Friday, January 15, 2010

मेरे पोस्ट मात्र चौबीस घंटे ही प्रभावशाली रहते हैं

मैंने अनुभव किया है कि मेरे पोस्टों का प्रभाव मात्र चौबीस घंटे तक ही रहते हैं। प्रायः चौबीस घंटे तक ही उन्हें पढ़ा जाता है और उसके बाद वे न जाने अन्धकार के किस गर्त में खो जाते हैं। लगता है कि संकलकों के आगे वाले पृष्ठों में रहने तक ही उनका प्रभाव रहता है, ज्यों-ज्यों वे संकलक के पीछे की पृष्ठों में जाते जाते हैं त्यों-त्यों उनका प्रभाव कम होते जाता है। याने कि जिन्दा तो रहते हैं वे पोस्ट पर कोमा की स्थिति में।

बहुत ही क्षोभ होता है मुझे अपने आप पर। सोचने लगता हूँ कि मैं क्यों कुछ ऐसा नहीं लिख पाता जो हमेशा हमेशा के लिये लोगों के आकर्षण का केन्द्र बन जायें, लोग खोज-खोज कर उन्हें पढ़ने आयें।

इस सत्य को जानने के बाद भी लाचार हूँ मैं। आत्मतुष्टि के लिये बेशर्मी के साथ हर रोज एक वैसा ही पोस्ट फिर कर दिया करता हूँ जिनका प्रभाव मात्र चौबीस घंटे तक ही रहे।
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