महानायक अमिताभ बच्चन के लिए आज भला कौन सा काम ऐसा होगा जो मुश्किल होगा? हो सकता है कि उनके लिए भी कुछ काम मुश्किल वाले हों किन्तु आम लोग तो यही सोचते हैं कि शोहरत और दौलत वाले लोगों के लिए कोई भी काम मुश्किल नहीं होता। अस्तु, आज अमिताभ जी के लिए भले ही कोई काम मुश्किल न हो पर एक समय ऐसा भी था जबकि उनके सामने मुश्किलें ही मुश्किलें थीं। हम सभी जानते हैं कि मुश्किलों को आसान करना सबसे बड़ा मुश्किल काम है पर अमिताभ बच्चन ने दृढ़ संकल्प और पुरुषार्थ का साथ कभी नहीं छोड़ा और मुश्किलें आसान होती चली गईं।
मेरे हिन्दी वेबसाइट के कुछ पाठक कभी-कभी अपनी पसंद की पोस्ट लिखने की फरमाइश भी कर देते हैं। कल ही मेरे एक स्नेही पाठक ने मुझसे चैट में आकर अमिताभ बच्चन पर पोस्ट लिखने के लिए कहा तो मैनें जवाब दिया था कि उनके विषय में तो पहले ही इतना लिखा जा चुका है कि अब मैं क्या लिखूँ? फिर भी कोशिश करूँगा। और उस चैट के परिणाम के रूप में यह पोस्ट आपके सामने है।
सन् 1969 में जब अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म ‘सात हिन्दुस्तानी’ प्रदर्शित हुई थी तो उस समय मेरी उम्र 19 साल की थी और उस जमाने के अन्य तरुणों के समान ही मुझमें भी सिनेमा के प्रति रुझान उन्माद की सीमा तक थी। दोस्तों के साथ हर प्रदर्शित होने वाली फिल्म को देखना उन दिनों एक शान सा लगता था इसलिए यह सुन लेने के बाद भी कि ‘सात हिन्दुस्तानी’ एक फ्लॉप फिल्म है, मैने दोस्तों के साथ रायपुर के श्याम टॉकीज में वह फिल्म देखी। यद्यपि फिल्म मुझे बहुत पसंद आई थी, दोस्तों ने उस फिल्म को नापसंद ही किया क्योंकि, उन दिनों सिनेमा का जादू अपनी चरम पर होने के बावजूद भी, अधिकतर रोमांस और मारधाड़ वाली फिल्में ही पसंद की जाती थीं। ‘सात हिन्दुस्तानी’ ख्वाज़ा अहमद अब्बास की फिल्म थी जिन्होंने कमर्शियल सिनेमा कभी बनाया ही नहीं। सो पत्र-पत्रिकाओं आदि में तो फिल्म की बहुत तारीफ हुई और अमिताभ के अभिनय को भी खूब सराहा गया पर फिल्म को जैसी चलनी थी, चली नहीं या सही माने में कहा जाए तो फिल्म बुरी तरह से पिट गई। अमिताभ बच्चन की आवाज से प्रभावित होकर मृणाल सेन ने उन्हें 1969 में ही प्रदर्शित अपनी फिल्म ‘भुवन सोम’ में‘नरेटर’ (पार्श्व उद्घोषक) का कार्य दिया याने किफिल्म में उनकी आवाज अवश्य थी पर उन्हें परदे पर कहीं दिखाया नहीं गया था। मुझे आज भी याद है कि ‘सात हिन्दुस्तानी’ फिल्म तो थोड़ी बहुत चली भी थी पर ‘भुवन सोम’ बिल्कुल ही नहीं चली थी।
इस प्रकार फिल्म पाने के लिए अमिताभ बच्चन का संघर्ष जारी हो गया। फिल्मी पत्र-पत्रिकाओं में कभी-कभी अमिताभ बच्चन के बारे में भी जानकारी छपती रहती थी। अपनी भी हालत उन दिनों ऐसी थी कि पत्र-पत्रिकाएँ खरीदने के लिए तो दूर, कोर्स की पुस्तकें तक खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे अपने पास, इसलिए पठन के अपने शौक को पूरा करने के लिए प्रत्येक दिन का तीन से चार घण्टे "किशोर पुस्तकालय", जो कि पुस्तकालय के साथ वाचनालय भी था, में बीतते थे। सो पढ़ने को मिलता था कि अमिताभ को फिल्में नहीं मिल रहीं थी, हाँ मॉडलिंग के ऑफर जरूर मिल रहे थे पर मॉडलिंग वे करना नहीं चाहते थे। जलाल आगा की विज्ञापन कम्पनी में, जो विविध भारती के लिए विज्ञापन बनाती थी, वे अपनी आवाज अवश्य दे देते थे ताकि जीवन-यापन के लिए सौ-पचास रुपये मिलते रहें, आखिर सात हिन्दुस्तानी फिल्म के मेहनताने के रूप में मिले पाँच हजार रुपये कब तक चलते?
फिर सुनील दत्त की फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ (1971) में उन्हें काम मिला। उस फिल्म में उन्होंने एक गूँगे का का किरदार अदा किया। विचित्र सा लगता है कि फिल्म भुवन सोम में अमिताभ की आवाज थी तो वे स्वयं नहीं थे और रेशमा और शेरा में अमिताभ थे तो उनकी आवाज नहीं थी। 1971 में ही प्रदर्शित उनकी अन्य फिल्में थीं संजोग, परवाना और आनंद। संजोग चली ही नहीं, परवाना कुछ चली किन्तु उसमें अमिताभ का रोल एंटी हीरो का था, इसलिए फिल्म के चलने का श्रेय हीरो नवीन निश्चल को अधिक मिला, आनन्द खूब चली किन्तु फिल्म का हीरो उन दिनों के सुपर स्टार राजेश खन्ना के होने से अमिताभ बच्चन को फिल्म का फायदा कम ही मिला पर इतना जरूर हुआ कि अमिताभ बच्चन दर्शकों के बीच और भी अधिक स्थापित हो गए।
ऋषि दा ने अपनी फिल्म गुड्डी में भी अतिथि कलाकार बनाया पर इससे अमिताभ को कुछ विशेष फायदा नहीं मिला। फिर उन्हें रवि नगाइच के फिल्म प्यार की कहानी (1971) में मुख्य भूमिका मिली। नायिका तनूजा और सह कलाकार अनिल धवन के होने के बावजूद भी फिल्म चल नहीं पाई और अमिताभ के संघर्ष के दिन जारी ही रहे। उन दिनों अमिताभ बच्चन को जैसा भी रोल मिलता था स्वीकार कर लेते थे।
सन् 1972 में आज के महानायक की फिल्में थीं – बंशी बिरजू, बांबे टू गोवा, एक नजर, जबान, बावर्ची (पार्श्व उद्घोषक) और रास्ते का पत्थर। बी.आर. इशारा की फिल्म एक नजर में उनके साथ हीरोइन जया भादुड़ी थीं। फिल्म के संगीत को बहुत सराहना मिली पर फिल्म फ्लॉप हो गई। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि फिल्म एक नजर के गाने आज भी संगीतप्रेमियों के जुबान पर आते रहते हैं खासकर ‘प्यार को चाहिये क्या एक नजर…….’, ‘पत्ता पत्ता बूटा बूटा…….’, ‘पहले सौ बार इधर और उधर देखा है…….’ आदि। इसी फिल्म से अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी एक दूसरे को चाहने लगे। ये जया भादुड़ी ही थीं जिन्होंने संघर्ष के दिनों में अमिताभ को संभाले रखा।
सन् 1973 में अमिताभ जी की फिल्में बंधे हाथ, गहरी चाल और सौदागर विशेष नहीं चलीं। पर प्रकाश मेहरा की फिल्म जंजीर की अपूर्व सफलता और उनके एंग्री यंगमैन के रोल ने उन्हें विकास के रास्ते पर ला खड़ा किया। फिल्म जंजीर के बाद अमिताभ बच्चन सफलता की राह पर ऐसे बढ़े कि फिर उन्होंने मुड़कर पीछे कभी नहीं देखा।
तो मित्रों जीवन के संघर्ष को अमिताभ जी के जैसे ही दृढ़ संकल्प शक्ति और पुरुषार्थ से ही जीता जा सकता है क्योंकि मुश्किलें होती हैं आसान बड़ी मुश्किल से।
Thursday, October 13, 2011
Tuesday, October 11, 2011
शरद रैन उजियारी - सुधा वृष्टि सुखकारी
रात्रि में शीतलता का सुखद अनुभव तथा दिवस में भगवान भास्कर के किरणों की प्रखरता में ह्रास इस बात का द्योतक है कि पावस के पंक से मुक्ति प्राप्त हुए पर्याप्त समय व्यतीत हो चुका है। सरिता एवं सरोवरों का यौवन, उनके जल के सूखने से, क्षीण होते जा रहा है। असंख्य उड्गनों से युक्त घनविहीन निर्मल नभ सुशोभित होने लगा है। वाटिकाएँ अनेक प्रकार के पुष्पों से सुसज्जित होने लगी हैं तथा मधुकरों के गुंजन से गुंजायमान होने लगी हैं। यद्यपि शीत ऋतु की शुरुवात अभी नहीं हुई है किन्तु प्रातः काल की बेला में पुष्प-पल्लवों एवं तृणपत्रों पर तुषार के कण मोती के सदृश दृष्टिगत होने लगे हैं। तृणों की हरीतिमा पर, पारिजात के पल्लवों पर, कदली के पत्रों पर, चहुँ ओर मोती ही मोती बिखरने लगे हैं। कितने प्यारे लगते हैं पत्तों और बूटों पर बिखरे शबनम के ये कतरे! इन्हें देखकर प्रतीत होने लगता है कि धरा मुक्तामय बन चुकी है! ओस की इन्हीं बूँदों के सौन्दर्य से प्रभावित होकर राष्ट्रकवि श्री मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा है -
है बिखेर देती वसुन्धरा मोती सबके सोने पर
रवि बटोर लेता है उनको सदा सवेरा होने पर
और विरामदायिनी अपनी सन्ध्या को दे जाता है
शून्य-श्याम-तनु जिससे उसका नया रूप छलकाता है!
