मुझको ब्लोगर बना दीजिये
मेरी रचना पढ़ा दीजिये
अच्छा लिखूँ मैं या ना लिखूँ
टिप्पणी तो करा दीजिये
लोकली मैं छपूँ ना छपूँ
नेट पर तो छपा दीजिये
पोस्ट चोरी का है ये मेरा
मत किसी को बता दीजिये
मूल गज़ल
लज़्ज़त-ए-गम बढ़ा दीजिये
आप यूँ मुस्कुरा दीजिये
कीमत-ए-दिल बता दीजिये
खाक लेकर उड़ा दीजिये
चांद कब तक गहन में रहे
आप ज़ुल्फें हटा दीजिये
मेरा दामन अभी साफ है
कोई तोहमद लगा दीजिये
आप अंधेरे में कब तक रहें
फिर कोई घर जला दीजिये
एक समुन्दर ने आवाज दी
मुझको पानी पिला दीजिये
मूल गजल सुनें:
Friday, May 9, 2008
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5 टिप्पणियाँ:
:):):):)bahut hi khubsurat nakal,assli aur nakli dono badhiya.
kyA baat hai, kya likhe hain..
kabhi apni baat bhi to kaha kijiye..
naaraz mat hoyiyega.. just kidding.. :D
बहुत बढ़िया भाई आनंद आ गया धन्यवाद
असली से नकली की तुकबंदी अच्छी है
हा हा!! बहुत बढ़िया बन गई यह तो. ये लो भाई टिप्पणी. :)
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आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं, इस निवेदन के साथ कि नये लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें-यही हिन्दी चिट्ठाजगत की सच्ची सेवा है.
एक नया हिन्दी चिट्ठा किसी नये व्यक्ति से भी शुरु करवायें और हिन्दी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें.
यह एक अभियान है. इस संदेश को अधिकाधिक प्रसार देकर आप भी इस अभियान का हिस्सा बनें.
शुभकामनाऐं.
समीर लाल
(उड़न तश्तरी)
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