Thursday, April 1, 2010

किसे मूर्ख बना रहे हैं आप? ... हम तो पहले से ही मूर्ख हैं

हाँ भाई, हम स्वीकार कर रहे हैं कि हम पहले से ही मूर्ख हैं। अब आप खुद सोचें कि किसी मूर्ख को मूर्ख बनाकर आप खुद ही मूर्ख बनेंगे कि नहीं? आज हम "एप्रिल फूल डे" मना कर खुश हो रहे हैं यह हमारी मूर्खता नहीं है तो क्या है? क्या कोई बुद्धिमान अपनी संस्कृति, सभ्यता, रहन सहन आदि को भूल कर विदेशियों का अनुकरण कर सकता है? ऐसा काम तो सिर्फ मूर्ख ही करते हैं। अब तो आप समझ ही गये होंगे कि हम पक्के मूर्ख हैं। तो कृपया हम मूर्ख को और मूर्ख बना कर अपनी बुद्धि को बर्बाद करने की कोशिश ना करें।

मूर्ख होना हमारी नियति है; हम मूर्ख थे, मूर्ख हैं और मूर्ख ही रहेंगे।
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