Friday, January 21, 2011

ऋग्वेद में प्रकाश की गति का सूत्र (Formula for Speed of Light in Rig Veda)

वेदों में देवताओं की स्तुति हेतु अनेक ऋचाएँ पढ़ने के लिए मिलती हैं। ऋग् वेद में सूर्य की स्तुति के लिए एक ऋचा हैः

तरणिर्विश्वदर्शतो ज्योतिष्कुदसि सूर्य। विश्वमाभासि रोचनम्

इस ऋचा को पढ़कर सायनाचार्य (c.1300's) ने टिप्पणी के रूप में सूर्य की एक और स्तुति लिखी, जो इस प्रकार हैः

तथा च स्मर्यते योजनानां सहस्त्रं द्वे द्वे शते द्वे च योजने एकेन निमिषार्धेन क्रममाण नमोऽस्तुते॥

(सन्दर्भ http://fundamentals.quizblog.in/2010/08/thata-cha-smaryate-yojamam-sahastre-dwe.html)

यहाँ पर "द्वे द्वे शते  द्वे" का अर्थ है "2202" और "एकेन निमिषार्धेन" का अर्थ "आधा निमिष" है। अर्थात सूर्य की स्तुति करते हुए यह कहा गया है कि सूर्य से चलने वाला प्रकाश आधा निमिष में 2202 योजन की यात्रा करता है।

आइए योजन और निमिष को आज प्रचलित इकाइयों में परिवर्तित करके देखें कि क्या परिणाम आता हैः

अब तक किए गए अध्ययन के अनुसार एक योजन 9 मील के तथा एक निमिष 16/75 याने कि 0.213333333333333 सेकंड के बराबर होता है।

2202 योजन = 19818 मील = 31893.979392 कि.मी.

आधा निमष = 0.106666666666666 सेकंड

अर्थात् सूर्य का प्रकाश 0.106666666666666 सेकंड में 19818 मील (31893.979392 कि.मी.) की यात्रा करता है।

याने कि प्रकाश की गति 185793.750000001 मील (299006.056800002) कि.मी. प्रति सेकंड है।

वर्तमान में प्रचलित प्रकाश की गति लगभग 186000 मील (3 x 10^8 मीटर) है जो कि सायनाचार्य के द्वारा बताई गई प्रकाश की गति से लगभग मेल खाती है।

आखिर सायनाचार्य ने ऋग वेद के उस ऋचा को पढ़कर टिप्पणी में प्रकाश की गति दर्शाने वाली सूर्य की स्तुति कैसे लिखी? कहीं ऋग वेद की वह ऋचा कोई कोड तो नहीं है जिसे सायनाचार्य ने डीकोड किया?

8 comments:

ललित शर्मा said...

ॠग्वेदादि भाष्य भूमिका स्वामी दयानंद कृत पढें।
सायणाचार्य को भूल जाएगें।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...


जानकारी के लिए आभार।

ज्‍योतिष,अंकविद्या,हस्‍तरेख,टोना-टोटका।
सांपों को दूध पिलाना पुण्‍य का काम है ?

निर्झर'नीर said...

abhar is jaankari ke liye ..

mahendra verma said...

अद्भुत और रोचक जानकारी।
वेदों में इस प्रकार के अनेक वैज्ञानिक तथ्य हैं। आवश्यकता है उन्हें तलाशने की।
इस उत्तम प्रस्तुति के लिए आपके प्रति आभार।

प्रवीण पाण्डेय said...

अद्भुत और रोचक भी।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

आश्चर्य है..

Rahul Singh said...

सोचना पड़ता है कि यदि यह वास्‍तविक है तो इन मामलों में हम क्‍यों पिछड़े रह गए.

prithvi said...

बहुत ही रोचक जानकारी के लिये सादर आभार
ऐसे हि लिखते रहेँ