Sunday, February 28, 2010

एक तो इतवार ऊपर से होली ... आज तो बस टिपियाओ पोस्ट पढ़ने को मारो गोली

वैसे ही सप्ताहान्त अर्थात् शनिवार और इतवार को लोग ब्लोग्स में कम ही जाते हैं। फिर आज तो इतवार के साथ ही साथ होलिकादहन भी है। याने कि करेला वो भी नीमचढ़ा! आज के दिन भला पोस्ट कौन पढ़ता है? आज तो बस टिपिया टिपया कर शुभकामनाएँ देने का दिन है।

भाई, सप्ताह में केवल एक बार ही तो इतवार आता है। ज्यूडिश/ ईसाई बाइबल में कहा गया है कि ईश्वर ने पहले ब्रह्मांड का निर्माण करने में छः दिन खर्च करने के बाद सातवें दिन अर्थात् रविवार को विश्राम किया था। जब ईश्वर ने इस दिन विश्राम किया था तो हम क्यों नहीं करेंगे? हम तो ये सोचते हैं कि काश! सप्ताह में तीन-चार इतवार आते! कितना मजा आता अगर ऐसा होता तो!

पर ये ब्लोग है कि आराम करने ही नहीं देता। थोड़ा आराम करने के लेटे नहीं कि दिमाग में घूमने लगता है कि क्या पोस्ट लिखें? क्या टिपियायें? और तत्काल उठकर कम्प्यूटर के सामने बैठ जाते हैं।

सोचता हूँ कि ब्लोगिंग का नशा तो पहले से ही है और ऊपर से होली मनाने के लिये दोस्तों के साथ दो-तीन पैग अलग चढ़ा लिया है। याने कि फिर से एक बार नीमचढ़ा करेला। ऐसे में क्या खाक पोस्ट लिखा जा सकता है। दिमाग सोचता कुछ है और उँगलियाँ कुछ और टाइप करने लगती हैं। इसलिये आज इतना ही लिखकर पोस्ट खत्म कर देता हूँ और जा रहा हूँ होली के हुड़दंग में।

आप तथा सभी ब्लॉगर मित्रों को होली की शुभकामनाएँ!

चलते-चलते

बाइबिल के ईश्वर ने तो विश्राम कर भी लिया पर हमारे ब्रह्मा जी हैं कि बिना आराम किये लगातार काम करते रहते हैं। आखिर वे लगातार काम नहीं करेंगे तो फिर सृष्टि में जीवों का जन्म होना जो रुक जायेगा। लाखों वर्ष बीत गये पर एक भी बार छुट्टी नहीं ली उन्होंने। पर एक बार इतना आवश्यक कार्य आन पड़ा कि मजबूर होकर एक माह की छुट्टी लेनी ही पड़ गई। पर यही चिन्ता खाये जा रही थी उन्हें कि मेरे छुट्टी में जाने पर कैसे चलेगा। उनकी चिन्ता देखकर उनके असिस्टेंट ने उन्हें विश्वास दिलाया कि मैं सब कुछ सम्हाल लूँगा, आप निश्चिन्त हो कर छुट्टी में जायें।

एक माह की छुट्टी के बाद आते ही ब्रह्मा जी सुपर कम्प्यूटर खोल कर बैठ गये और निरीक्षण करने लगे कि सब कुछ ठीक हुआ है या नहीं। उनका असिस्टेंट उनके पास ही बैठा था।

सहसा ब्रह्मा जी अपने असिस्टेंट को सम्बोधित कर के बोल उठे, "अरे तूने ये क्या किया? इस एक माह में तूने जितने मनुष्य बनाये हैं उन्हें दिमाग तो तूने दिया ही नहीं।"

असिस्टेंट ने सर खुजाते हुए स्वीकार किया, "हाँ, ये गलती तो हो गई।"

"पर अब क्या होगा?"

"ऐसा करते हैं कि इन लोगों के लिये यहाँ से दिमाग ट्रांसमिट कर देते हैं।"

"पर यहाँ से ट्रांसमिट किया हुआ दिमाग उन्हें मिलेगा कैसे?"

"तो उसके लिये उन्हें एक एक एंटीना दे देते हैं!"

"और किसी के एंटीना ने ज्यादा दिमाग रिसीव्ह कर लिया तो?"

"तो इसके लिये उन्हें एक एक अर्थिंग भी दे देते हैं!"

बुरा ना मानो होली है!
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