नवरात्रि पर्व समाप्त हो चुका है। असत्य पर सत्य के विजय के रूप में अहंकारी रावण का पुतला दहन हो चुका है। और हिन्दू पंचांग के हिसाब से आश्विन माह की पूर्णिमा अर्थात् शरद् पूर्णिमा का आगमन हुआ है। शरद् पूर्णिमा को हिन्दू मान्यताओं में विशिष्ट स्थान प्राप्त है क्योंकि इस विशिष्ट पूर्णिमा की रात्रि में चन्द्रमा का संयोग, समस्त नक्षत्रों में प्रथम नक्षत्र, अश्वनी नक्षत्र से होता है। अश्वनी नक्षत्र के स्वामी आरोग्यदाता अश्वनीकुमार हैं। शरद् पूर्णिमा को भारत में एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। महिलाएँ इस दिन कौमुदी व्रत, जिसे कि कोजागर व्रत के नाम से भी जाना जाता है, धारण करती हैं।

शरद पूर्णिमा को गुरु-शिष्य परम्परा का भी एक विशिष्ट दिन माना जाता है तथा इस रोज शिष्य अपने गुरु से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि राधा ने कृष्ण को शरद पूर्णिमा से ही नृत्य की शिक्षा देना प्रारम्भ किया था, तभी तो "चन्द्रप्रभा" लिखते हैं -
जमुना पुलिन निकट वंशीवट
शरद रैन उजियारी हरि को नचन सिखावैं राधा प्यारी।
शरद पूर्णिमा की रात को रास की रात भी कहा जाता है क्योंकि श्री कृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात्रि को रासलीला रचाया था।
पौराणिक मान्ताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात्रि को चन्द्रमा अपनी समस्त सोलह कलाओं से युक्त होता है और इस रात्रि में चन्द्र की शुभ्र ज्योत्सना शीतलता के साथ सुधा की वृष्टि करती है, इसीलिए शायद चन्द्रमा का एक नाम 'सुधाकर' भी है। चन्द्रमा के अन्य नाम हैं - चन्द्र, शशि, शशी, शशांक, सुधांशु, शुभ्रांशु, हिमांशु, निशापति, कलानिधि, इन्दु और सोम। हिन्दू मन्दिरों में शरद पूर्णिमा की अर्धरात्रि को देवी-देवताओं के पूजन के पश्चात् पायस (खीर) का प्रसाद वितरण किया जाता है। शरद पूर्णिमा की सन्ध्या में लोग अपने अपने घरों में खीर बनाकर उसे ऐसे स्थान में रखते हैं जहाँ पर उस पर चन्द्रमा की किरणें पड़ती रहें ताकि वह खीर अमृतमय हो जाए। अर्धरात्रि में उस अमृतमय खीर का सेवन किया जाता है।
आप सभी को शरद् पूर्णिमा की शुभकामनाएँ देते हुए मैं कामना करता हूँ कि इस शरद ऋतु के साथ ही साथ यह पूरा वर्ष आपके लिए मंगलमय हो!
है बिखेर देती वसुन्धरा मोती सबके सोने पर
रवि बटोर लेता है उनको सदा सवेरा होने पर
और विरामदायिनी अपनी सन्ध्या को दे जाता है
शून्य-श्याम-तनु जिससे उसका नया रूप छलकाता है!
नवरात्रि पर्व समाप्त हो चुका है। असत्य पर सत्य के विजय के रूप में अहंकारी रावण का पुतला दहन हो चुका है। और हिन्दू पंचांग के हिसाब से आश्विन माह की पूर्णिमा अर्थात् शरद् पूर्णिमा का आगमन हुआ है। शरद् पूर्णिमा को हिन्दू मान्यताओं में विशिष्ट स्थान प्राप्त है क्योंकि इस विशिष्ट पूर्णिमा की रात्रि में चन्द्रमा का संयोग, समस्त नक्षत्रों में प्रथम नक्षत्र, अश्वनी नक्षत्र से होता है। अश्वनी नक्षत्र के स्वामी आरोग्यदाता अश्वनीकुमार हैं। शरद् पूर्णिमा को भारत में एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। महिलाएँ इस दिन कौमुदी व्रत, जिसे कि कोजागर व्रत के नाम से भी जाना जाता है, धारण करती हैं।

(चित्र देशीकमेंट.कॉम से साभार)
शरद पूर्णिमा को गुरु-शिष्य परम्परा का भी एक विशिष्ट दिन माना जाता है तथा इस रोज शिष्य अपने गुरु से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि राधा ने कृष्ण को शरद पूर्णिमा से ही नृत्य की शिक्षा देना प्रारम्भ किया था, तभी तो "चन्द्रप्रभा" लिखते हैं -
जमुना पुलिन निकट वंशीवट
शरद रैन उजियारी हरि को नचन सिखावैं राधा प्यारी।
शरद पूर्णिमा की रात को रास की रात भी कहा जाता है क्योंकि श्री कृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात्रि को रासलीला रचाया था।
पौराणिक मान्ताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात्रि को चन्द्रमा अपनी समस्त सोलह कलाओं से युक्त होता है और इस रात्रि में चन्द्र की शुभ्र ज्योत्सना शीतलता के साथ सुधा की वृष्टि करती है, इसीलिए शायद चन्द्रमा का एक नाम 'सुधाकर' भी है। चन्द्रमा के अन्य नाम हैं - चन्द्र, शशि, शशी, शशांक, सुधांशु, शुभ्रांशु, हिमांशु, निशापति, कलानिधि, इन्दु और सोम। हिन्दू मन्दिरों में शरद पूर्णिमा की अर्धरात्रि को देवी-देवताओं के पूजन के पश्चात् पायस (खीर) का प्रसाद वितरण किया जाता है। शरद पूर्णिमा की सन्ध्या में लोग अपने अपने घरों में खीर बनाकर उसे ऐसे स्थान में रखते हैं जहाँ पर उस पर चन्द्रमा की किरणें पड़ती रहें ताकि वह खीर अमृतमय हो जाए। अर्धरात्रि में उस अमृतमय खीर का सेवन किया जाता है।
आप सभी को शरद् पूर्णिमा की शुभकामनाएँ देते हुए मैं कामना करता हूँ कि इस शरद ऋतु के साथ ही साथ यह पूरा वर्ष आपके लिए मंगलमय हो!
Friday, October 7, 2011
भारतीय फिल्मों में गीतों का चलन
बिरला ही कोई व्यक्ति होगा जो फिल्मी गीतों का दीवाना न हो। भारतीय फिल्मों के गीत न केवल भारत में अपितु संसार भर के देशों में भी लोकप्रिय होते रहे हैं। एक जमाना था जब रूस में तो राज कपूर की फिल्मों के गीतों की तूती बोलती थी, रशियन लोग हिन्दी गाने गुनगुना कर खुश होते थे। फिल्मी गीतों पर आधारित रेडियो प्रोग्राम बिनाका गीतमाला ने कई दशकों तक रेडियो श्रोताओं को सम्मोहित कर के रखा था। रेडियो सीलोन, विविध भारती, आल इण्डिया रेडियो आदि का अस्तित्व ही फिल्मी गीतों से था।
भारत में सिनेमा के आने के पहले नाटक और नौटंकियों का चलन था। उस जमाने में बहुत सी नौटंकी कम्पनियाँ हुआ करती थीं जो कि पूरे भारत में अपना ताम-झाम लेकर घूम-घूम कर नाटक-नौटंकी दिखाया करती थीं, भारत में जगह-जगह लगने वाले मेलों में तो इन नौटंकी कम्पनियों की धूम हुआ करती थी। फिल्म "तीसरी कसम" की नायिका तो ऐसी ही एक नौटंकी कम्पनी की हीरोइन ही थी तथा फिल्म "गीत गाता चल" में भी नौटंकी कम्पनियों का बहुत अच्छा सन्दर्भ है। इन नाटकों तथा नौटंकियों में संवाद के साथ गीत गाने का भी चलन था, वास्तव में लोग नाच-गाना देखने के लिए ही नौटंकियों में जाया करते थे। बाद में सिनेमा का चलन हो जाने पर शनैः-शनैः नौटंकी कम्पनियाँ समाप्त हो गईं तथा सिनेमा को ही नाटक-नौटंकियों का एक नया रूप माना जाने लगा। यही कारण है कि फिल्मों में गानों का रिवाज चल निकला।
सिनेमा के प्रारम्भिक दिनों में फिल्म में काम सिर्फ उन्हीं कलाकारों को काम मिलता था जिन्हें गायन तथा संगीत का बी ज्ञान हो क्योंकि उन्हें अपना गाना खुद ही गाना पड़ता था। फिर सन् 1935 में न्यू थियेटर ने अपनी फिल्म "धूप छाँव" में प्लेबैक गायन का सिस्टम शुरू किया और इस नये सिस्टम ने भारतीय फिल्म संगीत के स्वरूप को ही पूरी तरह से बदल डाला। प्रभात पिक्चर्स ने केशवराव भोले को, जिन्हें कि पश्चिमी ऑर्केस्ट्रा का पर्याप्त अनुभव था, गानों में पियानो, हवायन गिटार और वायलिन जैसे पाश्चात्य वाद्ययंत्रों के प्रयोग के लिए नियुक्त किया जिसके परिणामस्वरूप शान्ता आप्टे, जिसके ऊपर फिल्म "दुनिया ना माने" (1937) में एक पूर्ण अंग्रेजी गाना फिल्माया गया, प्रभात पिक्चर्स की अग्रणी कलाकार बन गईं। सन् 1939 में व्ही. शान्तारम ने फिल्म "आदमी" में एक बहुभाषी गाना रखा। प्लेबैक सिस्टम का प्रयोग शुरू हो जाने पर ऐसे गायकों को भी फिल्मों में गाने का मौका मिलने लगा जिन्हें अभिनय में रुचि नहीं थी। पारुल घोष, अमीरबाई कर्नाटकी, जोहराबाई अम्बालावाली, राजकुमारी, अरुण कुमार आदि शरू-शुरू के प्लेबैक सिंगर थे।
के.एल. सहगल, पंकज मलिक, के.सी. डे आदि के समय में गाने सिर्फ शास्त्रीय संगीत के आधार पर बनाये जाते थे और उनमें बहुत कम वाद्य यन्त्रों का प्रयोग किया जाता था किन्तु प्लेबैक सिस्टम आने के बाद गानों में लोक-संगीत तथा पाश्चात्य संगीत का भी पुट आने लगा। भारत के अनेक क्षेत्रों में अनेक प्रकार के लोक-संगीत होने का बहुत बड़ा फायदा फिल्म संगीत को मिलने लगा। फिल्मी गीतों की धुनों में बंगाली, पंजाबी आदि लोक-संगीतों का प्रयोग करके गानों को मधुरतर से मधुरतम रूप दिया जाने लगा और लोग उन धुनों पर थिरकने लगे। लोगों में उन दिनों फिल्मी गानों के प्रति उन्माद का कैसा आलम था इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सन् 1925 में बनी फिल्म इन्द्रसभा में 71 गाने थे।
कालान्तर में नौशाद, सी. रामचंद्र, चित्रगुप्त, हेमंत कुमार, रोशन, एस.डी. बर्मन, खय्याम, जयदेव, सलिल चौधरी, मदन मोहन, शंकर जयकिशन, ओ.पी. नैयर, कल्याणजी आनंदजी, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, आर.डी. बर्मन जैसे तीव्र कल्पनाशील संगीतकारों और मोहम्मद रफ़ी, मुकेश, किशोर कुमार, महेन्द्र कपूर, लता मंगेशकर, सुमन कल्याणपुर, आशा भोंसले जैसे प्रतिभावान गायक गायिकाओं के संगम से फिल्म संगीत दिन-प्रतिदिन निखरता ही चला गया।
सन् 1950 से 1975-80 तक भारतीय फिल्म संगीत का स्वर्णकाल रहा। फिर उसके बाद मैलोडियस संगीत ह्रास के दिन आने लगे, फिल्मी गानों में मैलोडी के स्थान पर हारमोनी बढ़ने लग गई और फिल्म संगीत का एक नया रूप आया जिसका चलन अभी भी है।
