Monday, May 24, 2010

हिन्दी ब्लोगरों के दो, और केवल दो, प्रकार होते हैं - एक महान ब्लोगर दूसरा क्षुद्र ब्लोगर

हिन्दी ब्लोगिंग में हम लगभग तीन साल से हैं और इस दौरान हमने जो कुछ भी देखा, पढ़ा और अनुभव किया उससे सिर्फ यही निष्कर्ष निकलता है कि हिन्दी ब्लोगरों के दो, और केवल दो, प्रकार होते हैं - एक महान ब्लोगर दूसरा क्षुद्र ब्लोगर।

महान ब्लोगर वे होते हैं जो हिन्दी ब्लोगिंग के उद्देश्य एवं लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रहते हैं और यह तो आप जानते ही हैं कि हिन्दी ब्लोगिंग का उद्देश्य न तो रुपया कमाना है, न अपने मातृभाषा की सेवा करना और नेट में उसे बढ़ावा देना है और ना ही पाठकों को उसके पसन्द की जानकारी ही देना है क्योंकि रुपया की हमें कुछ विशेष जरूरत ही नहीं है, हम आगे बढ़ेंगे तो हिन्दी अपने आप ही आगे बढ़ जायेगी (आखिर हिन्दी हम से है भाई, हम हिन्दी से नहीं) और पाठकों के पसन्द से हमें कुछ लेना देना ही नहीं है। हिन्दी ब्लोगिंग का तो उद्देश्य है महान ब्लोगर बनकर अन्य ब्लोगरों से सर्वाधिक टिप्पणी प्राप्त करना। अतः सफल ब्लोगर वे ही होते हैं जिन्हें सर्वाधिक टिप्पणी प्राप्त होती है।

एक जमाना था जब कि जिसमें मनुष्य के द्वारा किया गया कार्य सफल होता था तो वह मनुष्य महान हो जाता था। बाबू देवकीनन्दन खत्री की कृति "चन्द्रकान्ता" ऐसी लोकप्रिय हुई कि उसे पढ़ने के लिये लाखों लोगों को हिन्दी सीखनी पड़ी और खत्री जी इतिहासपुरुष हो गये। प्रेमचन्द जी की कहानियों और उपन्यासों ने पाठकों के हृदय में घर कर लेने में ऐसी सफलता पाईं कि प्रेमचन्द महान हो गये, "कथा सम्राट" तथा "उपन्यास सम्राट" के नाम से विख्यात हो गये। चन्द्रधर शर्मा गुलेरी जी ने "उसने कहा था" लिखते समय सोचा भी न रहा होगा कि उनकी इस कहानी का अनुवाद संसार के समस्त प्रमुख भाषाओं में हो जायेगा और वे महानता की सीमा को छूने लगेंगे। कहने का तात्पर्य यह है कि उस जमाने में व्यक्ति का कार्य व्यक्ति को महान बनाता था।

पर आज का जमाना ऐसा है कि महान व्यक्ति के द्वारा किया गया हर कार्य सफल माना जाता है याने कि महान व्यक्ति कार्य को सफल बनाता है। इसीलिये आज के जमाने में आदमी को पहले महान बनना पड़ता है। यही कारण है महान ब्लोगर जो कुछ भी लिख देता है वह हमेशा सफल ही होता है और उसे सर्वाधिक टिप्पणियाँ मिलती ही हैं। इसलिये आजकर सफल पोस्ट लिखने के बजाय महान ब्लोगर बनने के लिये उद्योग करना ही उचित है।

23 टिप्पणियाँ:

शिक्षामित्र said...

यह अनुसंधान का विषय है कि टॉप ब्लॉगर जो लिखते हैं अगर उनकी वही पोस्ट किसी कम चर्चित ब्लॉग पर आए तो उस पर कितनी टिप्पणियां प्राप्त होगीं।

sangeeta swarup said...

बढ़िया विश्लेषण...

honesty project democracy said...

