Tuesday, January 26, 2010

तिरंगा फहरा दिया ... देशभक्ति वाले गाने बजा दिया ... क्या यही है गणतन्त्रदिवस मनाना?

जब से होश सम्भाला है तब से देखते आ रहा हूँ कि हर साल 26 जनवरी के दिन स्कूलों, शासकीय कार्यालयों, गली मुहल्लों में तिरंगा फहराया जाता है, जन-गण-मन गाया जाता है और देशभक्ति वाले फिल्मी गाने बजाये जाते हैं। क्या यही है गणतन्त्र दिवस मनाना? यदि कोई पूछ ले कि आखिर गणतन्त्र दिवस क्यों मनाया जाता है तो हममें से बहुत लोग शायद बगलें झाँकने लग जायेंगे।

यद्यपि हमारा देश 15 अगस्त को स्वतन्त्र हो गया था किन्तु उस समय हमारे पास अपना कोई संविधान नहीं था और हमारे कानून औपनिवेशिक भारत सरकार के संशोधित भारत अधिनियम 1935 पर ही आधारित थे। अर्थात उस समय भारत एक "स्वतंत्र-उपनिवेश" (Dominion) था तथा स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भी हमारे राष्ट्र के प्रमुख जॉर्ज षष्ठम् तथा गवर्नरल जनरल अर्ल माउंटबेटन थे। भारत को पूर्ण गणतन्त्र बनने के लिये हमारा अपना संविधान बनाना आवश्यक था अतः अपना संविधान बनाने के लिये 29 अगस्त 1947 को भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई। इस समिति ने भारतीय संविधान का निर्माण किया जिसे 26 जनवरी, १९५० को देश में लागू किया गया और हमारा देश गणतन्त्र में परिणित हो गया। भारत के संविधान के अभिग्रहण की सालगिरह पर प्रतिवर्ष हम राष्ट्रीय पर्व के रूप में गणतन्त्र दिवस मनाते हैं।

विदेशी, विशेषकर ब्रिटिश, संविधानों पर आधारित हमारा संविधान, जिसमें भारतीय मौलिकता नाम की कुछ भी चीज कहीं नजर ही नहीं आती, कितना कारगर है यह तो इसी से पता चलता है कि आज हमारा देश आतंकवाद, नक्सलवाद, माओवाद, जेहाद आदि से लगातार जूझ रहा है और पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देश भारतीय भूमि में घुसपैठ करने में कामयाबी प्राप्त कर रहे हैं, भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा में है और मँहगाई आसमान छू रही है।
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