य से GKA's Blog बनाया है।)

  • अन्य भाषा में जो लोग स्वयं को लिखने में अक्षम पाते हैं वे लोग भी अन्य लेखकों से लेख खरीद कर या फिर आर्टिक डायरेक्टरीज़ से प्राप्त होने वाले मुफ्त लेखों का उपयोग कर के अपना ब्लोग बना लेते हैं जबकि हिन्दी में आर्टिकल डायरेक्टरी की सुविधा नहीं के बराबर है।

पर यह निश्चित है कि निकट भविष्य में हिन्दी ब्लोग्स की संख्या अवश्य ही बढ़ेगी।

अंत में:

मैं पहले भी बता चुका हूँ कि मैंने कृति निर्देशिका नामक हिन्दी आर्टिकल डायरेक्टरी का निर्माण किया है। चूँकि वह हिन्दी की डायरेक्टरी थी, गूगल महाराज ने उस पर कृपा की और उसका पेज रैंक 2 हो गया। नतीजे के रूप में उसमें अंग्रेजी के बहुत सारे लेख आने लग गये जिन्हें कि मैं, यह कारण बता कर कि यह डायरेक्टरी सिर्फ हिंदी के लेख स्वीकार करती है, सधन्यवाद प्रकाशन के लिये अस्वीकार कर दिया करता था। परिणाम स्वरूप पेज रैंक गिर कर 1 हो गया और वह डायरेक्टरी दम तोड़ने के कगार पर आ गई क्योंकि उसमें लेखों की संख्या बहुत कम थी (श्री जाकिर हुसैन रजनीश जी की दो कृतियों को छोड़ कर सिर्फ मेरी ही रचनाएँ है)। अंततः उसे मरने से बचाने के लिये मजबूरन मुझे उसमे एक अंग्रेजी लेख वर्ग बनाना तथा अंग्रेजी लेखों को स्वीकार करना पड़ा इससे डायरेक्टरी चल पड़ी (वर्तमान में उसमें 1500 से अधिक लेख हैं) और प्रतिदिन कुछ सेंट एडसेंस के द्वारा कमाई भी होने लगी। किन्तु मुझे दुःख है कि मैं अपनी डायरेक्टरी के लिये हिंदी रचनाएँ नहीं जुटा पाया। अपने समस्त ब्लोगर मित्रों से मैं एक बार फिर से आग्रह करता हूँ कि वे लोग कम से कम अपनी एक रचना (भले ही वह उनके ब्लोग में पूर्व प्रकाशित हो) कृति निर्देशिका को दान के रूप में दे दें जिससे कम से कम यह तो लगे कि ये हिन्दी की डायरेक्टरी है।
Post a Comment