Friday, November 26, 2010

गद्य की विधाएँ - निबन्ध

"निबन्ध" शब्द का मूल है "बन्ध", निबन्ध का अर्थ होता है बाँधना। किसी विषयवस्तु से सम्बन्धित ज्ञान को क्रमबद्ध रूप से बाँधते हुए लेखन को निबन्ध कहा जाता है। बाबू गुलाबराय ने निबन्ध को इस प्रकार से परिभाषित किया है -

एक सीमित आकार के भीतर किसी विषय या वर्णन या प्रतिपादन एक विशेष निजीपन, स्वच्छन्दता, सौष्ठव, सजीवता तथा सम्बद्धता के साथ किया जाना ही निबन्ध कहलाता है।

निबन्ध के निम्न मुख्य भेद होते हैं -

  • विचारात्मक
  • वर्णनात्मक
  • विवराणात्मक
  • भावात्मक
विचारात्मक निबन्ध - जब निबन्ध में किसी विषयवस्तु का तर्कपूर्ण विवेचन, विश्लेषण तथा खोज किया जाए तो उसे विचारात्मक निबन्ध कहा जाता है। विचारात्मक निबन्ध में बुद्धितत्व की प्रधानता होती है और इनमें लेखक के चिन्तन, मनन, अध्ययन, मान्यताओं तथा धारणाओं का प्रभाव स्पष्टतः दिखाई पड़ता है।

वर्णनात्मक निबन्ध - जब किसी निबन्ध में किसी वस्तु, स्थान, व्यक्ति, दृश्य आदि का निरीक्षण के आधार पर रोचक तथा आकर्षक वर्णन किया जाए तो उसे वर्णनात्मक निबन्ध कहा जाता है।

विवरणात्मक निबन्ध - जब किसी निबन्ध में ऐतिहासि तथा सामाजिक घटनाओं, स्थानों, दृश्यों आदि का रोचक तथा आकर्षक विवरण दिया जाए तो उसे विवरणात्मक निबन्ध कहा जाता है।

भावात्मक निबन्ध - जब किसी निबन्ध में हृदय में उत्पन्न होने वाले भावों तथा रागों को दर्शाया जाए तो उसे भावात्मक निबन्ध कहा जाता है। ऐसे निबन्धों की भाषा सरल, मधुर, ललित तथा संगीतमय होती है और ये निबन्ध कवित्वपूर्ण तथा प्रवाहमय प्रतीत होते हैं।

4 टिप्पणियाँ:

M VERMA said...

निबन्ध पर आपका यह निबन्ध बहुत सुन्दर

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

विद्यार्थियों के लिये लाभप्रद..

निर्मला कपिला said...

ग्यानवर्द्धक पोस्ट। धन्यवाद।

प्रवीण पाण्डेय said...

ज्ञानवर्धक पोस्ट।

 
Design by Free WordPress Themes | Bloggerized by Lasantha - Premium Blogger Themes | fantastic sams coupons