Monday, November 22, 2010

जिन्दगी से हारा आदमी कभी सफल नहीं बन सकता

संसार में प्रत्येक व्यक्ति अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक अपनी जिन्दगी से सतत् संघर्ष करते रहता है और इस संघर्ष में प्रायः जिन्दगी ही जीतते रहती है। जो जिन्दगी से जीतने की क्षमता रखते हैं वे सफलता की ऊँचाई में पहुँच जाते हैं और जो हारते हैं वे नीचे ही रह जाते हैं। जिन्दगी से संघर्ष में जीत और हार मानव समाज को दो हिस्सों में बाँट देती है, ये बँटवारा हैः

जीतने वालों का और हारने वालों का!

ऊपर वालों का और नीचे वालों का!


और यह भी तय है कि अगर आप ऊपर नहीं है तो इसका मतलब है आप नीचे हैं। आप जिन्दगी की लड़ाई हारे हुए हैं। जिन्दगी के क्रिकेट में या तो जीत होती है या हार, जिन्दगी के क्रिकेट में ड्रा नहीं होता।

जिन्दगी से हारा हुआ आदमी कभी भी सफलता प्राप्त नहीं कर सकता, कभी भी ऊँचाई पर नहीं पहुँच सकता।

हो सकता है कि आप भी जिन्दगी की लड़ाई हारे हुए हों। आप सफलता चाहते हैं किन्तु आपको सफलता मिलती नहीं। आप ऊपर न होकर नीचे हों। आप जिन्दगी की दौड़ में आगे न होकर पीछे हों।

किन्तु चिन्ता करने और निराश होने की कोई जरूरत नहीं है। आप जिन्दगी की लड़ाई जीत सकते हैं। आप नीचे से ऊपर पहुँच सकते हैं। याद रखिए कि नीचे दुनिया भर की भीड़ होती है किन्तु ऊपर हमेशा जगह खाली रहती है, आपके लिए भी ऊपर एक जगह है जो आपकी प्रतीक्षा कर रही है।

वास्तव में जिन्दगी की लड़ाई जीतना एक कला है। आपको यह कला सीखनी होगी।

क्या करना होगा आपको इस कला को सीखने के लिए?

सबसे पहले तो आपको इस प्रश्न का उत्तर खोजना होगा किः

जिन्दगी की लड़ाई में सफलता प्राप्त कर ऊपर चले जाने वाले लोग आखिर इस लड़ाई को जीत कैसे लेते हैं और आप इस लड़ाई में हार क्यों जाते हैं?


इस प्रश्न का सीधा सा उत्तर है कि जो लोग जिन्दगी की लड़ाई जीतते हैं वे आत्मविश्वास से भरे होते हैं और आपमें आत्मविश्वास की कमी होती है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातें बता देती हैं कि आपमें कितना आत्मविश्वास है। जरा याद करके बताइए कि क्या आप दूसरों से आँखों में आँखें डाल कर बात करते हैं? आप किसी से अकड़कर सख्ती के साथ हाथ मिलाते हैं या मरियल सा होकर?

आत्मविश्वास की इस कमी के कारण आप निराशावादी हो जाते हैं। आप को स्वयं के ऊपर भरोसा नहीं रह पाता। याद रखिए कि इस संसार में आपको यदि कोई व्यक्ति सफलता दिला सकता है तो वह व्यक्ति आप और केवल आप ही हैं। और यदि आपको खुद पर भरोसा न हो तो आप अपने आप को कभी सफलता नहीं दिला सकते। सफलता पाने के लिए स्वयं पर भरोसा करना अनिवार्य है और कोई व्यक्ति खुद पर भरोसा तभी कर सकता है जब उसके भीतर भरपूर आत्मविश्वास हो।

इस बात को कभी भी न भूलें कि कोई दूसरा व्यक्ति आपको सफलता कभी दिला ही नहीं सकता क्योंकि जिस सफलता को आप प्राप्त करना चाहते हैं, उसी सफलता को वह दूसरा व्यक्ति भी प्राप्त करना चाहता है। फिर क्यों वह आपको सफलता दिलाएगा? वह तो आपका प्रतिद्वन्द्वी है। सच पूछा जाए तो सफलता प्राप्त करने के मामले में संसार का प्रत्येक व्यक्ति आपका प्रतिद्वन्द्वी है और आपको उन सभी से द्वन्द्व करते हुए, उन्हें हरा कर, आगे बढ़ते जाना है।

और विश्वास मानिए कि आप स्वयं में भरपूर आत्मविश्वास पैदा कर सकते हैं। इसके लिए आपको अभ्यास की आवश्यकता है। वृन्द कवि ने कहा हैः

करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात ते सिल पर परत निसान॥


जब एक कमजोर रस्सी पत्थर पर निशान बना सकती है तो आप भला क्यों जिन्दगी की लड़ाई नहीं जीत सकते?