भारत में सिनेमा के आने के पहले नाटक और नौटंकियों का चलन था। उस जमाने में बहुत सी नौटंकी कम्पनियाँ हुआ करती थीं जो कि पूरे भारत में अपना ताम-झाम लेकर घूम-घूम कर नाटक-नौटंकी दिखाया करती थीं, भारत में जगह-जगह लगने वाले मेलों में तो इन नौटंकी कम्पनियों की धूम हुआ करती थी। फिल्म "तीसरी कसम" की नायिका तो ऐसी ही एक नौटंकी कम्पनी की हीरोइन ही थी तथा फिल्म "गीत गाता चल" में भी नौटंकी कम्पनियों का बहुत अच्छा सन्दर्भ है। इन नाटकों तथा नौटंकियों में संवाद के साथ गीत गाने का भी चलन था, वास्तव में लोग नाच-गाना देखने के लिए ही नौटंकियों में जाया करते थे। बाद में सिनेमा का चलन हो जाने पर शनैः-शनैः नौटंकी कम्पनियाँ समाप्त हो गईं तथा सिनेमा को ही नाटक-नौटंकियों का एक नया रूप माना जाने लगा। यही कारण है कि फिल्मों में गानों का रिवाज चल निकला।
सिनेमा के प्रारम्भिक दिनों में फिल्म में काम सिर्फ उन्हीं कलाकारों को काम मिलता था जिन्हें गायन तथा संगीत का बी ज्ञान हो क्योंकि उन्हें अपना गाना खुद ही गाना पड़ता था। फिर सन् 1935 में न्यू थियेटर ने अपनी फिल्म "धूप छाँव" में प्लेबैक गायन का सिस्टम शुरू किया और इस नये सिस्टम ने भारतीय फिल्म संगीत के स्वरूप को ही पूरी तरह से बदल डाला। प्रभात पिक्चर्स ने केशवराव भोले को, जिन्हें कि पश्चिमी ऑर्केस्ट्रा का पर्याप्त अनुभव था, गानों में पियानो, हवायन गिटार और वायलिन जैसे पाश्चात्य वाद्ययंत्रों के प्रयोग के लिए नियुक्त किया जिसके परिणामस्वरूप शान्ता आप्टे, जिसके ऊपर फिल्म "दुनिया ना माने" (1937) में एक पूर्ण अंग्रेजी गाना फिल्माया गया, प्रभात पिक्चर्स की अग्रणी कलाकार बन गईं। सन् 1939 में व्ही. शान्तारम ने फिल्म "आदमी" में एक बहुभाषी गाना रखा। प्लेबैक सिस्टम का प्रयोग शुरू हो जाने पर ऐसे गायकों को भी फिल्मों में गाने का मौका मिलने लगा जिन्हें अभिनय में रुचि नहीं थी। पारुल घोष, अमीरबाई कर्नाटकी, जोहराबाई अम्बालावाली, राजकुमारी, अरुण कुमार आदि शरू-शुरू के प्लेबैक सिंगर थे।
के.एल. सहगल, पंकज मलिक, के.सी. डे आदि के समय में गाने सिर्फ शास्त्रीय संगीत के आधार पर बनाये जाते थे और उनमें बहुत कम वाद्य यन्त्रों का प्रयोग किया जाता था किन्तु प्लेबैक सिस्टम आने के बाद गानों में लोक-संगीत तथा पाश्चात्य संगीत का भी पुट आने लगा। भारत के अनेक क्षेत्रों में अनेक प्रकार के लोक-संगीत होने का बहुत बड़ा फायदा फिल्म संगीत को मिलने लगा। फिल्मी गीतों की धुनों में बंगाली, पंजाबी आदि लोक-संगीतों का प्रयोग करके गानों को मधुरतर से मधुरतम रूप दिया जाने लगा और लोग उन धुनों पर थिरकने लगे। लोगों में उन दिनों फिल्मी गानों के प्रति उन्माद का कैसा आलम था इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सन् 1925 में बनी फिल्म इन्द्रसभा में 71 गाने थे।
कालान्तर में नौशाद, सी. रामचंद्र, चित्रगुप्त, हेमंत कुमार, रोशन, एस.डी. बर्मन, खय्याम, जयदेव, सलिल चौधरी, मदन मोहन, शंकर जयकिशन, ओ.पी. नैयर, कल्याणजी आनंदजी, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, आर.डी. बर्मन जैसे तीव्र कल्पनाशील संगीतकारों और मोहम्मद रफ़ी, मुकेश, किशोर कुमार, महेन्द्र कपूर, लता मंगेशकर, सुमन कल्याणपुर, आशा भोंसले जैसे प्रतिभावान गायक गायिकाओं के संगम से फिल्म संगीत दिन-प्रतिदिन निखरता ही चला गया।
सन् 1950 से 1975-80 तक भारतीय फिल्म संगीत का स्वर्णकाल रहा। फिर उसके बाद मैलोडियस संगीत ह्रास के दिन आने लगे, फिल्मी गानों में मैलोडी के स्थान पर हारमोनी बढ़ने लग गई और फिल्म संगीत का एक नया रूप आया जिसका चलन अभी भी है।
Saturday, October 1, 2011
हिन्दी की प्यारी बहन उर्दू
जब भारत की अनेक भाषाओं की बात चले तो उर्दू को भुला देना बहुत मुश्किल होता है। देखा जाए तो हिन्दी और उर्दू ऐसी दो ऐसी बहनें हैं जो एक-दूसरे के बिना रह ही नहीं सकतीं। रोजमर्रा की बोलचाल वाली हमारी हिन्दी में सैकड़ों ऐसे शब्दों का प्रयोग होता है जो कि उर्दू के हैं और हिन्दी ने उसे अपना लिया है - जैसे कि हम "विशेष रूप से" कहने के स्थान पर प्रायः "खास तौर पर" का इस्तेमाल (अब यहीं देखिए कि मैंने "प्रयोग" जैसे हिन्दी शब्द के स्थान पर "इस्तेमाल" जैसा उर्दू शब्द टाइप कर डाला) करते हैं। हमें कभी भी नहीं लगता कि "खास" (विशेष), "तौर" (रूप या प्रकार), "शख्स" (व्यक्ति) "सुबह" (प्रातः), "आरजू" (अभिलाषा), "रिश्ता" (सम्बन्ध) इत्यादि शब्द हिन्दी के न होकर उर्दू के हैं, उल्टे हमें ये सारे शब्द हिन्दी के ही लगते हैं। इसी प्रकार से उर्दू के विद्वान भी सैकड़ों हिन्दी शब्दों को अपनी उर्दू रचना में शामिल कर लेते हैं। बिना एक दूसरे के शब्दों को अपनाए हिन्दी और उर्दू में से किसी भी एक का काम चल ही नहीं सकता। हिन्दी के सुविख्यात साहित्यकार प्रेमचंद जी की रचनाओं में न केवल उर्दू शब्दों के भरमार मिलते हैं बल्कि उन्होंने अपनी कृतियों को उर्दू लिपि में ही लिखा था।
यह भी सही है कि आम लोगों के बीच हिन्दी के चलन में आने बहुत पहले ही से उर्दू का चलन था। यही कारण है कि हिन्दी के आरम्भिक दिनों की रचनाओं में उर्दू शब्दों की बहुतायत पाई जाती है। देवकीनन्दन खत्री जी, जिन्होंने अपने जमाने में हिन्दी को सबसे अधिक पाठक दिए, जानते थे कि उन दिनों उर्दू का चलन हिन्दी की अपेक्षा बहुत ज्यादा है इसीलिए उन्होंने अपने उपन्यास "चन्द्रकान्ता" के आरम्भ में ढेर सारे उर्दू शब्दों का प्रयोग किया और "चन्द्रकान्ता सन्तति" के अन्त तक पहुँचते-पहुँचते शनैः-शनैः उनका प्रयोग कम करते हुए हिन्दी के अधिक से अधिक शब्दों का प्रयोग किया है।
उर्दू वास्तव में तुर्की का एक शब्द है जिसका अर्थ होता है "पराया" या "खानाबदोश"। हिन्दी की तरह ही उर्दू का जन्म भारत में हुआ है और यह भाषा कैसे बनी यह जानना भी बहुत रोचक है। मुगल शासनकाल में उनकी सैनिक छावनी में फारसी, अरबी, हिन्दी तथा हिन्दी की विभिन्न उपभाषाओं के जानने वाले सैनिक एक साथ रहा करते थे जिन्होंने आपस की बोलचाल के लिए एक नई भाषा विकसित कर ली जो कि उर्दू कहलाई। यही कारण है कि उर्दू को लोग अक्सर खेमे की या छावनी की भाषा कहा करते थे। अमीर खुसरो, मीर तक़ी मीर, मिर्जा ग़ालिब, फैज़ अहमद फैज़ जैसे विद्वानों को यह भाषा भा गई और उन्होंने इसका साहित्यिक रूप विकसित करना शुरू कर के इस एक प्रकार से कविता की भाषा बना दिया। ब्रिटिश शासन के आने पर इसने राज्य भाषा का दर्जा भी पा लिया। भारत-पाक विभाजन के समय भारत छोड़कर पाकिस्तान जाने वालों के साथ यह भाषा पाकिस्तान चली गई और वहाँ की मुख्य भाषा बन गई।
उर्दू भाषा की एक अलग प्रकार की अपनी मिठास है जो कि मुंशी प्रेमचंद, ख़्वाज़ा अहमद अब्बास, सआदत हसन मंटो, कृष्ण चन्दर, इस्मत चुग़ताई, बलवन्त सिंह जैसे अनेकों रचनाकारों को लुभाती रही। भारत में सवाक् सिनेमा के आने पर हिन्दुस्तानी भाषा अर्थात् उर्दू मिश्रित हिन्दी के रूप में यह फिल्मों में छा गई और आम जनता इससे अच्छी तरह से वाक़िफ़ होने लगी। आज भी भारत में उर्दू के कद्रदानों की संख्या बहुत अधिक है क्योंकि उर्दू खालिस तौर पर एक हिन्दुस्तानी ज़ुबान है।
यह भी सही है कि आम लोगों के बीच हिन्दी के चलन में आने बहुत पहले ही से उर्दू का चलन था। यही कारण है कि हिन्दी के आरम्भिक दिनों की रचनाओं में उर्दू शब्दों की बहुतायत पाई जाती है। देवकीनन्दन खत्री जी, जिन्होंने अपने जमाने में हिन्दी को सबसे अधिक पाठक दिए, जानते थे कि उन दिनों उर्दू का चलन हिन्दी की अपेक्षा बहुत ज्यादा है इसीलिए उन्होंने अपने उपन्यास "चन्द्रकान्ता" के आरम्भ में ढेर सारे उर्दू शब्दों का प्रयोग किया और "चन्द्रकान्ता सन्तति" के अन्त तक पहुँचते-पहुँचते शनैः-शनैः उनका प्रयोग कम करते हुए हिन्दी के अधिक से अधिक शब्दों का प्रयोग किया है।
उर्दू वास्तव में तुर्की का एक शब्द है जिसका अर्थ होता है "पराया" या "खानाबदोश"। हिन्दी की तरह ही उर्दू का जन्म भारत में हुआ है और यह भाषा कैसे बनी यह जानना भी बहुत रोचक है। मुगल शासनकाल में उनकी सैनिक छावनी में फारसी, अरबी, हिन्दी तथा हिन्दी की विभिन्न उपभाषाओं के जानने वाले सैनिक एक साथ रहा करते थे जिन्होंने आपस की बोलचाल के लिए एक नई भाषा विकसित कर ली जो कि उर्दू कहलाई। यही कारण है कि उर्दू को लोग अक्सर खेमे की या छावनी की भाषा कहा करते थे। अमीर खुसरो, मीर तक़ी मीर, मिर्जा ग़ालिब, फैज़ अहमद फैज़ जैसे विद्वानों को यह भाषा भा गई और उन्होंने इसका साहित्यिक रूप विकसित करना शुरू कर के इस एक प्रकार से कविता की भाषा बना दिया। ब्रिटिश शासन के आने पर इसने राज्य भाषा का दर्जा भी पा लिया। भारत-पाक विभाजन के समय भारत छोड़कर पाकिस्तान जाने वालों के साथ यह भाषा पाकिस्तान चली गई और वहाँ की मुख्य भाषा बन गई।
उर्दू भाषा की एक अलग प्रकार की अपनी मिठास है जो कि मुंशी प्रेमचंद, ख़्वाज़ा अहमद अब्बास, सआदत हसन मंटो, कृष्ण चन्दर, इस्मत चुग़ताई, बलवन्त सिंह जैसे अनेकों रचनाकारों को लुभाती रही। भारत में सवाक् सिनेमा के आने पर हिन्दुस्तानी भाषा अर्थात् उर्दू मिश्रित हिन्दी के रूप में यह फिल्मों में छा गई और आम जनता इससे अच्छी तरह से वाक़िफ़ होने लगी। आज भी भारत में उर्दू के कद्रदानों की संख्या बहुत अधिक है क्योंकि उर्दू खालिस तौर पर एक हिन्दुस्तानी ज़ुबान है।
Thursday, September 29, 2011
लता मंगेषकर की 82वें जन्मदिन पर उनके द्वारा पचास से अस्सी दशक तक गाये सुमधुर गीतों की सूची
