बड़े जोश और उत्साह के साथ लोग आ रहे हैं ब्लोगिंग के क्षेत्र में। जब कोई अपना ब्लोग बना लेता है उसे कुछ कुछ अन्तराल में अपडेट भी करना होता है जिसके लिये सामग्री (content) की जरूरत होती है याने कि पोस्ट लिखनी पड़ती है।
अंग्रेजी ब्लोगिंग में तो ये पोस्ट लिखना एक भारी समस्या बनकर रह गई है। विषय आधारित ब्लोग्स हैं वहाँ पर और प्रत्येक विषय में लाखों करोड़ों-पोस्ट पोस्ट पहले से ही लिखे जा चुके हैं। वहाँ का आलम तो यह है कि मशीनी लेखन किया जा रहा है। ऐसे ऐसे सॉफ्टवेयर्स बन गये हैं जो कि किसी भी अच्छे पोस्ट के आशय को ज्यों का त्यों रखते हुए उसकी भाषा को बदल देते हैं और पुराना लेख नया लगने लगता है। अंग्रेजी ब्लोग में कमाई होने के कारण लेख और बने बनाये ब्लोग्स की खरीदी-बिक्री हो रही है वहाँ पर। शायद आपको पता हो कि तीन डालर से लेकर पच्चीस डालर तक एक लेख की कीमत है वहाँ पर, लेख की जैसी गुणवत्ता, वैसी ही कीमत!
अस्तु, बात हो रही थी अपने ब्लोग को अपडेट करने की, प्रसंगवश बात जरा दूसरी दिशा में मुड़ गई थी। शुरू-शुरू में लगने लगता है कि रोज-रोज आखिर लिखने के लिये हमेशा कुछ नया कहाँ से लायें? किन्तु वास्तव में देखा जाये तो यह कोई बड़ी समस्या नहीं है। आपका अध्ययन, आपका अनुभव और आपकी कल्पनाशीलता आपको पूरी-पूरी क्षमता प्रदान करती है लेखन की। बस एक बार लिखना शुरू कीजिये और देखिये कि कितना अच्छा लिख लेते हैं आप। गहन अध्ययन है आपका इसलिये लिखने के लिये विषय की कमी नहीं है आपके पास। आप बहुत सी ऐसी बातें जानते हैं जिन्हें शायद दूसरे लोग नहीं जानते। तो अपनी जानकारी को अपने पोस्ट के जरिये दूसरों तक पहुँचाइये ना! आपका ब्लोग अपडेट होता रहेगा और लोगों की जानकारी भी बढ़ती रहेगी। और फिर जितना अधिक आप लिखेंगे उतना ही अधिक आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता चला जायेगा।
विश्वास मानिये कि अच्छे-अच्छे विषयों पर लिखे गये आपके पोस्ट हिन्दी को इंटरनेट के आकाश में एक नई ऊँचाई तक पहुचा देंगे।
गोदान – 86
4 hours ago
10:41 AM
जी.के. अवधिया
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23 टिप्पणियाँ:
बहुत बढ़िया मार्गदर्शन किया आपने, आभार |
जय हो गुरुदेव-बने केहेस
नमस्कार/परनाम! बहुत ही अच्छी बात लिखी है आपने और उत्साह वर्धन किया है हमारा। मगर हां ये बिचारी छत्तीसगढी बोली ह कोंटियाये बैठे रथे तउने हा सोचउल हो जाथे।
बहुत अच्छी और जानकारी पूर्ण पोस्ट है अवधिया जी.
मुझे ही लें, पिछले दो सालों में कितना ही परिश्रम करके मैंने अपने ब्लौग में बहुत उपयोगी सामग्री पोस्ट की है जिसे पढ़कर सभी लाभान्वित होते हैं. उसमें मेरा अपना कुछ नहीं है लेकिन बेसिरपैर का लेखन या हर समय गुटबाजी और ब्लौगिंग की स्थिति का रोना रोने के बजाय यही अच्छा है.
थोड़ा अध्ययन, थोड़ा अनुभव और थोड़ी कल्पनाशीलता ... और क्या चाहिये पोस्ट लिखने के लिये?
