Thursday, February 11, 2010

ये ब्लोगिंग है इस ब्लोगिंग का यही है यही है यही है रंग रूप

"नमस्कार लिख्खाड़ानन्द जी!"

"नमस्काऽर! आइये आइये टिप्पण्यानन्द जी!"

"लिख्खाड़ानन्द जी बड़े चालाक हैं आप! उस दिन आपने हमें ब्लोगिंग फॉर्मूले बताये जरूर थे पर पोस्ट हिट कराने के जो असली टॉप फार्मूले हैं उनको गोल कर गये।"

"अरे नहीं भाई! पोस्ट हिट कराने का सबसे हिट फॉर्मूला तो सिर्फ विवादास्पद पोस्ट लिखना है सो हमने आप को बता ही दिया था।"

"पर लिख्खाड़ानन्द जी अब ये विवादास्पद पोस्ट लिखने वाला फॉर्मूला टॉप नहीं रह गया है क्योंकि आजकल लोग नर-नारी और धर्मों के विवाद को ज्यादा तूल नहीं देते। आपने तो देखा ही होगा कि पिछले कुछ समय से नर-नारी और धर्मों के विवाद वाले पोस्ट आ ही नहीं रहे हैं। और एकाध पोस्ट आ भी जाता है तो वो हिट बिल्कुल नहीं होता। हाँ वो साइबर स्क्वैटिंग वाले एक पोस्ट ने जरूर धूम मचाया था। और हम तो ऐसा पोस्ट लिख ही नहीं सकते क्योंकि इसमें तो बहुत कानूनी लोचा है। हमने ऐसा पोस्ट लिखा और किसी ने यदि कोर्ट-कचहरी के चक्कर में घसीट ही दिया तो हमें तो लेने के देने पड़ जायेंगे। भाई, बड़ी मुश्किल से तो मौज लेने के लिये हम ब्लोगिंग करने का समय निकाल पाते हैं, कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाने के लिये कहाँ समय है हमारे पास?"

"कह तो आप रहे हैं सही टिप्पण्यानन्द जी! पर गलत है। अगर पोस्ट हिट कराना है तो रिस्क तो लेना ही पड़ेगा। वो कहते हैं ना 'नो रिस्क नो गेन!' याने कि "चाहे जूते पड़े हजार, तमाशा घुस के देखेंगे!" अब जब ब्लोगिंग रूपी ओखली में सिर दे ही दिया है तो कानूनी लफड़ों की मूसलों से भला क्या डरना?"

"नहीं नहीं लिख्खाड़ानन्द जी! हम तो ऐसा रिस्क बिल्कुल नहीं ले सकते क्योंकि हम कानूनी लफड़ों से बहुत डरते हैं।"

"आप तो बस 'सिटल्ली साव' ही निकले भई! ठीक है, मत लो रिस्क पर आपका पोस्ट भी हिट नहीं होगा।"

"अरे कैसे हमारा पोस्ट हिट नहीं होगा? हम तो करा के ही रहेंगे अपने पोस्ट को हिट!"

"कैसे करवा लोग अपना पोस्ट हिट? भला हम भी तो जानें!"

"वो क्या है लिख्खाड़ानन्द जी! आपकी इस बात को हमने गाँठ बाँध कर धर लिया है कि हिन्दी पोस्ट को पाठकों से कुछ लेना देना नहीं है। अंग्रेजी ब्लोगिंग को विराट कवि सम्मेलन जैसा समझा जा सकता है जहाँ पर कुछ संख्या में कविगण आते हैं और उन्हें सुनने के लिये विशाल संख्या में श्रोतागण पहुँचते हैं। किन्तु हिन्दी ब्लोगिंग कवि सम्मेलन होकर कवि गोष्ठी है जहाँ पर सिर्फ कवि ही कवि आते हैं और एक-दूसरे की कविताएँ सुन-सुना कर वाह वाह करते हैं। यही कारण है कि हिन्दी पोस्ट तब हिट होती है जब वहाँ पर अधिक से अधिक ब्लोगर्स आयें और टिप्पणी करें। इसका मतलब यह है कि हमें सिर्फ ब्लोगर्स की पसंदीदा बातें लिख कर उन्हें अधिक से अधिक संख्या में आकर्षित करना है। इसी बात को ध्यान में रखकर हमने पोस्ट हिट कराने के दो और टॉप फॉर्मूलों की खोज कर ली है। वैसे हम इन फॉर्मूलों को किसी को बताना तो नहीं चाहते थे पर आप से हमारी कौन सी बात छुपी है भला? इसलिये आपको बता देते हैं।"