मेलोडियस फिल्मी गीतों की बात हो और लता मंगेषकर का नाम न आए ऐसा हो ही नहीं सकता। जी हाँ, वही लता मंगेषकर जिन्होंने कल अपना वाँ जन्म दिन मनाया है। हमारी शुभकामानाएँ हैं कि भारतीय फिल्म संगीत के क्षेत्र की स्वर कोकिला लता मंगेषकर जी दीर्घजीवी हों। लता मंगेषकर जी के कण्ठ-माधुर्य के विषय में कुछ बताना सूरज को दिया दिखाना ही है। यह उनकी मधुर कण्ठ स्वर का ही कमाल है कि पाकिस्तानी कहा करते थे कि भारत हमें लता मंगेषकर दे दे और कश्मीर ले ले।
तो प्रस्तुत है लता मंगेषकर के द्वारा पचास से अस्सी दशक तक गाये सुमधुर गीतों की सूची जिनमें उनके द्वारा गाये गए सोलो, डुएड और कोरस गीत सम्मिलित हैं।
फिल्मी गीतों की विस्तृत सूची के लिए देखें - सुमधुर संगीत
मेरा नया ब्लॉग - संक्षिप्त महाभारत
तो प्रस्तुत है लता मंगेषकर के द्वारा पचास से अस्सी दशक तक गाये सुमधुर गीतों की सूची जिनमें उनके द्वारा गाये गए सोलो, डुएड और कोरस गीत सम्मिलित हैं।
| गीत के बोल | गायक/गायिका | संगीत निर्देशक | गीतकार | फिल्म | प्रदर्शन वर्ष | |
| चले जाना नहीं नैन मिलाके | लता मंगेषकर | हुस्नलाल भगतराम | राजेन्द्र कृशन | बड़ी बहन | 1950 | |
| छुप छुप खड़े हो | लता मंगेषकर, प्रेमलता | हुस्नलाल भगतराम | कमर जलालाबादी | बड़ी बहन | 1950 | |
| गोरे गोरे ओ बाँके छोरे | लता मंगेषकर | सी.रामचन्द्र | राजेन्द्र कृशन | समाधि | 1950 | |
| जो दिल में खुशी बन कर आये | लता मंगेषकर | हुस्नलाल भगतराम | राजेन्द्र कृशन | बड़ी बहन | 1950 | |
| महफिल में जल उठी शमा | लता मंगेषकर | सी.रामचन्द्र | प्यारेलाल संतोषी | निराला | 1950 | |
| आ जाओ तड़पते हैं अरमां | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जायपुरी | आवारा | 1951 | |
| बचपन के दिन भुला न देना | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | दीदार | 1951 | |
| भोली सूरत दिल के खोटे | चीतलकर, लता मंगेषकर | सी.रामचन्द्र | राजेन्द्र कृशन | अलबेला | 1951 | |
| दम भर जो उधर मुँह फेरे | लता मंगेषकर, मुकेश | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | आवारा | 1951 | |
| धीरे से आजा री अँखियन में | लता मंगेषकर | सी.रामचन्द्र | राजेन्द्र कृशन | अलबेला | 1951 | |
| इक बेवफा से प्यार किया | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जायपुरी | आवारा | 1951 | |
| घर आया मेरा परदेसी | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | आवारा | 1951 | |
| जबसे बलम घर आये | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जायपुरी | आवारा | 1951 | |
| ले जा मेरी दुआयें ले जा | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | दीदार | 1951 | |
| शाम ढले खिड़की तले | चीतलकर, लता मंगेषकर | सी.रामचन्द्र | राजेन्द्र कृशन | अलबेला | 1951 | |
| शोला जो भड़के दिल मेरा धड़के | चीतलकर, लता मंगेषकर | सी.रामचन्द्र | राजेन्द्र कृशन | अलबेला | 1951 | |
| तेरे बिना आग ये चांदनी तू आ जा | लता मंगेषकर, मन्ना डे | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | आवारा | 1951 | |
| ठंडी हवायें लहरा के आयें | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | साहिर लुधियानवी | नौजवान | 1951 | |
| तुम न जाने किस जहाँ में | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | साहिर लुधियानवी | सजा | 1951 | |
| ऐ मेरे दिल कहीं और चल | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | दाग | 1952 | |
| बचपन के मुहब्बत को | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | बैजू बावरा | 1952 | |
| चांदनी रातें प्यार की बातें | हेमन्त कुमार, लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | साहिर लुधियानवी | जाल | 1952 | |
| न मिलता गम तो बरबादी के | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | अमर | 1952 | |
| ये रात ये चांदनी फिर कहाँ | हेमन्त कुमार, लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | साहिर लुधियानवी | जाल | 1952 | |
| अकेली मत जइयो राधे जमुना के पार | मोहम्मद रफी, लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | बैजू बावरा | 1953 | |
| बचपन के मुहब्बत को | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | बैजू बावरा | 1953 | |
| झूले में पवन के आई बहार | मोहम्मद रफी, लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | बैजू बावरा | 1953 | |
| किसी ने अपना बना के मुझको | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | पतिता | 1953 | |
| मोहे भूल गये साँवरिया | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | बैजू बावरा | 1953 | |
| मुहब्बत ऐसी धड़कन है | लता मंगेषकर | सी. रामचन्द्र | हसरत जयपुरी | अनारकली | 1953 | |
| मेरे किस्मत के खरीदार अब तो आ जा | लता मंगेषकर | सी. रामचन्द्र | शैलेन्द्र | अनारकली | 1953 | |
| आ जा री आ निंदिया तू आ | लता मंगेषकर | सलिल चौधरी | शैलेन्द्र | दो बीघा जमीन | 1953 | |
| आ जा रे अब मेरा दिल पुकारा | लता मंगेषकर, मुकेश | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | आह | 1953 | |
| बचपन के मुहब्बत को | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | बैजू बावरा | 1953 | |
| दूर कोई गाये | लता मंगेषकर, मोहाम्मद रफी, शमशाद बेगम | नौशाद | शकील बदाँयूनी | बैजू बावरा | 1953 | |
| दुआ कर गमे दिल खुदा से दुआ कर | लता मंगेषकर | सी. रामचन्द्र | शैलेन्द्र | अनारकली | 1953 | |
| झूले में पवन के आई बहार | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफ़ी | नौशाद | शकील बदाँयूनी | बैजू बावरा | 1953 | |
| किसी ने अपना बना के मुझको | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | पतिता | 1953 | |
| मिट्टी से खेलते हो बार बार किसलिये | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | पतिता | 1953 | |
| मोहे भूल गये साँवरिया | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | बैजू बावरा | 1953 | |
| मुहब्बत ऐसी धड़कन है | लता मंगेषकर | सी. रामचन्द्र | हसरत जयपुरी | अनारकली | 1953 | |
| राजा की आयेगी बारात | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | आह | 1953 | |
| तू गंगा की मौज मैं जमुना का धारा | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफ़ी | नौशाद | शकील बदाँयूनी | बैजू बावरा | 1953 | |
| याद किया दिल ने कहाँ हो तुम | हेमन्त कुमार, लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | पतिता | 1953 | |
| ये शाम की तनहाइयाँ ऐसे में तेरा गम | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | आह | 1953 | |
| ये जिंदगी उसी की है जो किसी का हो गया | लता मंगेषकर | सी. रामचन्द्र | राजेन्द्र कृशन | अनाकली | 1953 | |
| जिंदगी प्यार की दो चार घड़ी होती है | हेमन्त कुमार, लता मंगेषकर | सी. रामचन्द्र | राजेन्द्र कृशन | अनाकली | 1953 | |
| आ नील गगन तले प्यार हम करें | हेमन्त कुमार, लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | बादशाह | 1954 | |
| देखो वो चांद छुपके | हेमन्त कुमार, लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | एस.एच. बिहारी | शर्त | 1954 | |
| दिल जले तो जले | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | साहिर लुधियानवी | टैक्सी ड्राइव्हर | 1954 | |
| जादूगर सैंया छोड़ो मोरी बैंया | लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | राजेन्द्र कृशन | नागिन | 1954 | |
| जायें तो जायें कहाँ | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | साहिर लुधियानवी | टैक्सी ड्राइव्हर | 1954 | |
| मन डोले मेरा तन डोले | लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | राजेन्द्र कृशन | नागिन | 1954 | |
| मेरा बदली में छुप गया चांद रे | लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | राजेन्द्र कृशन | नागिन | 1954 | |
| मेरा दिल ये पुकारे आजा | लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | राजेन्द्र कृशन | नागिन | 1954 | |
| ऊँची ऊँची दुनिया की दीवारें | लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | राजेन्द्र कृशन | नागिन | 1954 | |
| सुन रसिया मन बसिया | लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | राजेन्द्र कृशन | नागिन | 1954 | |
| सुन री सखी मोहे सजना बुलाये | लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | राजेन्द्र कृशन | नागिन | 1954 | |
| तेरी याद में जल कर देख लिया | लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | राजेन्द्र कृशन | नागिन | 1954 | |
| अपलम चपलम | लता मंगेषकर, उषा खन्ना | सी. रामचन्द्र | राजेन्द्र कृशन | आजाद | 1955 | |
| भुला नहीं देना | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | नौशाद | कुमार बाराबंकवी | बारादरी | 1955 | |
| फैली हुई है सपनों की बाहें | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | साहिर लुधियानवी | हाउस नं. 44 | 1955 | |
