Friday, November 20, 2009

जनाब मोहम्मद उमर कैरानवी, ये है जवाब तुम्हारी टिप्पणी का!

चर्चा पान की दुकान पर बलॉग में हमारे पोस्ट "हिन्दू विवाह याने कि पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का सम्बंध" में हमने तुम या तुम्हारे धर्म के विरुद्ध कुछ भी नहीं लिखा है फिर भी तुमने निम्न टिप्पणी कीः


Mohammed Umar Kairanvi November 19, 2009 4:44 PM

मि. अवधिया कभी बैंक से छुटटी लेके अदालतों में गए हो, वहां पता लगेगा इतना अटूट संबंध होना कितना दुख देता है, बहुत कुछ कह सकता हूं, चेतावनी और सांकल देखने आया था, दूसरे धर्म का नाम लिए बिना अपनी बात कह सकते हो तो कह लो अन्‍यथा ब्लागजगत जाने है, एक ही अपनी तरह का पागल है, 3 हफते से अधिक कभी नहीं लगते यह आप अच्‍छी तरह जानो हो किसमें, जो जवाब ही नहीं देता सवाल को ही हमेशा के लिए समाप्‍त कर देता है

पान की दुकान पर अपना बहुत पैसा बर्बाद होता है, इस पर तो सांकल भी नहीं लगी, समझ गये होंगे
तुमने जिस धमकी वाली भाषा में टिप्पणी की है उसकी वजह से हमें मजबूर होना पड़ा है तुम्हारी ही तरह की भाषा का प्रयोग करते हुए तुम्हारी टिप्पणी का जवाब देने के लिये। ब्लॉगजगत क्या जाने हैं और क्या नहीं जाने हैं यह हम भी जानते हैं और तुमसे ज्यादा अच्छी तरह से जानते हैं। हमें तुमसे सीखने की जरूरत नहीं है। दूसरे धर्म का नाम हम लें या न लें यह हमारी मर्जी की बात है, जो हमारी मर्जी होगी हम वही करेंगे। अगर तुम समझते हो कि तुम अपनी तरह के एक ही पागल हो तो यह भी जान लो कि हम भी अपनी तरह के एक ही सठियाये हुए बुड्ढे हैं। पागलों के डॉक्टर हैं हम! तुम जैसे कितने ही पागलों को ठीक कर दिया है।

मि. कैरानवी! हम शान्तिप्रिय लोग हैं, अमन-चैन बनाये रखना अपना फर्ज समझते हैं। पर तुम यह समझने की भूल मत कर बैठना कि गांधी की तरह से हम एक गाल पर थप्पड़ मारने वाले को अपना दूसरा गाल दिखाने वाले लोग हैं। हम तो थप्पड़ मारने के लिये उठने वाले हाथ को, हमारे गाल तक पहुँचने के पहले, ही तोड़ देने वाले लोग हैं। हम किसी से जानबूझ कर उलझते नहीं पर यदि कोई हमसे जबरन उलझने की कोशिश करे तो हम उसकी इस कोशिश का मुँहतोड़ जवाब देना भी जानते हैं।हम दोस्तों पर जान छिड़क सकते हैं तो दुश्मनों के छक्के भी छुड़ा सकते हैं। तुमने सिर्फ हमारी दोस्ती देखी है, दुश्मनी नहीं देखी। दुश्मनों के पेंदे पर लात जमाना और उन्हें जुतियाना हमें हमें अच्छी तरह से आता है। और हम निहायत ही जुदा किस्म से जुतियाते हैं, गिन कर पूरे सौ जूते लगाने का हमारा नियम है पर गुस्से में अन्ठानबे तक गिनते-गिनते गिनती ही भूल जाते हैं और हमें फिर से एक दो से गिनती शुरू करनी पड़ती है।

हिन्दी ब्लॉगजगत में अपना आतंकवाद फैलाने की अपनी जुर्रत बंद कर दो। हम किसी भी धर्म की बुराई नहीं करते किन्तु तुम्हारी धमकी की वजह से अपने धर्म के विषय में कहने सुनने से भी अपने आप को नहीं रोक सकते। तुम्हारा आतंक यहाँ नहीं चलने वाला है। ये ब्लॉग जगत है। यहाँ तुम लोगों को सपोर्ट करने वाला न तो कोई राजनीतिबाज है और न ही यहाँ कोई सेक्युलरिज्म है।

तुम जैसे दो चार सिरफिरे लोगों की वजह से हम अपने समस्त मुसलमान दोस्तों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते। हमारे मुसलमान भाई भी अच्छी तरह से समझते हैं कि ये जवाब सिर्फ तुम्हारे और तुम्हारे जैसे चंद और सिरफिरे लोगों के लिये ही है।

जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे इसलिये प्रेम प्यार ही बोने की कोशिश करो, नफ़रत फैलाने की कोशिश मत करो। प्यार के बदले में प्यार मिलता है और नफ़रत के बदले में नफ़रत ही मिलती है।

उम्मीद है कि आगे से किसी के भी किसी पोस्ट पर इस प्रकार की धमकी भरी टिप्पणी करना बंद कर दोगे। और नहीं, तो तुम जैसे लोगों के लिये हम और अलबेला जी ही काफी हैं।
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