Friday, February 26, 2010

बुद्धू बढ़ गया ब्लोगिंग कर के हाँ जी हाँ जी कहना

कुतिया ले गई बाघ को धर के,
हाँ जी हाँ जी कहना।
बुद्धू बढ़ गया ब्लोगिंग कर के,
हाँ जी हाँ जी कहना॥

कोई कविता करे पोस्ट में,
कोई लिखे कहानी।
कोई लिखे कुछ ऐसा यारों,
समझ नहीं जो आनी।
ब्लोगर लिखते चिंतन कर के,
हाँ जी हाँ जी कहना।
बुद्धू बढ़ गया ब्लोगिंग कर के,
हाँ जी हाँ जी कहना॥

हिन्दी में अंगरेजी डाले,
वो ज्ञानी कहलाये।
हिन्दी मे है शर्म कहाँ जो,
पानी पानी हो जाये।
जोश दिलाओ टिप्पी कर के,
हाँ जी हाँ जी कहना।
बुद्धू बढ़ गया ब्लोगिंग कर के,
हाँ जी हाँ जी कहना॥

ज्ञान ध्यान की बात मिले ना,
तो निराश मत होना।
कुत्ता-बिल्ली पगला-पगली,
पढ़कर तुम मत रोना॥
लिखा है इसको मेहनत कर के,
हाँ जी हाँ जी कहना।
बुद्धू बढ़ गया ब्लोगिंग कर के,
हाँ जी हाँ जी कहना॥

ऊपर-ऊपर से जो निकले,
दर्शन उसे बताओ।
समझ ना आया कहकर क्यों तुम,
अज्ञानी कहलाओ?
दुःखी ना होना उसको पढ़ के,
हाँ जी हाँ जी कहना।
बुद्धू बढ़ गया ब्लोगिंग कर के,
हाँ जी हाँ जी कहना॥

अन्धों की नगरी में भैया,
राजा होता काना।
हिन्दी ब्लोगिंग भी है ऐसी,
लोगों ने है जाना॥
गर कोई कह जाये ऐसा,
ना जी ना जी कहना।
बुद्धू बढ़ गया ब्लोगिंग कर के,
हाँ जी हाँ जी कहना॥
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