| इचक दाना बीचक दाना | लता मंगेषकर, मुकेश | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | श्री 420 | 1955 | |
| जा री जा री ओ कारी बदरिया | लता मंगेषकर | सी. रामचन्द्र | राजेन्द्र कृशन | आजाद | 1955 | |
| जीवन के सफर में राही | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | साहिर लुधियानवी | मुनीमजी | 1955 | |
| कितना हसीं है मौसम | चीतलकर, लता मंगेषकर | सी रामचन्द्र | राजेन्द्र कृशन | आजाद | 1955 | |
| मेरा सलाम ले जा | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | उड़न खटोला | 1955 | |
| मोरे सैंया जी उतरेंगे पार | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | उड़न खटोला | 1955 | |
| मुझपे इल्जामे बेवफाई है | लता मंगेषकर | सी रामचन्द्र | जां निसार अख्तर | यास्मीन | 1955 | |
| राधा ना बोले ना बोले ना बोले रे | लता मंगेषकर | सी रामचन्द्र | राजेन्द्र कृशन | आजाद | 1955 | |
| ओ जाने वाले मुड़ के जरा | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | श्री 420 | 1955 | |
| प्यार हुआ इकरार हुआ है | लता मंगेषकर, मन्ना डे | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | श्री 420 | 1955 | |
| रमैया वस्ता वैया | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी, मुकेश | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | श्री 420 | 1955 | |
| सुनो छोटी सी गुड़िया की लम्बी कहानी | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | सीमा | 1955 | |
| आ जा के इंतजार में | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | हलाकू | 1956 | |
| आ जा सनम मधुर चांदनी में हम | लता मंगेषकर, मन्ना डे | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | चोरी चोरी | 1956 | |
| दिल का न करना ऐतबार कोई | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | हलाकू | 1956 | |
| गुजरा हुआ जमाना आता नहीं दुबारा | लता मंगेषकर | एस.एस. मोहिन्दर | तनवीर नक़वी | शीरी फरहाद | 1956 | |
| उस पार साजन इस पार सारे | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | चोरी चोरी | 1956 | |
| जा रे जा बालमवा | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | बसंत बहार | 1956 | |
| जागो मोहन प्यारे | लता मंगेषकर | सलिल चौधरी | शैलन्द्र | जागते रहो | 1956 | |
| जहाँ मैं जाती हूँ वहीं चले आते हो | लता मंगेषकर, मन्ना डे | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | चोरी चोरी | 1956 | |
| नैन मिले चैन कहाँ | लता मंगेषकर, मन्ना डे | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | बसंत बहार | 1956 | |
| पंछी बनूँ उड़ती फिरूं मस्त गगन में | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | चोरी चोरी | 1956 | |
| रसिक बलमा | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | चोरी चोरी | 1956 | |
| ये रात भीगी भीगी | लता मंगेषकर, मन्ना डे | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | चोरी चोरी | 1956 | |
| ये वादा करो चांद के सामने | लता मंगेषकर, मुकेश | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | राजहठ | 1956 | |
| आ लौट के आजा मेरे मीत | लता मंगेषकर | एस एन त्रिपाठी | भरत व्यास | रानी रूपमती | 1957 | |
| ऐ मालिक तेरे बंदे हम | लता मंगेषकर | वसंत देसाई | भरत व्यास | दो आँखें बारह हाथ | 1957 | |
| बोल री कठपुतली डोरी | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | कठपुतली | 1957 | |
| वृन्दावन का कृशन कन्हैया | लता मंगेषकर मोहम्मद रफी | हेमन्त कुमार | राजेन्द्र कृशन | मिस मेरी | 1957 | |
| चांद फिर निकला | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | मजरूह सुल्तानपुरी | पेइंग गेस्ट | 1957 | |
| छुप गया कोई रे दूर से पुकार के | लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | राजेन्द्र कृशन | चम्पाकली | 1957 | |
| दुनिया में हम आये हैं तो | लता मंगेषकर, मीना मंगेषकर, उषा मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मदर इंडिया | 1957 | |
| घूंघट नहीं खोलूंगी सैंया तोरे आगे | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मदर इंडिया | 1957 | |
| होली आई रे कन्हाई | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी, शमशाद बेगम | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मदर इंडिया | 1957 | |
| जीवन की बीना का तार बोले | लता मंगेषकर | एस एन त्रिपाठी | भरत व्यास | रानी रूपमती | 1957 | |
| झूमे रेऽऽ नीला अम्बर झूमे | लता मंगेषकर, तलत महमूद | सलिल चौधरी | शैलेन्द्र | एक गाँव की कहानी | 1957 | |
| मतवाला जिया डोले पिया | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मदर इंडिया | 1957 | |
| मेरी वीणा तुम बिन रोये | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | देख कबीरा रोया | 1957 | |
| नाच रे मयूर झनझना के घुंघरू | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | कठपुतली | 1957 | |
| नगरी नगरी द्वारे द्वारे | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मदर इंडिया | 1957 | |
| ओ जानेवालों जाओ न घर अपना छोड़ के | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मदर इंडिया | 1957 | |
| ओ मेरे लाल आ जा | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मदर इंडिया | 1957 | |
| ओ रात के मुसाफिर | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | हेमन्त कुमार | राजेन्द्र कृशन | मिस मेरी | 1957 | |
| फिर वही शाम वही गम | तलत महमूद, लता मंगेषकर | सी रामचंद्र | राजेन्द्र कृशन | बारिश | 1957 | |
| सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया | लता मंगेषकर | रवि | प्रेम धवन | एक साल | 1957 | |
| तारों की जुबाँ पर है | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | सी रामचन्द्र | परवेज शम्सी | नौशेरवान-ए-आदिल | 1957 | |
| तू प्यार करे या ठुकराये | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | देख कबीरा रोया | 1957 | |
| ये मर्द बड़े दिल सर्द | लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | राजेन्द्र कृशन | मिस मेरी | 1957 | |
| जरा सामने तो आओ छलिये | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | एस एन त्रिपाठी | भरत व्यास | जनम जनम के फेरे | 1957 | |
| आ जा रे परदेसी | लता मंगेषकर | सलिल चौधरी | शैलेन्द्र | मधुमती | 1958 | |
| चाहे पास हो चाहे दूर हो | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | कल्याणजी आनन्दजी | भरत व्यास | सम्राट चन्द्रगुप्त | 1958 | |
| दिल का खिलौना हाये टूट गया | लता मंगेषकर | वसंत देसाई | भरत व्यास | गूंज उठी शहनाई | 1958 | |
| दिल की दुनिया बसाके सँवरिया | लता मंगेषकर | सी रामचन्द्र | राजेन्द्र कृशन | अमरदीप | 1958 | |
| दिल तड़प तड़प के कह रहा है | लता मंगेषकर, मुकेश | सलिल चौधरी | शैलेन्द्र | मधुमती | 1958 | |
| घड़ी घड़ी मोरा दिल धड़के | लता मंगेषकर | सलिल चौधरी | शैलेन्द्र | मधुमती | 1958 | |
| हम प्यार में जलने वालों को | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | जेलर | 1958 | |
| जाना था हमसे दूर | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | अदालत | 1958 | |
| जीवन में पिया तेरा साथ रहे | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | वसंत देसाई | भरत व्यास | गूंज उठी शहनाई | 1958 | |
| मस्ती भरा है समां | लता मंगेषकर, मन्ना डे | दत्ताराम | हसरत जयपुरी | परवरिश | 1958 | |
| मेरे मन का बावरा पंछी | लता मंगेषकर | सी रामचन्द्र | राजेन्द्र कृशन | अमरदीप | 1958 | |
| नींद ना मुझको आये | हेमन्त कुमार, लता मंगेषकर | कल्याणजी आनन्दजी | प्यारेलाल संतोषी | पोस्ट बाक्स 999 | 1958 | |
| सारी सारी रात तेरी याद सताये | लता मंगेषकर | रोशन | फार्रुख कैसर | अजी बस शुक्रिया | 1958 | |
| तेरे सुर और मेरे गीत | लता मंगेषकर | वसंत देसाई | भरत व्यास | गूंज उठी शहनाई | 1958 | |
| उनको ये शिकायत है | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | अदालत | 1958 | |
| यूँ हसरतों के दाग | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | अदालत | 1958 | |
| बन के पंछी गाये प्यार का तराना | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | अनाड़ी | 1959 | |
| भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | छोटी बहन | 1959 | |
| धीरे धीरे चल ऐ चांद गगन में | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | लव मेरेज | 1959 | |
| दिल का खिलौना हाये टूट गया | लता मंगेषकर | वसंत देसाई | भरत व्यास | गूंज उठी शहनाई | 1959 | |
| दिल की नजर से | लता मंगेषकर, मुकेश | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | अनाड़ी | 1959 | |
| दुनियावालों से दूर | लता मंगेषकर, मुकेश | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | उजाला | 1959 | |
| झूमता मौसम मस्त महीना | लता मंगेषकर, मन्ना डे | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | उजाला | 1959 | |
