Thursday, September 23, 2010

भारत में आलू का इतिहास

भारत में शायद ही कोई ऐसा रसोईघर होगा जहाँ पर आलू ना मिले। हमारे देश में सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली फसलों में गेहूँ, धान तथा मक्का के बाद आलू का ही नंबर आता है। सब्जी तथा बहुत से स्वादिष्ट व्यञ्जन बनाने के लिए सम्पूर्ण भारत में आलू का प्रयोग किया जाता है। पर शायद आपको यह जानकर आश्चर्य हो कि आज से लगभग 400 साल पहले भारत में आलू के बारे में लोग जानते ही नहीं थे।

ज्ञात जानकारी के अनुसार लगभग 7000-10000 वर्ष पहले आलू का घरेलू प्रयोग मध्य पेरु मे होता था। माना जाता है कि आलू की खेती सर्वप्रथम कैरिबियन में आरम्भ हुआ जहाँ पर इसे 'कमाटा' (camata) या 'बटाटा' (batata) के नाम से जाना जाता था। 16वीं शताब्दी में यह 'बटाटा' स्पेन पहुँचा और वहाँ पर उसकी खेती होने लगी तथा स्पेन से सम्पूर्ण यूरोप में 'बटाटा' का निर्यात् होने लगा। इस बीच 'बटाटा' का नाम परिवर्तित होकर 'पटाटा' (patata) बन गया जो कि इंग्लैंड जाकर 'पोटाटो' (potato) हो गया। स्पेन से निकल कर यह 'पोटाटो' पुर्तगाल, इटली, फ्रांस, बेल्जियम तथा जर्मनी तक फैल गया। कालान्तर में सम्पूर्ण यूरोप तथा एशिया के कई देशों में आलू की खेती होने लगी।

माना जाता है कि 17वीं शताब्दी के आरम्भ में पुर्तगालियों ने भारत के पश्चिमी समुद्रतटों में आलू को बटाटा के नाम से उगाना शुरू किया। एक मान्यता यह भी है कि आलू भारत में 17वीं शताब्दी के अन्तिम दौर में ब्रिटिश मिशनरियों के साथ आया और ब्रिटिश व्यापारियों ने उसी समय बंगाल में कलकत्ता के आसपास के इलाकों में इसे बेचना शुरू किया, उसी काल में पोटाटो का हिन्दी नाम आलू बना। सन् 1841-42 में अंग्रेजों ने नैनीताल जैसे पहाड़ी इलाकों में आलू की खेती शुरू कर दी और आलू दिनों-दिन तेजी के साथ लोकप्रिय होते चला गया।

विश्व भर में आलू के अनेक व्यञ्जन बनाय॓ जाते हैं।
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