शिक्षा मित्र के अनुसन्धान वाले बात में दम है ,बाकि हमारा तो एक ही लक्ष्य है की ब्लॉग को सत्य,न्याय और इंसानियत को जिन्दा करने के लिए प्रयोग किया जाय और इसका प्रयोग अच्छे,सच्चे,इमानदार और देशभक्त लोगों की सुरक्षा के लिए भी ज्यादा से ज्यादा एकजुटता के साथ हो ,टिप्पणी मिले न मिले लोगों का जमीर जगे इंसानियत जिन्दा हो यही हमारा मकसद है / इस मकसद में हमे आपका भी सहयोग चाहिए /

संजय बेंगाणी said...

ज्ञान प्राप्त कर लिया है. महानता की ओर अग्रसर होने का प्रयास करते है....शुभस्य शिघ्रम..

Sanjeet Tripathi said...

chaliye mahan Gyaan mila apan ko, shukriya, ab ham jate hain mahan ban ne ke liye...

Arvind Mishra said...

आपका आशय क्षुद्र से हैं न ? क्यंकि छुद्र तो कोई शब्द ही नहीं है मेरी जानकारी में ....

जी.के. अवधिया said...

गलती की ओर ध्यान दिलाने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद अरविन्द जी!

हिज्जे की गलती के लिये मुझे अत्यन्त खेद है। गलती सुधार ली गई है।

AlbelaKhatri.com said...

satya vachan maharaj !

aap thik kah rahe hain

राज भाटिय़ा said...

है राम आप तो सच बोलने लग गये जी!!!लेकिन सुंदर सत्य

राजकुमार सोनी said...

जब से बाजारवाद का बोलबाला बढ़ा है तब से खुद को प्रोजेक्ट करने लग गए हैं लोग। आपकी पोस्ट कई सवाल खड़े करती है।

राजकुमार सोनी said...

और हां अपना भाई कल दिल्ली से निकल रहा है। परसो पहुंच जाएगा एयरपोर्ट चलना लेने के लिए।

पी.सी.गोदियाल said...

अवधिया साहब, ब्लॉग्गिंग में तीसरा प्रकार भी तो नहीं है ! साथ ही पाठक कहाँ है जो उनकी पसंद का ख्याल रखा जाए ?

महफूज़ अली said...

आप ठीक कह रहे हैं...

Udan Tashtari said...

संपूर्ण ज्ञान आत्मसात कर लिया, अब प्रयासरत होते हैं इस दिशा में. :)

सूर्यकान्त गुप्ता said...

वास्तविकता से आप अवगत कराते रहते हैं। जरूरी भी है। लगे तो सही अपने आप मे मशगूल रहने वालों को "अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे"। शुक्रिया।

ताऊ रामपुरिया said...

हम तो कसम खा चुके हैं कि आपके बताये मार्ग पर ही चलेंगे.

रामराम.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

दीमक लगी इस महानता की सीढी चढने से हम तो जी क्षुद्र ही भले......कम से कम यहाँ से गिरने की तो कोई संभावना नहीं..

बेचैन आत्मा said...

मध्य क्षेत्र को तो कोई स्थान ही नहीं दिया आपने..!

राम त्यागी said...

जी के अवधिया जी से में सहमत नही हूँ, ब्लोगिंग के ये तो बहुत तुच्छ सीमा हुई (writting just for comments). ब्लॉग्गिंग और इन्टरनेट का कोई दायरा नहीं होता.
और हर तरह के लोग है इधर ...कुछ लोग सिर्फ "वाह" "वाह" टिप्पणियों के लिए लिखते है ..ये पानी के बुलबुले है और पता नहीं कैसे ये ऐसा करके आत्मसंतुष्टि पाते है.
मेरे हिसाब से ब्लॉग्गिंग को मतलब है अपनी बात रखने का तरीका, डायरी लिखने के सामान है ये, बस इधर आपका परिवार बड़ा रहता है. श्रोता और पाठकों की संख्यां आपके कंटेंट के ऊपर निर्भर करती है.
i would love to see discussions on my post instead of WAAH

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

Khari khari post hai..

सतीश चंद्र सत्यार्थी said...

सही विश्लेषण .....

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

मै तो दो श्रेणी समझता था एक महान दूसरी महानतम

खुशदीप सहगल said...

अवधिया जी, ये बताइए क्षुद्र ब्लॉगरों में महान कैसे बना जा सकता है...

जय हिंद...

 
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