| कहे झूम झूम रात ये सुहानी | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | लव मेरेज | 1959 | |
| कोई रंगीला सपनों में आके | लता मंगेषकर, मन्ना डे | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | उजाला | 1959 | |
| लागी छूटे ना अब तो सनम | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | चित्रगुप्त | मजरूह सुल्तानपुरी | काली टोपी लाल रूमाल | 1959 | |
| मैं रंगीला प्यार का राही | लता मंगेषकर, सबीर सेन | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | छोटी बहन | 1959 | |
| तेरा जाना दिल के अरमानों का लुट जाना | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | अनाड़ी | 1959 | |
| तेरे प्यार का आसरा चाहता हूँ | लता मंगेषकर, महेन्द्र कपूर | एन दत्ता | साहिर लुधियानवी | धूल का फूल | 1959 | |
| तुम्हें याद होगा कभी हम मिले थे | हेमन्त कुमार | कल्याणजी आनन्दजी | गुलशन बावरा | सट्टा बाजार | 1959 | |
| वो चांद खिला | लता मंगेषकर, मुकेश | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | अनाड़ी | 1959 | |
| आ अब लौट चलें | लता मंगेषकर, मुकेश | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | जिस देश में गंगा बहती है | 1960 | |
| आँखों में रंग क्यों आया | लता मंगेषकर, मुकेश | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | एक फूल चार काँटे | 1960 | |
| आहा रिमझिम के ये प्यारे प्यारे गीत लिये | लता मंगेषकर, तलत महमूद | सलिल चौधरी | शैलेन्द्र | उसने कहा था | 1960 | |
| अजीब दास्तां है ये | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | दिल अपना और प्रीत पराई | 1960 | |
| बदले बदले मेरे सरकार नजर आते हैं | लता मंगेषकर | रवि | शकील बदाँयूनी | चौदहवीं का चांद | 1960 | |
| बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम रे | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | एक फूल चार काँटे | 1960 | |
| बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना | लता मंगेषकर, मुकेश | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | जिस देश में गंगा बहती है | 1960 | |
| बेकस पे करम कीजिये | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मुगल-ए-आजम | 1960 | |
| दिल अपना और प्रीत पराई | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | दिल अपना और प्रीत पराई | 1960 | |
| दो सितारों का जमीं पर है मिलन | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | नौशाद | शकील बदाँयूनी | कोहिनूर | 1960 | |
| है आग हमारे सीने में | गीता दत्त, लता मंगेषकर, महेन्द्र कपूर, मुकेश | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | जिस देश में गंगा बहती है | 1960 | |
| जाने कैसे सपनों में खो गईं अँखियाँ | लता मंगेषकर | रवि शंकर | शैलेन्द्र | अनुराधा | 1960 | |
| जारे बदरा बैरी जा | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | बहाना | 1960 | |
| जब रात है ऐसी मतवाली | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मुगल-ए-आजम | 1960 | |
| कैसे दिन बीत कैसी बीती रतियाँ | लता मंगेषकर | रवि शंकर | शैलेन्द्र | अनुराधा | 1960 | |
| मचलती आरजू खड़ी बाहें पसारे | लता मंगेषकर | सलिल चौधरी | शैलेन्द्र | उसने कहा था | 1960 | |
| मेरा दिल अब तेरा ओ साजना | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | दिल अपना और प्रीत पराई | 1960 | |
| मेरी जान कुछ भी कीजिये | लता मंगेषकर, मुकेश | कल्याणजी आनन्दजी | कमर जलालाबादी | छलिया | 1960 | |
| मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोये | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मुगल-ए-आजम | 1960 | |
| ओ बसंती पवन पागल | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | जिस देश में गंगा बहती है | 1960 | |
| ओ सजना बरखा बहार आई | लता मंगेषकर | सलिल चौधरी | शैलेन्द्र | परख | 1960 | |
| प्यार किया तो डरना क्या | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मुगल-ए-आजम | 1960 | |
| तन रंग लो जी आज मन रंग लो | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | नौशाद | शकील बदाँयूनी | कोहिनूर | 1960 | |
| तेरी महफिल में किस्मत आजामा कर हम भी देखेंगे | लता मंगेषकर, शमशाद बेगम | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मुगल-ए-आजम | 1960 | |
| तेरी राहों में खड़े हैं दिल थाम के | लता मंगेषकर | कल्याणजी आनन्दजी | कमर जलालाबादी | छलिया | 1960 | |
| ये दिल की लगी कम क्या होगी | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मुगल-ए-आजम | 1960 | |
| ये वादा करें चांद के सामने | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | कल्याणजी आनन्दजी | के एल परदेसी | दिल भी तेरा हम भी तेरे | 1960 | |
| जिंदगी भर नहीं भूलेगी ओ बरसात की रात | लता मंगेषकर | रोशन | साहिर लुधियानवी | बरसात की रात | 1960 | |
| अल्ला तेरो नाम ईश्वर तेरो नाम | लता मंगेषकर | जयदेव | साहिर लुधियानवी | हम दोनों | 1961 | |
| बदली से निकला है चांद | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | संजोग | 1961 | |
| भूली हुई यादें मुझे इतना ना सताओ | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | संजोग | 1961 | |
| दिल मेरा एक आस का पंछी | लता मंगेषकर, सुबीर सेन | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | आस का पंछी | 1961 | |
| दो हंसों का जोड़ा बिछड़ गयो रे | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | गंगा जमना | 1961 | |
| इक मंजिल राही दो | लता मंगेषकर, मुकेश | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | संजोग | 1961 | |
| घर आजा घिर आये बदरा साँवरिया | लता मंगेषकर | राहुल देव बर्मन | शैलेन्द्र | छोटे नवाब | 1961 | |
| इतना ना मुझसे तू प्यार बढ़ा | लता मंगेषकर, तलत महमूद | सलिल चौधरी | राजेन्द्र कृशन | छाया | 1961 | |
| जा रे, जा रे उड़ जा रे पंछी | लता मंगेषकर | सलिल चौधरी | मजरूह सुल्तानपुरी | माया | 1961 | |
| जीत ही लेंगे बाजी हम तुम | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | खैयाम | कैफी आजमी | शोला और शबनम | 1961 | |
| जिया हो जिया कुछ बोल दो | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | जब प्यार किसी से होता है | 1961 | |
| ज्योति कलश छलके | लता मंगेषकर | सुधीर फड़के | पं. नरेन्द्र शर्मा | भाभी की चूड़ियाँ | 1961 | |
| सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार था | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | जब प्यार किसी से होता है | 1961 | |
| तस्वीर तेरी दिल में जिस दिन से उतारी है | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | सलिल चौधरी | मजरूह सुल्तानपुरी | माया | 1961 | |
| वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गई | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | संजोग | 1961 | |
| आज छेड़ो मुब्बत की शहनाइयाँ | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | सन आफ इंडिया | 1962 | |
| आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल हमें | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजा मेहंदी अली खां | अनपढ़ | 1962 | |
| आपने याद दिलाया तो मुझे याद आया | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | रोशन | मजरूह सुल्तानपुरी | आरती | 1962 | |
| आवाज दे के हमें तुम बुलाओ | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | प्रोफेसर | 1962 | |
| बोल मेरी तकदीर में क्या है | लता मंगेषकर, मुकेश | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | हरियाली और रास्ता | 1962 | |
| दिल तोड़ने वाले तुझे दिल ढूँढ रहा है | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | नौशाद | शकील बदाँयूनी | सन आफ इंडिया | 1962 | |
| एहसान तेरा होगा मुझ पर | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | जंगली | 1962 | |
| है इसी में प्यार की आबरू | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजा मेहंदी अली खां | अनपढ़ | 1962 | |
| कभी तो मिलेगी कहीं तो मिलेगी | लता मंगेषकर | रोशन | मजरूह सुल्तानपुरी | आरती | 1962 | |
| कहीं दीप जले कहीं दिल | लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | कैफी आजमी | बीस साल बाद | 1962 | |
| मैं चली मैं चली | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | प्रफेसर | 1962 | |
| मैं तो तुम संग नैन मिला के | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | मनमौजी | 1962 | |
| मुझे कितना प्यार है तुमसे | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | दिल तेरा दीवाना | 1962 | |
| तेरा मेरा प्यार अमर | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | असली नकली | 1962 | |
| तुझे जीवन की डोर से बांध लिया है | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | असली नकली | 1962 | |