अच्छी बात है लेकिन इसमें थोडा इंसानी जज्बात,सामाजिक सरोकार से सम्बंधित समस्याएं और समाधान तथा रोज आस पास हो रही सराहनीय क्रिया कलापों को सम्मान देना भी शामिल कर लिया जाय तो सोने पे सुहागा हो जायेगा *******
बने बात लिखे हस
आप हिंदी ब्लागवीर हैं, ये एकदम सही है - "हिन्दी को इंटरनेट के आकाश में एक नई ऊँचाई तक पहुचा देंगे।"
कल्पनाशील होना... हाँ, कल्पनाशील और रचनाशील होना बड़ी ज़रुरत है अच्छा ब्लौग बनाने और चलाने के लिए. इनके अभाव में ब्लौग में स्तरहीन सामग्री आती रहती है जिसे कोई नहीं पढता. नतीजतन, कुछ दिनों में ब्लौगर का मोहभंग हो जाता है. उसे यह लगता ही नहीं कि उसके लेखन में वह पठनीयता ही नहीं है तो पाठक/टिप्पणियां कैसे आएँगी. वह दूसरों की लानातमलानत और छिद्रान्वेषण पर उतर जाता है. या फिर वह अपना ध्यान मूल ब्लौगिंग से हटाकर मेलजोल बढ़ाने और आपसी खींचातानी में लगाने लगता है.
ब्लौगिंग लोगों में रचनाकार होने का बहुत बड़ा भ्रम पैदा कर रही है. जो व्यक्ति नाले में टेम्पो गिरने का समाचार पोस्ट कर रहा है उसे ब्लौगर मानने में मुझे तो बड़ी हिचक होती है. ख़बरों के लिए न्यूज़ साइट्स और रेडियो-टीवी पहले से ही हैं फिर यहाँ ख़बरें पोस्ट करने की क्या ज़रुरत है?
ब्लौगर कविता, कहानी, व्यंग्य, सामयिक लेख, आलोचना, नई जानकारी, चीज़ों को करने और समझने के तरीके देने वाली पोस्टें लिखें. अभी भी यहाँ 'do it yoursel' जैसे ब्लौग नहीं हैं जिनमें चित्र या वीडियो के मार्फ़त समस्याओं के हल बताना या तरकीबें सुझाए जाएँ. इसके लिए पहल किये जाने की ज़रुरत है.
क्या बात करते हैं जनाब? हिन्दी ब्लॉग लिखने के लिए एक टेबल और उस पर इंटरनेट से जुड़ा एक अदद कम्प्यूटर की जरूरत है बस्स... और हिन्दी लिखने का काम वैसे भी गूगल ट्रांसलिट्रेशन ने बेहद आसान किया हुआ है!
:)
बहुत अच्छी जानकारी दी आप ने
रतलामीजी ने राज खोल दिया है तो हिन्दी सेवी लज्जा से मरा जा रहा है :)
थोड़ा अध्ययन, थोड़ा अनुभव और थोड़ी कल्पनाशीलता ... थोड़ी सनसनी भी हो तो क्या बात है. :)
अच्छा लेख.
मोहदय ..बड़ी सीधी बात कही है .....कुछ बात रतलामी जी की भी सही है .....धन्यवाद और इतने पर भी कुछ बढिया ना लिख पाए तो क्या कहे ?....किस्मत का दोष ....////आपके लिए कुछ हमारे यहाँ भी है ...सुझाव दीजियेगा
सही सन्देश दिया आपने.
परन्तु मौजूदा सन्दर्भ में रतलामी जी बात गंभीर है.
सत्य वचन गुरूदेव. रवि भईया घलो बने कहत हे, हिन्दी लिखने का काम वैसे भी गूगल ट्रांसलिट्रेशन ने बेहद आसान किया हुआ है!
यह सब जानकारी आप ही दे सकते हैं क्योंकि इस विषय पर आपको गहरी जानकारी है। आपने अच्छा लिखा है।
यह सब जानकारी आप ही दे सकते हैं क्योंकि इस विषय पर आपको गहरी जानकारी है। आपने अच्छा लिखा है।
अवधिया साहब , आप हमारे बुजुर्ग है ( अगर बुजुर्गो को ये संबोधन चुभे ना तो क्योंकि आजकल यह भी एक समस्या बन गई है ) मैं कह सकता हूँ कि हमें आपसे ऐसे ही मार्गदर्शन की उम्मीद है !
गोदियाल जी, हम तो खुद को सठियाया बुड्ढा कहते हैं, आपने तो बुजुर्ग सम्बोधन करके हमारा मान ही बढ़ाया है। :)
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आदरणीय अवधिया जी,
बेहद उम्दा, हौसला बढ़ाता संदेश...
आभार!
बात तो सही है....
मेरे नए ब्लोग पर मेरी नई कविता शरीर के उभार पर तेरी आंख http://pulkitpalak.blogspot.com/2010/05/blog-post_30.html और पोस्ट पर दीजिए सर, अपनी प्रतिक्रिया।
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