Friday, April 9, 2010

शवयात्रा से वापस आने पर नीमयुक्त पानी से स्नान

हमारे छत्तीसगढ़ में एक परम्परा है कि जब कोई व्यक्ति किसी की शवयात्रा में जाता है तो उसके घर में गृहणी घर के दरवाजे के पास मिट्टी के चूल्हा जला कर उस पर पानी से भरी हुई मिट्टी की हांडी चढ़ा देती है साथ ही हांडी के भीतर के पानी में नीम की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं। जब व्यक्ति शवयात्रा से वापस आता है तो उसे उसी पानी से स्नान करना पड़ता है और स्नान के बाद बचे पानी में अपने कपड़े को डाल देना होता है।

कमोबेश पूरे भारत में इस प्रकार की परम्पराएँ पाई जाती हैं। स्पष्ट है कि हमारे पूर्वज अच्छी प्रकार से जानते थे कि शवदाह से उत्पन्न धुएँ में विषाक्त कीटाणु होते हैं। इन्हीं कीटाणुओं को जो कि व्यक्ति के शरीर और कपड़ों में चिपक कर घर तक आ जाते हैं नीमयुक्त पानी, जो कि प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है, नष्ट कर देता है।

कितनी विज्ञानसम्मत हैं हमारी परम्पराएँ! हमें अपनी परम्पराओं पर गर्व है!
Post a Comment