तो बिना एक पल की देर किए जुट जाइए जिन्दगी की लड़ाई जीतने के कार्य में। आप जीतेंगे तो आपका परिवार जीतेगा, आपका समाज जीतेगा, आपका देश जीतेगा!

12 comments:

Akhtar Khan Akela said...

shi kha sb kuch haar lekin himmt mt har duniya tere qdmon men hogi yhi khaavt he aapne shi likha jnaab mubark ho. akhtar khan akela kota rajsthan

honesty project democracy said...

करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात ते सिल पर परत निसान॥

अवधिया जी आज शरद पवार ,मनमोहन सिंह,प्रतिभा पाटिल तथा सोनिया गाँधी जैसे लोग हर ईमानदारी और मेहनत से किये गए अभ्यास और प्रयास से बने निशान को तिकरम और अपने स्वार्थ से मिटा देते हैं और ऐसी परिस्थितियाँ अच्छे इंसान को असफल ही बनाएगी ....आज जिन्दगी की लड़ाई कम से कम इंसान के लिए तो आसान नहीं ही है इन तिकरम बाजों के रहते हुए....

M VERMA said...

कोई दूसरा व्यक्ति आपको सफलता कभी दिला ही नहीं सकता
यकीनन सफलता का मूल तो स्वयं के अन्दर है. दूसरा व्यक्ति तो केवल सफलता पाने में उत्प्रेरक का काम कर सकता है

प्रवीण पाण्डेय said...

सार्थक व उपयोगी पोस्ट, यही अन्तर है, जीने और न जीने में।।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

पता नहीं साहब, मुझे यह मामले कुछ ज्यादा समझ में नहीं आते...

नवीन प्रकाश said...

एक पुरानी फिल्म "छोटी सी बात" के अशोक कुमार याद आ गए . शुरू के कुछ लाइन तो बिलकुल एक हैं . अमोल पालेकर होगा वो जिसे इस पोस्ट को पढ़कर हिरोइन मिल जायेगी
:)

एस.एम.मासूम said...

अच्छा लेख़., यदि आप को "अमन के पैग़ाम" से कोई शिकायत हो तो यहाँ अपनी शिकायत दर्ज करवा दें. इस से हमें अपने इस अमन के पैग़ाम को और प्रभावशाली बनाने मैं सहायता मिलेगी,जिसका फाएदा पूरे समाज को होगा. आप सब का सहयोग ही इस समाज मैं अमन , शांति और धार्मिक सौहाद्र काएम कर सकता है. अपने  कीमती मशविरे देने के लिए यहाँ जाएं

जी.के. अवधिया said...

@ नवीन प्रकाश

नवीन प्रकाश जी, आपने बिलकुल सही कहा, इस पोस्ट के लिए प्रेरणा भी फिल्म "छोटी सी बात" से मिली है और दो-चार संवाद, जो मुझे याद थे, उसी फिल्म से मैंने ले लिया है, किन्तु बाद में पोस्ट में अपने हिसाब से बातें लिखी है। अब यदि आप इसे मेरी चोरी मानें, तो आपने मेरी चोरी पकड़ ली है।

अन्तर सोहिल said...

इस बेहद प्रेरक पोस्ट के लिये हार्दिक आभार

नवीन प्रकाश said...

मुझे इसलिए याद रहा की इस फिल्म ने काफी मदद की मेरी कॉलेज के दिनों में विशेषकर आत्म विश्वास के लिए खैर अच्छे विचार को और बेहतर बनाने के लिए तो आप धन्यवाद स्वीकार करे

निर्मला कपिला said...

ावधिया जी बहुत ही प्रेरक और सार्थक पोस्ट है। धन्यवाद।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बहुत बढ़िया विश्लेषण !