| देखो रूठा ना करो | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | सचिन देव बर्मन | हसरत जयपुरी | तेरे घर के सामने | 1963 | |
| एक घर बनाउँगा तेरे घर के सामने | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | सचिन देव बर्मन | हसरत जयपुरी | तेरे घर के सामने | 1963 | |
| हम तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठे | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | दिल एक मंदिर | 1963 | |
| हँसता हुआ नूरानी चेहरा | कमल बारोट, लता मंगेषकर | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | फारुख कैसर | पारसमणि | 1963 | |
| जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | रोशन | साहिर लुधियानवी | ताजमहल | 1963 | |
| मेरे महबूब तुझे मेरी मुहब्बत की कसम | लता मंगेषकर | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मेरे महबूब | 1963 | |
| उइ माँ उइ माँ ये क्या हो गया | लता मंगेषकर | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | फारुख कैसर | पारसमणि | 1963 | |
| पाँव छू लेने दो फूलों को इनायत होगी | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | रोशन | साहिर लुधियानवी | ताजमहल | 1963 | |
| पंख होती तो उड़ आती रे | लता मंगेषकर | रामलाल | हसरत जयपुरी | सेहरा | 1963 | |
| रात भी है कुछ भीगी भीगी | लता मंगेषकर | जयदेव | साहिर लुधियानवी | मुझे जीने दो | 1963 | |
| रुक जा रात ठहर जा रे चंदा | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | दिल एक मन्दिर | 1963 | |
| तकदीर का फसाना | लता मंगेषकर | रामलाल | हसरत जयपुरी | सेहरा | 1963 | |
| वो दिल कहाँ से लाउँ तेरी याद जो भुला दे | लता मंगेषकर | रवि | राजेन्द्र कृशन | भरोसा | 1963 | |
| वो जब याद आये बहुत याद आये | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | फारुख कैसर | पारसमणि | 1963 | |
| याद में तेरी जाग जाग के हम | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | नौशाद | शकील बदाँयूनी | मेरे महबूब | 1963 | |
| अगर मुझसे मुहब्बत है | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजा मेहंदी अली खां | आप की परछाइयाँ | 1964 | |
| इक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताजमहल | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | नौशाद | शकील बदाँयूनी | लीडर | 1964 | |
| हमने तुझको प्यार किया है जितना | लता मंगेषकर | कल्याणजी आनन्दजी | इन्दीवर | दुल्हा दुल्हन | 1964 | |
| हर दिल जो प्यार करेगा | लता मंगेषकर, महेन्द्र कपूर, मुकेश | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | संगम | 1964 | |
| जय जय हे जगदम्बे माता | लता मंगेषकर | चित्रगुप्त | मजरूह सुल्तानपुरी | गंगा की लहरें | 1964 | |
| झूम झूम ढलती रात | लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | कैफी आजमी | कोहरा | 1964 | |
| जो हमने दास्तां अपनी सुनाई | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजा मेहंदी अली खां | वह कौन थी | 1964 | |
| मेरी आँखों से कोई नींद लिये जाता है | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | पूजा के फूल | 1964 | |
| नगमा-ओ-शेर की सौगात किसे पेश करूँ | लता मंगेषकर | मदन मोहन | साहिर लुधियानवी | गजल | 1964 | |
| नैना बरसे रिमझिम रिमझिम | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजा मेहंदी अली खां | वह कौन थी | 1964 | |
| ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम | लता मंगेषकर, मुकेश | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | संगम | 1964 | |
| आज फिर जीने की तमन्ना है | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | शैलेन्द्र | गाइड | 1965 | |
| अजी रूठ कर अब कहाँ जाइयेगा | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | आरजू | 1965 | |
| बेदर्दी बालमा तुझको मेरा मन याद करता है | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | आरजू | 1965 | |
| दिल जो न कह सका | लता मंगेषकर | रोशन | साहिर लुधियानवी | भीगी रात | 1965 | |
| गाता रहे मेरा दिल | किशोर कुमार, लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | शैलेन्द्र | गाइड | 1965 | |
| गुमनाम है कोई | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | गुमनाम | 1965 | |
| काँटों से खींच के ये आँचल | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | शैलेन्द्र | गाइड | 1965 | |
| परदेसियों से ना अँखियाँ मिलाना | लता मंगेषकर | कल्याणजी आनन्दजी | आनन्द बख्शी | जब जब फूल खिले | 1965 | |
| तुम्हीं मेरे मन्दिर तुम्हीं मेरी पूजा | लता मंगेषकर | रवि | राजेन्द्र कृशन | खानदान | 1965 | |
| ये समां समां है ये प्यार का | लता मंगेषकर | कल्याणजी आनन्दजी | आनन्द बख्शी | जब जब फूल खिले | 1965 | |
| छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा | हेमन्त कुमार, लता मंगेषकर | रोशन | मजरूह सुल्तानपुरी | ममता | 1966 | |
| दुनिया में ऐसा कहाँ सबका नसीब है | लता मंगेषकर | रोशन | आनन्द बख्शी | देवर | 1966 | |
| नैनों में बदरा छाये | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजा मेहंदी अली खां | मेरा साया | 1966 | |
| ओ मेरे शाहेखुबा | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | लव्ह इन टोक्यो | 1966 | |
| रहें ना रहें हम | लता मंगेषकर | रोशन | मजरूह सुल्तानपुरी | ममता | 1966 | |
| रहते थे कभी जिनके दिल में | लता मंगेषकर | रोशन | मजरूह सुल्तानपुरी | ममता | 1966 | |
| तू जहाँ जहाँ चलेगा | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजा मेहंदी अली खां | मेरा साया | 1966 | |
| दिल की गिरह खोल दो | लता मंगेषकर, मन्ना डे | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | रात और दिन | 1967 | |
| दुनिया करे सवाल | लता मंगेषकर | रोशन | साहिर लुधियानवी | बहू बेगम | 1967 | |
| हम तुम युग युग से ये गीत मिलन के | लता मंगेषकर, मुकेश | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | आनन्द बख्शी | मिलन | 1967 | |
| होठों पे ऐसी बात | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | मजरूह सुल्तानपुरी | ज्वेल थीफ | 1967 | |
| कभी रात दिन हम दूर थे | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | कल्याणजी आनन्दजी | आनन्द बख्शी | आमने सामने | 1967 | |
| रात और दिन दिया जले | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | शैलेन्द्र | रात और दिन | 1967 | |
| सावन का महीना पवन करे सोर | लता मंगेषकर, मुकेश | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | आनन्द बख्शी | मिलन | 1967 | |
| चन्दन सा बदन | लता मंगेषकर | कल्याणजी आनन्दजी | इंदीवर | सरस्वतीचन्द्र | 1968 | |
| हमने देखी है इन आँखों की महकती खुशबू | लता मंगेषकर | हेमन्त कुमार | गुलजार | खामोशी | 1968 | |
| मैं तो भूल चली बाबुल का देश | लता मंगेषकर | कल्याणजी आनन्दजी | इंदीवर | सरस्वतीचन्द्र | 1968 | |
| ना तुम बेवफा हो ना हम बेवफा हैं | लता मंगेषकर | मदन मोहन | राजेन्द्र कृशन | एक कली मुसकाई | 1968 | |
| फूल तुम्हें भेजा है खत में | लता मंगेषकर, मुकेश | कल्याणजी आनन्दजी | इंदीवर | सरस्वतीचन्द्र | 1968 | |
| ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | साहिर लुधियानवी | इज्जत | 1968 | |
| गर तुम भुला ना दोगे | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | यकीन | 1969 | |
| किसी राह में किसी मोड़ पर | लता मंगेषकर, मुकेश | कल्याणजी आनन्दजी | आनन्द बख्शी | मेरे हमसफर | 1969 | |
| कोरा कागज था ये मन मेरा | किशोर कुमार, लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | आनन्द बख्शी | आराधना | 1969 | |
| मेरा परदेसी ना आया | लता मंगेषकर | कल्याणजी आनन्दजी | आनन्द बख्शी | मेरे हमसफर | 1969 | |
| अच्छा तो हम चलते हैं | किशोर कुमार, लता मंगेषकर | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | आनंद बख्शी | आन मिलो सजना | 1970 | |
| बिंदिया चमकेगी चूड़ी खनकेगी | लता मंगेषकर | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | आनंद बख्शी | दो रास्ते | 1970 | |
| हम थे जिनके सहारे | लता मंगेषकर | कल्याणजी आनन्दजी | इन्दीवर | सफर | 1970 | |
| झिलमिल सितारों का आँगन होगा | लता मंगेषकर | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | आनंद बख्शी | जीवन मृत्यु | 1970 | |
| आजा तुझको पुकारे मेरे गीत रे | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | कल्याणजी आनन्दजी | आनंद बख्शी | गीत | 1970 | |
| मिलो ना तुम तो हम घबरायें | लता मंगेषकर | मदन मोहन | कैफी आजमी | हीर रांझा | 1970 | |
| ना कोई उमंग है | लता मंगेषकर | राहुल देव बर्मन | आनंद बख्शी | कटी पतंग | 1970 | |
| रंगीला रे तेरे रंग में | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | नीरज | प्रेम पुजारी | 1970 | |
| तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे | लता मंगेषकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी | पगला कहीं का | 1970 | |
