Monday, April 20, 2015

मुझ बुड्ढे की भगवान से प्रार्थना

हे सर्वशक्तिमान परमात्मा!

आप जानते ही हैं कि मेरी उम्र साठ साल को पार कर गई है और मैं अब बूढ़ा हो चला हूँ।

मुझे अत्यधिक वाचाल याने कि बातूनी होने से बचाने की कृपा करें। ऐसी कृपा करें कि मैं अपने पुराने चुटकुले सुना-सुनाकर, अपने अतीत के किस्से बता-बता कर और लोगों को बिना माँगी सलाह दे-देकर पकाने की कोशिश करने से हमेशा बचूँ।

यह भी कृपा करें कि मैं लोगों के समक्ष अपनी बातों को, अन्तहीन विस्तार न देकर, संक्षेप में रख सकूँ। मेरी बुद्धि में यह बात सदा बनी रहे कि अपनी बात को अनावश्यक विस्तार देकर लोगों के समय बर्बाद करने वाले वृद्धजनों को लोग और कुछ नहीं, बल्कि एक खूँसट बुड्ढा ही समझते हैं।

अपनी ही हाँकने के बजाय लोगों की बात को सुनने और समझने की क्षमता मुझे प्रदान करने की कृपा करें।

मुझे ऐसा आशीर्वाद दें कि इस उम्र में भी मैं लोगों के सुख-दुःख में साथ दे पाऊँ।

मुझ पर ऐसी कृपा करें कि मैं लोगों के सामने अपने परिजनों की निन्दा करने से हमेशा बचा रहूँ।

मेरे मन में कदापि यह विचार न बना रहे कि 'चूँकि मैं अन्य लोगों से उम्र में बड़ा हूँ ड़सलिए, मैं अन्य लोगों से अधिक बुद्धिमान और ज्ञानी हूँ', मेरे भीतर सदा आभास बना रहे कि यह जरूरी नहीं है कि उम्रदराज आदमी दूसरों से अधिक विवेकी हो।

मेरी इस पूरी प्रार्थना का सार यही है कि हे भगवान! आप मुझ ऐसी कृपा करें कि मैं इस वय में भी अपने अवगुणों से अवगत रह पाऊँ ताकि लोग मुझे सठियाया हुआ बुड्ढा, सनकी बुड्ढा, झक्की बुड्ढा, खूँसट बुड्ढा जैसी उपाधि प्रदान करने से परहेज करें।
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