"तो फिर देर किस बात की? जल्दी बताइये ना!"

"तो दिल थाम लीजिये और सुनिये! एक फॉर्मूला तो यह है कि किसी पोस्ट में की गई भविष्यवाणी की सत्यता साबित करते हुए पोस्ट लिख मारना। बस आप एक ऐसी पोस्ट लिख भर दें और देखें कि कैसे धड़ाधड़ टिप्पणियाँ आनी शुरू होती है! ऐसे पोस्ट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जहाँ भविष्यवाणी की सत्यता के पक्ष में टिप्पणियाँ मिलती हैं वही उसके विपक्ष में भी बहुत सारी टिप्पणियाँ मिल जाती हैं। इस प्रकार से पोस्ट हिट हो जाता है।"

"आपकी बात में तो दम जरूर है टिप्पण्यानन्द जी!"

"धन्यवाद लिख्खाड़ानन्द जी! अब हम आपको पोस्ट हिट कराने का एक और सबसे टॉप फॉर्मूला बताते हैं। बस एक पोस्ट ब्लोगिंग छोड़ देने की धमकी देते हुए लिख दीजिये और देखिये कि वह पोस्ट कितनी अधिक पसंद प्राप्त करती है। ऐसे पोस्ट को पसंद किया जाना साबित करता है कि आपके ब्लोगिंग छोड़ देने को बहुत से लोग पसंद करते हैं। कई लोग तो सिर्फ इसलिये ऐसे पोस्ट को पसंद कर लेते हैं कि उन्हें लगता है कि आपका यह पोस्ट आखरी पोस्ट है और बाद में आपके पोस्ट को पसंद करने और उसमें टिप्पणी लिखने से जान छूट जायेगी!"

"अच्छा टिप्पण्यानन्द जी! अब आप अपनी हिट होने वाली पोस्ट की कुछ झलकी भी तो दीजिये हमें."

"तो लीजिये, पेश करता हूँ

ये ब्लोगिंग है इस ब्लोगिंग का यही है यही है यही है रंग रूप
थोड़ा झगड़ा थोड़ा लफड़ा यही है यही है यही है छाँव धूप

ज्ञान से न विद्या से धन से ना व्यवसाय से
पोस्टों की डोर बंधी है टिप्पणी की आय से
तोड़ो मरोड़ो कुछ भी छोड़ो सब कुछ ही ब्लोगिंग है
ये ब्लोगिंग है .... "

"वाह! वाह!! क्या खूब लिखा है!!! आप की ये पोस्ट तो अभी से ही हिट हो गई जी!!!!

"टिप्पण्यानन्द जी! आज तो कमाल की बातें बतलाईं आपने! चलिये इसी खुशी में हम आपको चाय पिलवाते हैं"

"धन्यवाद लिख्खाड़ानन्द जी! पर मैं जरा जल्दी में हूँ, यदि देर हो जायेगी तो श्रीमती जी का पारा चढ़ जायेगा। इसलिये अब चलते हैं। नमस्कार!"

"नमस्कार!"

अस्वीकरण (डिस्क्लेमर): इस पोस्ट का उद्देश्य निर्मल आनन्द मात्र है अतः कृपया इसे गम्भीरतापूर्वक लेने का प्रयास न करें।
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