| यूँ ही तुम मुझसे बात करती हो | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | कल्याणजी आनन्दजी | इन्दीवर | सच्चा झूठा | 1970 | |
| चलो दिलदार चलो | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | गुलाम मोहम्मद | कैफ भोपाली | पाकीजा | 1971 | |
| चलते चलते यूँ ही कोई मिल गया था | लता मंगेषकर | गुलाम मोहम्मद | कैफी आजमी | पाकीजा | 1971 | |
| इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा | लता मंगेषकर | गुलाम मोहम्मद | मजरूह सुल्तानपुरी | पाकीजा | 1971 | |
| इस जमाने में इस मुहब्बत ने | लता मंगेषकर | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | आनंद बख्शी | महबूब की मेंहदी | 1971 | |
| खिलते हैं गुल यहाँ | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | नीरज | शर्मीली | 1971 | |
| मुझे तेरी मुहब्बत का साहारा मिल गया होता | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | आनंद बख्शी | आप आये बहार आई | 1971 | |
| रैना बीति जाये | लता मंगेषकर | राहुल देव बर्मन | आनंद बख्शी | अमर प्रेम | 1971 | |
| ढाढ़े रहियो ओ बाँके यार | लता मंगेषकर | गुलाम मोहम्मद | मजरूह सुल्तानपुरी | पाकीजा | 1971 | |
| बीती ना बिताई रैना | लता मंगेषकर, भूपेन्द्र | राहुल देव बर्मन | गुलजार | परिचय | 1972 | |
| एक प्यार का नगमा है | लता मंगेषकर, मुकेश | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | संतोष आनन्द | शोर | 1972 | |
| गुम है किसी के प्यार में | किशोर कुमार,लता मंगेषकर | राहुल देव बर्मन | मजरूह सुल्तानपुरी | रामपुर का लक्ष्मण | 1972 | |
| पत्ता पत्ता बूटा बूटा | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | मजरूह सुल्तानपुरी | एक नजर | 1972 | |
| अब तो है तुमसे हर खुशी अपनी | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | मजरूह सुल्तानपुरी | अभिमान | 1973 | |
| अँखियों को रहने दे | लता मंगेषकर | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | आनंद बख्शी | बाबी | 1973 | |
| बनाके क्यूं बिगाड़ा रे | लता मंगेषकर | कल्याणजी आनन्दजी | गुलशन बावरा | जंजीर | 1973 | |
| दीवाने हैं दीवानों को ना घर चाहिये | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | कल्याणजी आनन्दजी | गुलशन बावरा | जंजीर | 1973 | |
| हम तुम एक कमरे में बंद हों | लता मंगेषकर, शैलन्द्र सिंग | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | आनंद बख्शी | बाबी | 1973 | |
| झूठ बोले कौवा काटे | लता मंगेषकर, शैलन्द्र सिंग | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | आनंद बख्शी | बाबी | 1973 | |
| लूटे कोई मन का नगर | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | मजरूह सुल्तानपुरी | अभिमान | 1973 | |
| ना मांगूँ सोना चांदी | लता मंगेषकर, शैलन्द्र सिंग | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | आनंद बख्शी | बाबी | 1973 | |
| पिया बिना पिया बिना | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | मजरूह सुल्तानपुरी | अभिमान | 1973 | |
| तेरा मेरा साथ रहे | लता मंगेषकर | रवीन्द्र जैन | रवीन्द्र जैन | सौदागर | 1973 | |
| तेरे मेरे मिलन की ये रैना | किशोर कुमार, लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | मजरूह सुल्तानपुरी | अभिमान | 1973 | |
| तेरी बिंदिया रे | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | सचिन देव बर्मन | मजरूह सुल्तानपुरी | अभिमान | 1973 | |
| ये दिल और उनकी निगाहों के साये | लता मंगेषकर | जयदेव | पद्मा सचदेव | प्रेम पर्वत | 1973 | |
| एक डाल पर तोता बोले | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | रवीन्द्र जैन | रवीन्द्र जैन | चोर मचाये शोर | 1974 | |
| कहीं करती होगी वो मेरा इंतिजार | लता मंगेषकर, मुकेश | राहुल देव बर्मन | मजरूह सुल्तानपुरी | फिर कब मिलोगी | 1974 | |
| करवटें बदलते रहे | किशोर कुमार, लता मंगेषकर | राहुल देव बर्मन | आनंद बख्शी | आप की कसम | 1974 | |
| रजनीगंधा फूल तुम्हारे | लता मंगेषकर | सलिल चौधरी | योगेश | रजनीगंधा | 1974 | |
| वादा कर ले साजना | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | कल्याणजी आनन्दजी | गुलशन बावरा | हाथ की सफाई | 1974 | |
| अब के सजन सावन में | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | आनंद बख्शी | चुपके चुपके | 1975 | |
| भूल गया सब कुछ याद नहीं अब कुछ | किशोर कुमार, लता मंगेषकर | राजेश रोशन | आनंद बख्शी | जूली | 1975 | |
| चुपके चुपके चल री पुरवैया | लता मंगेषकर | सचिन देव बर्मन | आनंद बख्शी | चुपके चुपके | 1975 | |
| मेरे नैना सावन भादों | लता मंगेषकर | राहुल देव बर्मन | आनंद बख्शी | महबूबा | 1976 | |
| दिल तो है दिल | लता मंगेषकर | कल्याणजी आनन्दजी | प्रकाश मेहरा | मुकद्दर का सिकन्दर | 1978 | |
| सत्यं शिवं सुन्दरम | लता मंगेषकर | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | नरेन्द्र शर्मा | सत्यं शिवं सुन्दरम | 1978 | |
| यशोमति मैया से | लता मंगेषकर, मन्ना डे | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | नरेन्द्र शर्मा | सत्यं शिवं सुन्दरम | 1978 | |
| शीशा हो या दिल हो | लता मंगेषकर | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | कैफी आजमी | आशा | 1980 | |
| मुझे छू रही हैं तेरी गर्म साँसे | लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी | राजेश रोशन | गुलजार | स्वयंवर | 1980 | |
| हम बने तुम बने इक दूजे के लिये | लता मंगेषकर, एस पी बालसुब्रमणियम | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | आनन्द बख्शी | एक दूजे के लिये | 1981 | |
| जिंदगी की ना टूटे लड़ी | लता मंगेषकर, नितिन मुकेश | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | सन्तोष आनन्द | क्रान्ति | 1981 | |
| तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बन्धन अन्जाना | लता मंगेषकर, एस पी बालसुब्रमणियम | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | आनन्द बख्शी | एक दूजे के लिये | 1981 | |
| देखो मैंने देखा है ये इक सपना | अमित कुमार, लता मंगेषकर | राहुल देव बर्मन | आनन्द बख्शी | लव्ह स्टोरी | 1981 | |
| देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुये | किशोर कुमार, लता मंगेषकर | शिव हरि | जावेद अख्तर | सिलसिला | 1981 | |
| तुझ संग प्रीत लगाई सजना | किशोर कुमार, लता मंगेषकर | राजेश रोशन | इन्दीवर | कामचोर | 1982 | |
| दिखाई दिये यूँ | लता मंगेषकर | खय्याम | मीर तकी मीर | बाजार | 1982 | |
| मेरी किस्मत में तू नहीं शायद | लता मंगेषकर, सुरेश वाडकर | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | सन्तोष आनन्द | प्रेम रोग | 1983 | |
| ये गलियाँ ये चौबारा | लता मंगेषकर | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | सन्तोष आनन्द | प्रेम रोग | 1983 | |
| ऐ दिले नादां | लता मंगेषकर | खय्याम | जां निसार अख्तर | रजिया सुल्तान | 1983 | |
| मुहब्बत है क्या चीज हमको बताओ | लता मंगेषकर, सुरेश वाडकर | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | सन्तोष आनन्द | प्रेम रोग | 1983 | |
| तुझसे नाराज नहीं जिंदगी | लता मंगेषकर | राहुल देव बर्मन | गुलजार | मासूम | 1983 | |
| भँवरे ने खिलाया फूल | लता मंगेषकर, सुरेश वाडकर | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | सन्तोष आनन्द | प्रेम रोग | 1983 | |
| जब हम जवां होंगे | लता मंगेषकर | राहुल देव बर्मन | आनन्द बख्शी | बेताब | 1983 | |
| जिंदगी प्यार का गीत है | लता मंगेषकर | उषा खन्ना | सावन कुमार | सौतन | 1983 | |
| हमें और जीने की चाहत ना होती | लता मंगेषकर | राहुल देव बर्मन | गुलशन बावरा | अगर तुम ना होते | 1983 | |
| सागर किनारे दिल ये पुकारे | किशोर कुमार, लता मंगेषकर | राहुल देव बर्मन | जावेद अख्तर | सागर | 1985 | |
| दुश्मन ना करे दोस्त ने वो काम किया है | लता मंगेषकर | राजेश रोशन | इन्दीवर | आखिर क्यूँ | 1985 | |
| तुमसे मिल कर ना जाने क्यूँ | लता मंगेषकर, शब्बीर कुमार | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | एस एच बिहारी | प्यार झुकता नहीं | 1985 | |
| मैं तेरी दुश्मन दुश्मन तू मेरा | लता मंगेषकर | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | आनन्द बख्शी | नगीना | 1986 | |
| मन क्यूं बहका रे बहका आधी रात को | आशा भोंसले, लता मंगेषकर | लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल | वसन्त देव | उत्सव | 1986 | |
| दिल दीवाना बिन सजना के माने ना | लता मंगेषकर | राम लक्ष्मण | असद भोपाली | मैने प्यार किया | 1989 | |
| कबूतर जा जा जा | लता मंगेषकर, एस पी बालसुब्रमणियम | राम लक्ष्मण | असद भोपाली | मैने प्यार किया | 1989 | |
| मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियाँ हैं | लता मंगेषकर | शिव हरि | आनन्द बख्शी | चांदनी | 1989 |
फिल्मी गीतों की विस्तृत सूची के लिए देखें - सुमधुर संगीत
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