Thursday, June 5, 2008

गैस-डीजल-पेट्रोल

और भी मँहगी हो गईं गैस-डीजल-पेट्रोल।
खर्च बढ़ी दस फीसदी अकल हो गई गोल॥
अकल हो गई गोल कुछ भी समझ न आये।
सभी रहे हैं सोच कैसे जायें क्या खायें?
साइकिल ले लें आज से खायें छोटे कौर।
भूलें सपना कार का मँहगाई बढ़ गई और॥
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